मछुआरे नहीं चाहते समुद्र में स्मारक बने

Posted on January 12 2015 by pits

मुंबई : मुंबई के मूल निवासी समझे जाने वाले कोली समाज को समुद्र में बनाए जाने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज के स्मारक के लिए चुनी गई जगह पर आपत्ति है। मुंबई के मछुआरों की संस्था ‘अखिल महाराष्ट्र मच्छीमार कृती समिति’ का आरोप है कि स्मारक बनाए जाने के लिए समुद्र में भराव करने से मछुआरे कोलियों की रोजी-रोटी पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और इससे चैत्यभूमि के किनारे के लिए भी खतरा बढ़ जाएगा। बता दें कि सरकार ने 19 फरवरी को छत्रपति शिवाजी महाराज स्मारक का भूमि पूजन करने की घोषणा कर रखी है।

मछुआरों का पक्ष 
मछुआरों के नेता दामोदर तांडेल ने इस बारे में मछुआरों का पक्ष रखते हुए कहा कि उनका विरोध स्मारक बनाने के लेकर नहीं है, बल्कि इस जगह पर स्मारक बनने से होने वाले गंभीर परिणामों को लेकर है। उन्होंने कहा कि नरीमन पॉइंट से राजभवन के बीच छत्रपति शिवाजी महाराज के स्मारक के लिए जो जगह सरकार ने चुनी है वह सुरक्षा कारणों से भी उपयुक्त नहीं है।
विरोध के तर्क 
1- समुद्र में स्मारक बनाने से मछलियों की उपलब्धता प्रभावित होगी और मछुआरों को मछलियां पकड़ने समुद्र में बहुत दूर तक अंदर जाना पड़ेगा। जिससे लागत और खतरा दोनों बढ़ जाएंगे।
2- स्मारक के लिए नरीमन पॉइंट और राजभवन के बीच समुद्र में भराव किया जाएगा तो समुद्री लहरों की मार दादर चौपाटी और चैत्यभूमि पर पड़ेगी और इससे चैत्यभूमि को खतरा हो सकता है।
3- सरकार ने स्मारक के लिए जो जगह चुनी है वह सुरक्षा की दृष्टि से भी उपयुक्त नहीं है। तांडेल का तर्क है कि इस जगह से मंत्रालय और राजभवन आतंकवादी हमले के लिए आसान टारगेट बन जाएंगे।
4- दक्षिण मुंबई में पहले से ही ट्रैफिक की समस्या विकराल है। अगर सरकार दक्षिण मुंबई में ही छत्रपति शिवाजी का अंतराष्ट्रीय स्मारक बनाती है तो इस तरफ ट्रैफिक बढ़ने से समस्या और बढ़ जाएगी।

बैंड स्टैंड बेहतर विकल्प 
‘अखिल महाराष्ट्र मच्छीमार कृती समिति’ का कहना है कि छत्रपति शिवाजी महाराज स्मारक के लिए बांद्रा वेस्ट में कार्टर रोड का बैंड स्टैंड बेहतर विकल्प हो सकता है। समुद्र का यह तट पथरीला है और यहां स्मारक बनाने से उतना नुकसान नहीं होगा।

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