कांग्रेस का ‘स्टिंग ऑपरेशन’?

Posted on July 11 2015 by pits

चंदन पवार (मुंबई): महाराष्ट्र सरकार के तीन और मंत्रियों को विवाद में घेरने की तैयारी की जा रही है। एक वर्तमान पत्र के हवाले से और कांग्रेस के सूत्रों जरीये भाजपा के तीन मंत्रियों का स्टिंग ऑपरेशनकिया जा चुका है। इसकी फिलहाल बारीकी से जांच-परख की जा रही है। जुलाई में शुरू हो रहे विधानमंडल के अधिवेशन में धमाकाकरने का खाका बन रहा है। दबे-छिपे तौर पर सीक्रेटयोजना पर काम चल रहा है।

 

पिछला सप्ताह देवेंद्र फडणवीस मंत्रिमंडल के वरिष्ठतम मंत्रियों के लिए परेशानी भरा गुजरा है। पहले शिक्षा मंत्री विनोद तावडे की ‘बी.ई.- इलेक्ट्रॉनिक्स’ डिग्री को लेकर उठे बवाल पर राजनीतिक माहौल गरमाया रहा, फिर 206 करोड़ रुपये के ‘चिक्की ठेके’ को लेकर महिला व बाल कल्याण मंत्री पंकजा मुंडे पर आरोप दागे गए। कांग्रेस सूत्रों की मानें, तो इन ‘पटाखों की शृंखला’ में नए विस्फोटक जोड़ने का मास्टर प्लान बनाया जा रहा है। वैसे, दबे स्वरों में यह भी चर्चा है कि मंत्री पंकजा के खिलाफ ‘मसाला’ उन्हीं के परिवार से आया है। पंकजा और उनके चचेरे भाई धनंजय के बीच बीड जिले में राजनीतिक वर्चस्व को लेकर स्पर्धा जारी है। वैद्यनाथ सहकारी शक्कर कारखाने में वर्चस्व को लेकर बीते रविवार दोनों एक-दूसरे के खिलाफ सड़क पर उतर आए थे। पंकजा के पिता और धनंजय के चाचा, दिवंगत नेता गोपीनाथ मुंडे ने इस कारखाने की स्थापना की थी। धनंजय और उनके पिता पंडितराव ने गोपीनाथ जी के जीवनकाल में उन्हें छोड़कर एनसीपी का दामन थाम लिया था। शरद पवार ने पुराने दिग्गज नेताओं को दरकिनार करते हुए धनंजय को विधानपरिषद में विपक्ष का नेता बनाया हुआ है। दूसरी तरफ, विधानसभा में विपक्ष के नेता का पद कांग्रेस के पास है। अधिकांश दिग्गजों की पराजय के चलते यह पद राधाकृष्ण विखे पाटील के पास पहुंच गया है। राधाकृष्ण का परफार्मेंस बहुत अच्छा नहीं रहा है। नारायण राणे जैसे नेता विखे पाटील के कमजोर कामकाज पर प्रश्नचिन्ह उठा चुके हैं। वे ‘तिलक भवन’ कांग्रेस मुख्यालय से ज्यादा ‘सीएम ऑफिस’ में क्यों देखे जाते हैं, यह सवाल काफी समय से पूछा जा रहा है। इन आलोचकों का जवाब देने के लिए विखे पाटील भी बेताब बताए जा रहे हैं। पाटील ने अहमदनगर में गुरुवार को पत्रकारों को बताया कि वे अगले वर्षाकालीन सत्र में ‘धमाका’ करेंगे।

चर्चा है कि छिपे हुए कैमरों से मंत्रियों के विडियो बनाए गए हैं, जिनमें उन्हें आपत्तिजनक बयान देते हुए रिकॉर्ड किया गया है। इनमें से वास्तव में कितने विडियो जनता के बीच लाए जाते हैं, इस बारे में अभी केवल अटकलें लगाई जा सकती हैं। फडणवीस सरकार के लिए पिछले दो सत्र ‘मक्खन की तरह’ बीते हैं, इनमें कांटे बिछाने के विपक्ष के मंसूबे क्या वास्तव में रंग लाएंगे?

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