सप्ताह की खास मुलाकात

Posted on January 12 2015 by pits

मेरी कला मेरी साधना है- कंचन महंते (पेंटिंग कलाकार )

समाजसेवा करते हुए इन्हें लगा कि समाज के लोगों कि अगर पूरी तरह से मदद करनी है तो पैसे भी खुद ही कमाने पड़ेंगे और लोगों की मदद करने के उद्देश्य से कंचन महंते ने निब पेंटिंग में महारत हासिल की. यह ऐसी पहली आर्टिस्ट हैं जिन्होंने निब पेंटिंग को सबके सामने रखा. हथेली पर रंगों को लेकर कैनवास को रंगना खूब जानती हैं कंचन जी. इनकी कला के बारे में इनसे बात की हमारी संवाददाता रजिया निसार ने.

आपकी रूची पेंटिंग की तरफ कैसे हुई?

मैंने अपनी कला के लिए कहीं से कोई शिक्षा नहीं ली है. मैंने जो भी सीखा है वह स्वयं ही सीखा है. यह भगवान का दिया हुआ एक उपहार है. इस कला में आने से पहले मैं एक समाज सेविका थी लेकिन समाजसेवा करते हुए मुझे एहसास हुआ कि समाजसेवा करने के लिए भी मुझे खुद ही इस काम के लिए पैसे इकट्ठे करने होंगे क्योंकि दूसरों के भरोसे मैं इनकी उतनी मदद नहीं कर सकती जितनी करनी चाहिए, इसलिए मैं इस कला के प्रति आकर्षित हुई.

 

अपनी कला के बारे में थोड़ा बताईए?

अपनी कला के लिए मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगी कि मैंने “निब पेंटिंग” में महारत हासिल की है और इस कला को अस्तित्व में लानेवाली मैं पहली इंसान हूं. यह मेरा ओरिजिनल कॉन्सेप्ट है और मैं इसे अपने नाम से रजिस्टर भी करवाना चाहती हूं. मुझे लगा पेंटिंग तो बहुत से लोग बनाते हैं इसलिए मुझे कुछ यूनिक क्रिएट करना चाहिए, इसलिए मैंने निब पेंटिंग बनाने की शुरुआत की. निब पेंटिंग किसी एम्ब्रायडरी के काम जैसा लगता है. किसी अन्य तरह की पेंटिंग बनाने में कलाकारों को 4 से 5 दिन लगते हैं लेकिन निब पेंटिंग बनाते हुए मुझे डेढ़ से 2 महीने का वक्त लग जाता है. मेरी कला मेरे लिए साधना है.

आपकी पेंटिंग में किन लोगों की छाप नज़र आती है?

मैं गौतम बुद्ध से प्रेरित हूं और मेरी पेंटिंग में उनकी ही छाप नजर आती है. हालाँकि अब मैं लोगों के लिए उनके कहने पर भगवान गणेश की भी निब पेंटिंग बनाने लगी हूं.

ईजल आर्ट गैलरी में आपने जो प्रदर्शनी लगाई जाएगी उसमें लोगों को क्या अलग देखने के लिए मिलेगा?

ईजल आर्ट गैलरी में लोगों को दो तरह की पेंटिंग देखने के लिए मिलेगी जो बहुत ही यूनिक है  और मुझे उम्मीद है लोगों को बहुत पसंद आएगी. मेरी पहली पेंटिंग तो निब पेंटिंग ही होगी और दूसरी क्रैकल पेंटिंग होगी. क्रैकल पेंटिंग में मेरी सोच यह कि जिस तरह से जमीन के बंजर हो जाने पर उसमें क्रैक पड़ जाते हैं तो ऐसी परिस्थिति में उस जमीन में भी गौतम बुद्ध जान डाल सकते हैं. मैं आपको एक और बात बताना चाहती हूं कि इस प्रदर्शनी से जो भी पैसे इकट्ठे होंगे वह शहीद जवानों के बच्चों की शिक्षा के लिए मैं डोनेट करुँगी.

आप निब, फ्लोरल, लैंडस्केप और भी कई तरह से पेंटिंग बनाती हैं, किस तरह की पेंटिंग करते हुए आपको सबसे ज्यादा मजा आता है?

मुझे सबसे ज्यादा मजा निब वर्क में आता है. मुझे इसमें किक मिलती है. शैडो पेंटिंग बनाते समय भी मुझे मजा आता है लेकिन मैंने इसे आसानी से बना लेती हूं लेकिन निब पेंटिंग बनाना आसान नहीं है और यह बहुत ही मुश्किन का, साधना का काम है और मुझे मुश्किल काम करने में ही मजा आता है. मैं निब वर्क में मेरी कॉम बनना चाहती हूं.

आपको लगता है पेंटिंग जैसी कला के प्रति लोगों का उतना समर्थन मिलता है जितना अन्य कला को मिलता है?

लोगों का अच्छा समर्थन मिलता है. मैं आपको एक बात बता दूँ जब मैं पेंटिंग बनाती हूं तो पूरी तरह से इसमें ही खो जाती हूं और अपनी पूरी सकारात्मक उर्जा अपनी पेंटिंग में डाल देती हूं ताकि यह जिसके भी घर में जाए उनके घर में भी सब अच्छा रहे. वह जब भी इस पेंटिंग को देखें उन्हें अच्छा महसूस हो और मुझे ऐसे लोगों के फ़ोन भी आते हैं जो मेरी पेंटिंग को अपने घर में लगाते हैं और उन्हें सकारात्मक महसूस होता है.

आपकी आगे की क्या योजना है?  

मेरा बस एक ही सपना है कि मैं अपने इस कला, निब वर्क को पूरे भारत के साथ पूरी दुनिया में भी फैलाना चाहती हूं. लोग इस कला को जाने और इसे सराहें. इस कला को समाज में उतनी प्रसिद्धी मिले जितनी इसे मिलनी चाहिए. मैं अपने काम से समाज का भला करना चाहती हूं. मासूम और जरुरत मंदों के आंसू पोछना चाहती हूं.

पेंटिंग प्रदर्शनी:

तारीख़: 30 जनवरी से 1 फेब्रवरी 2015 तक

समय: सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक

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