मालवणी कांड : अब मुआवजे पर ‘महाभारत’

Posted on July 11 2015 by pits

मृतकों के परिजन ने लगाई सरकार और प्रशासन से गुहार

दस्तावेज और अकाउंट नहीं होने से मुआवजा पाने से वंचित

मृतकों की संख्या-102

भर्ती लोगों की संख्या-42

मुंबई:मालवणी देशी दारू कांड में मारे गए लोगों के परिजन को सरकार ने मुआवजे के तौर पर एक-एक लाख रुपये के चेक देने की घोषणा की। मगर, सच तो यह है कि सरकारी मुआवजे में मिले इस चेक पर महाभारत शुरू हो गई है। कई लोगों को मुआवजे के चेक तो मिले, मगर अकाउंट या संबंधित दस्तावेज नहीं होने की वजह से वे (मृतकों के परिजन)मुआवजे की रकम प्राप्त करने में असमर्थ हैं। प्रभावित क्षेत्र में ऐसे लोगों की संख्या काफी बताई जा रही है।

इन्हीं में से एक हैं खरौडी गांव के निवासी मृतक विठ्ठल साबले (65) का बेटा श्रवण साबले (27), जो अपनी समस्या लेकर मालवणी पुलिस स्टेशन में डीसीपी से मिलने आया था। उसने पत्र लिखकर प्रशासन से मुआवजा दिलवाने की अपील की। कुछ ऐसी ही कहानी रजिया कोलार, बीना ताई, रेहाना शेख और मृतक मनटुन चौपाल के परिजन की है।

रास्ते में मरने पर मुआवजा नहीं

जुरासिक पार्क, लक्ष्मी नगर और अली तालाब इलाके में कई परिवार ऐसे हैं, जिनके लोगों की मौत बीच रास्ते में ही हो गई थी। इसके चलते उन्हें न तो बीएमसी का कोई प्रमाण पत्र मिला और न ही अस्पतालों से पोस्टमॉर्टम की कोई रिपोर्ट, जबकि उनके रिश्तेदारों की मौत देशी दारू पीने से हुई हैं। इसके चलते उन्हें मुआवजे की रकम नहीं मिली।

लक्ष्मी नगर में रहने वाली गंगू घुलेकर (26) बताती हैं, ‘मेरे पति अशोक घुलेकर (32) की मौत शुक्रवार सुबह उस वक़्त हुई थी, जब मैं उन्हें बेहोशी की हालत में शताब्दी हॉस्पिटल ले जा रही थी। घर से निकलने के बाद जैसे ही ऑटोरिक्शा मालवणी कब्रिस्तान के पास पहुंचा, उनकी मौत हो गई। मैं वापस आ गई और अंतिम संस्कार में जुट गई।’

कुछ ऐसा ही हाल सरिता यादव और बाबू भाई का भी है। उनके परिजन की भी कांदवली के शताब्दी अस्पताल पहुंचने से पहले ही बीच रस्ते में मौत हो गई थी। इन लोगों के पास अस्पताल का प्रमाण पत्र नहीं होने की वजह से इन्हें सरकारी मुआवजा पाने का हकदार नहीं माना गया।

चेक बांटने में भेदभाव

आलम यह है कि सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक लक्ष्मी नगर में सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं, लेकिन सरकारी बाबू इन इलाकों के प्रभावित लोगों को नजरअंदाज करने में लगे हैं। अधिकतर लोगों ने बताया कि उन्हें अभी तक चेक ही नहीं मिले हैं, जबकि नाम दर्ज करवाए हुए तीन दिन हो गए हैं। प्रभावितों ने तो स्थानीय नेताओं पर भेदभाव बरतने का आरोप लगाया है। रातौडी गांव के मृतक गेनू शिंदे, मृतक महबूब कोलार, मृतक अशोक माने और मृतक अशोक घुलेकर के परिजन का आरोप है कि स्थानीय लोगों ने उन्हें सरकारी मुआवजा पाने से वंचित रख दिया है। उनके घर में सबसे पहले मौत हुई थीं, मगर उन लोगों को चेक ही नहीं दिया गया है। चेक बांटने वाले लोग भेदभाव कर रहे हैं।

कोट-

जिनके पास दस्तावेज नहीं हैं। वे सीधे मेरे कार्यालय में संपर्क करें। उन्हें हर संभव मदद दी जाएगी। – सांसद गोपाल शेट्टी, बीजेपी, बोरिवली लोकसभा क्षेत्र

Powered By Indic IME