महिलाओं के खिलाफ क्राइम रोकने के लिए निर्भया पुरस्कार बेस्ट डिटेक्शन अधिकारी को मिलेगा मुख्यमंत्री पुरस्कार

Posted on June 20 2015 by pits

मुंबई: दिसंबर, 2012 को जब दिल्ली में निर्भया के साथ बस में रेप के बाद उसे व उसके बॉयफ्रेंड को सड़क पर फेंका गया था, तो बॉयफ्रेंड उधर से गुजरी गाडियों में बैठे लोगों से मदद का अनुरोध कर रहा था, लेकिन लोग देखकर भी वहां रुके नहीं थे। निर्भया की करीब एक महीने बाद मौत हो गई थी। तब यही कहा गया था कि पब्लिक किसी वारदात के बाद पीड़ित या पीड़िता की इसलिए भी मदद के लिए नहीं आती, क्योंकि वह पुलिस के पचड़ों में नहीं पड़ना चाहती। महाराष्ट्र सरकार ने पब्लिक की इस सोच को बदलने और उसे महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने में पुलिस की मदद के लिए आगे आने के वास्ते एक महत्वपूर्ण पहल की है- निर्भया पुरस्कार के रूप में।

डीसीपी धनंजय कुलकर्णी ने एनबीटी को शुक्रवार को बताया कि इस पुरस्कार की राशि एक लाख रुपये निर्धारित की गई है। यह पुरस्कार हर साल दिया जाएगा और इस संबंध में राज्य सरकार ने जीआर भी निकाल दिया है। सरकार ने स्ट्रीट क्राइम रोकने और ऐसे अपराध होने पर केस के डिटेक्शन और कनविक्शन के लिए भी तीन पुरस्कार शुरू करने का फैसला किया है । इसे मुख्यमंत्री पुरस्कार नाम दिया गया है। इन तीन पुरस्कारों में एक पुरस्कार कनिष्ठ जांच अधिकारी को जबकि दूसरा वरिष्ठ जांच अधिकारी को दिया जाएगा। यदि उस केस में कनविक्शन हो गया, तो तीसरा पुरस्कार सरकारी वकील को दिया जाएगा। सरकार ने यह भी फैसला किया है कि यदि कोई पुलिस वाला किसी केस के डिटेक्शन में बेहतरीन काम करता है, तो उसके ACR (सालाना गोपनीय रिपोर्ट) में भी उसके इस काम का जिक्र किया जाएगा।

सरकार ने कनविक्शन रेट बढ़ाने के लिए राज्य के हर जिले में स्पेशल PP (विशेष सरकारी वकील) रखने का भी फैसला किया है। इसके लिए एक कमिटी बनाई गई है। इस कमिटी में जिले के कलेक्टर के अलावा वहां का एसपी भी रहेगा। यह कमिटी अलग -अलग केसों के लिए सिर्फ कुछ खास वकीलों को नहीं , बल्कि स्पेशलिस्ट वकीलों को बतौर स्पेशल PP बनाएगी। मसलन यदि कोई वकील आर्थिक अपराध से जुड़े केसों की पैरवी में विशेषज्ञ है, तो उसे फाइनैंशल क्राइम से जुड़े किसी हाई प्रफाइल केस के मुकदमे में लिया जाएगा। दूसरे तरह के क्राइम केसों के ट्रॉयल में भी उस फील्ड के नामी ऐडवोकेट को लिया जाएगा।

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