डिग्री विवाद में स्मृति को बड़ा झटका, कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार

Posted on July 11 2015 by pits

नई दिल्ली: चुनाव आयोग के समक्ष पेश हलफनामे में अपनी शैक्षणिक योग्यता को लेकर गलत जानकारी देने आरोप में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के खिलाफ दायर याचिका कोर्ट ने स्वीकार कर ली है और अब 28 अगस्त को अगली सुनवाई होगी। पटियाला हाउस कोर्ट स्थित मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट आकाश जैन ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने एक जून को केंद्रीय मंत्री ईरानी के खिलाफ दाखिल शिकायत पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था।

ये है मामला
स्वतंत्र लेखक अहमर खान ने अदालत में दाखिल शिकायत मेें कहा कि केंद्रीय मंत्री ईरानी ने लोकसभा और बाद में राज्यसभा के चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करते समय चुनाव आयोग के समक्ष पेश तीन हलफनामे पेश किए थे, जिनमे उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में अलग-अलग ब्यौरा दिया है। उनके मुताबिक, ईरानी ने अप्रैल 2004 में लोकसभा चुनाव के लिए दाखिल अपने हलफनामे में कहा था कि उन्होंने 1996 में दिल्ली विश्वविद्यालय के पत्राचार से बीए किया, जबकि 11 जुलाई 2011 को गुजरात से राज्यसभा चुनाव के लिए आयोग के समक्ष दाखिल हलफनामे में उन्होंने अपनी सर्वोच्च शैक्षणिक योग्यता डीयू के पत्राचार से बीकॉम पार्ट बताई।

क्या तोमर की तरह स्मृति ईरानी को गिरफ्तार करेगी दिल्ली पुलिस

वहीं इस मामले में कोर्ट के फैसले के बाद सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। पहला हमला आम आदमी पार्टी ने किया है। जितेंद्र सिंह तोमर की फर्जी डिग्री मामले में किरकिरी झेल रही ‘आप’ की ओर से आशुतोष ने ट्वीट किया है। उन्होंने पूछा है, ‘कोर्ट ने स्मृति ईरानी मामले को सुनवाई के लायक माना है। क्या दिल्ली पुलिस तोमर की तरह उन्हें भी गिरफ्तार करेगी? क्या मोदी अपनी मंत्री से इस्तीफा लेंगे?’ कांग्रेस ने भी केंद्र पर जुबानी प्रहार किया है। कांग्रेस ने स्मृति ईरानी के इस्तीफे की मांग की है।

 

टीवी की चकाचौंध भरी दुनिया से आखिर तुलसी कैसे पहुंचीं राजनीति में-

दिल्ली में हुआ जन्म
दिल्ली में स्मृति ईरानी का जन्म 23 मार्च 1976 को हुआ था। वह स्कूल में काफी होनहार छात्र मानी जाती थी। वो अपने स्कूल के स्पोटर्स टीम की कैप्टन हुआ करती थीं। 10वीं की परीक्षा पास करने के बाद ही स्मृति ने काम करना शुरू कर दिया था। वह खुद बताती हैं कि अपने पिता की मदद करने के लिए वो सौंदर्य प्रसाधनों को बेचा करती थीं।

मिस इंडिया में कॉन्टेस्ट में लिया हिस्सा
स्मृति ने 1998 में ग्लैमर की दुनिया में कदम रखा, उन्होंने 1998 में मिस इंडिया प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, लेकिन फाइनल तक नहीं पहुंच पाईं। इसके बाद स्मृति ने मुंबई जाकर एक्टिंग में करियर बनाने की कोशिश की। मुंबई जाने के बाद स्मृति को काम तो नहीं मिला, लिहाजा अपना खर्च चलाने के लिए उन्हें एक रेस्टोरेंट में सफाई तक करनी पड़ी। उन्हीं दिनों स्मृति को मीका के एलबम में काम करने का मौका मिला, इस एलबम के बाद स्मृति को एक दो सीरियल में छोटे रोल मिले।

कैसे बनीं तुलसी
स्मृति की किस्मत तब खुली जब एकता कपूर ने उन्हें अपने सीरियल ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में तुलसी के किरदार के लिए ऑफर दिया। तुलसी बनकर स्मृति हर घर में छा गईं। लोग इस सीरियल के दीवाने हो गए। इस सीरियल ने टीआरपी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, तुलसी के किरदार और इस सीरियल की कामयाबी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ये सीरियल आठ सालों तक छोटे पर्दे पर छाया रहा।

जुबिन ईरानी से हुई शादी
इसी दौरान उनकी शादी जुबिन ईरानी के साथ हुई और स्मृति मलहोत्रा, स्मृति ईरानी बन गईं। उनके दो बच्चे है।

राजनीति में ऐसे हुई एंट्री
स्मृति ने 2003 में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर उन्होंने दिल्ली के चांदनी चौक लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, वो कांग्रेस के उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल से हार गईं। 2004 में उन्हें महाराष्ट्र यूथ विंग का उपाध्यक्ष बनाया गया। 2010 में उन्हें बीजेपी महिला मोर्चा की कमान सौंपी गई, 2011 में वो गुजरात से राज्यसभा की सांसद चुनी गई और इसी साल इनको हिमाचल प्रदेश में महिला मोर्चे की भी कमान सौंपी गई। 2014 में स्मृति ने राहुल गांधी और आप नेता कुमार विश्वास के खिलाफ अमेठी से चुनाव लड़कर उन्हें कड़ी चुनौती दी। हालांकि स्मृति ये चुनाव हार गईं, लेकिन बीजेपी ने उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर मानव संसाधन जैसा अहम मंत्रालय सौंप दिया गया। ईरानी ने 26 मई को मंत्री पद की शपथ ली।

विवादों से गहरा नाता
इससे पहले कि वो अपने मंत्रालय में कामकाज संभालतीं कांग्रेस पार्टी ने उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर सवाल खड़े कर दिए थे। उनपर आरोप लगा कि 2004 और 2014 के चुनावों में अपनी शैक्षणिक योग्यता को लेकर झूठे हलफनामें दिए।  मृति को लेकर विवादों में एक कड़ी तब और जुड़ गई थी, जब दिल्ली यूनिवर्सिटी के ओपन स्कूल ऑफ लर्निंग से उनके शैक्षणिक दस्तावेज लीक होने के मामले में पांच कर्मिचारियों को सस्पेंड कर दिया गया। दिल्ली यूनीवर्सिटी के चार साल के डिग्री कोर्स को वापस तीन साल में बदलने को लेकर जहां वो विवादों में रही हैं, वहीं उन पर ये आरोप भी लगा है, कि वो आईआईटी के पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए भी यूजीसी का सहारा ले रही हैं।

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