लखवी पर चीन का दिया घाव कभी नहीं भरेगा

Posted on July 11 2015 by pits

नई दिल्लीः चीन ने मुंबई हमले के मास्टरमाइंड जकीउर रहमान लखवी को रिहा करने वाले पाकिस्तान पर कार्रवाई की मांग वाले प्रस्ताव को रोककर भारत को बेहद करारा झटका दिया। एक समाचार एजेंसी ने अपने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि चीन के इस कदम के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी नेतृत्व के साथ इस मुद्दे को उठाया है ।

विदेश मामलों के एक्सपर्ट्स के मुताबिक चीन के इस विरोध के बाद भारत प्रतिबंधों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र की समिति में लखवी के इस मामले को कभी खुद से नहीं ले जा पाएगा । यानी चीन ने भारत के लिए इस मामले में स्वयं पहल करने के दरवाजे बंद कर दिए हैं।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक भारत के सामने अब एक ही विकल्प बचा है। वह यह है कि अगर यूएन के वे स्थायी सदस्य, जिनके नागरिक 26/11 के हमले में मारे गए हैं, ऐतिहासिक पहले करते हुए यह मामला यूएन में ले जाएं। लेकिन यह करीब-करीब बता दें कि चीन ने लखवी की रिहाई को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग संबंधी भारत के कदम को रोक दिया था।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार प्रतिबंधों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र की समिति ने भारत के आग्रह पर बैठक की, जिसमें मुंबई हमले के मामले में लखवी की रिहाई को लेकर पाकिस्तान से स्पष्टीकरण मांगा जाना था, लेकिन चीन के प्रतिनिधियों ने इस आधार पर इस कदम को रोक दिया कि भारत के पास पर्याप्त सूचना नहीं है।

समिति के मौजूदा प्रमुख जिम मैकले को लिखे पत्र में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि अशोक मुखर्जी ने पिछले महीने कहा था कि पाकिस्तानी अदालत द्वारा रिहा किया जाना 1267 संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव का उल्लंघन है। प्रतिबंध संबंधी कदम अलकायदा और लश्कर-ए-तैयबा सहित आतंकवादी संगठन से संबंधित व्यक्तियों और इकाइयों पर लागू होता है।

समिति में संयुक्त राष्ट्र के पांचों स्थायी देश और 10 अस्थायी देश होते हैं। लखवी की रिहाई को लेकर अमेरिका, रूस, फ्रांस और जर्मनी में चिंता जताई गई थी और उसकी फिर से गिरफ्तारी की मांग की गई थी।

मुंबई हमले को लेकर लखवी और छह अन्य लोगों को पाकिस्तानी में अभियुक्त बनाया गया। नवंबर 2008 में मुंबई के कई प्रमुख स्थानों पर हुए आतंकवादी हमले में 166 लोग मारे गए थे। पाकिस्तान की एक अदालत ने बीते नौ अप्रैल को लखवी को रिहा किया था। इस पर भारत ने कहा कि लखवी की रिहाई से पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद पर बार-बार दिए गए आश्वासनों की अहमियत का क्षरण हुआ है।

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