2014 में भाजपा ने छुआ जीत का शिखर

Posted on December 28 2014 by pits

मुंबई (चंदन पवार): साल 2014 देखते ही देखते हमें अलविदा कहने के लिए तैयार है. इस साल बहुत सी ऐसी हलचलें हुई जिसने हमारा ध्यान खींचा लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहा देश में में भाजपा का केंद्र में आना. साल 2014 देश की राजनीति का गौरवशाली वर्ष रहा. देश को जहां ढुलमुल संप्रग सरकार से मुक्ति मिली वहीं, नरेंद्र मोदी के रूप में देश को एक सशक्त प्रधानमंत्री भी मिला. यह साल खास करके भाजपा के लिए महत्वपूर्ण रहा. मोदी की अगुवाई में भाजपा ने पूरे देश में जीत का भगवा परचम लहरा दिया.

भाजपा के इस अप्रत्याशित जीत के खास कारणों पर एक नजर:

2014 के आम चुनावों में जीत: 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला. राजग को कुल 543 लोकसभा सीटों में से 336 सीटों पर जीत प्राप्त हुई. जिसमें भाजपा ने 282 सीटों पर और भाजपा की सहयोगी पार्टियों को 54 सीटों पर जीत मिली. मोदी ने वाराणसी और वड़ोदरा दो सीटों से चुनाव लड़ा था और दोनों सीटों पर उन्होंने रिकार्ड बहुमत से जीत हासिल की. वाराणसी से आप पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को हार का मुंह देखना पड़ा. वहीं वड़ोदरा वाली सीट से भी कांग्रेस के मधुसूदन मिस्त्री भी अपनी जमानत जब्त करा बैठे लेकिन मोदी ने वड़ोदरा की सीट को छोड़कर वाराणसी को चुना. 26 मई 2014 को देश-विदेश के वी.वी.आई.पी. मेहमानों की मौजूदगी में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने नरेंद्र दामोदरदास मोदी को भारत के 15 वें प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई.

भाजपा की जीत के मुख्य कारण:

1) उत्तर प्रदेश में अमित शाह का करिश्मा: सोलहवीं लोकसभा चुनाव के लगभग 10 माह पूर्व शाह दिनांक 12 जून 2013 को भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया. तब प्रदेश में भाजपा की मात्र 10 लोकसभा सीटें ही थीं. उनके संगठनात्मक कौशल और नेतृत्व क्षमता का अंदाजा तब लगा जब 16 मई 2014 को सोलहवीं लोकसभा के चुनाव परिणाम आए. भाजपा ने उत्तर प्रदेश में 71 सीटें हासिल की. प्रदेश में भाजपा की ये अब तक की सबसे बड़ी जीत थी. उत्तर प्रदेश में भाजपा को मिला प्रचंड बहुमत से उत्तर प्रदेश की सारी विरोधी पार्टियां धराशाई हो गईं. इस करिश्माई जीत के शिल्पकार रहे अमित शाह का कद पार्टी के भीतर इतना बढ़ा कि उन्हें भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष का पद प्रदान किया गया.

2) मोदी लहर: लोकसभा चुनाव में ‘सबका साथ-सबका विकास’ के मूलमंत्र को लेकर नरेंद्र मोदी की अगुवाई में उतरी भाजपा ने पूरे देश में नमों-नमों का भगवा परचम लहरा दिया. मोदी के लच्छेदार भाषण ने देश की जनता का दिल जीत लिया. यहां तक कि मोदी की रैली को देखने के लिए लोग इतने उतावले थे कि वह देश के एक छोर से दूसरे छोर तक भी पहुंचने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं महसूस होती थी. मोदी ने भी इन सभी लोगों को निराश नहीं किया और अपने भाषण के माध्यम से उनके दिलों में इस कदर बस गए कि लोकसभा चुनाव में सिर्फ उन्हें सिर्फ मोदी की कमल सेल्फी ही दिखाई दी.

3) भाजपा कार्यकर्ताओं में जोश: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समय-समय पर भाजपा कार्यकर्ताओं से मिलना-जुलना और उनमें जोश भरना भाजपा की जीत का मुख्य कारण रहा. मोदी ही नहीं भाजपा के सभी बड़े नेताओं ने कार्यकर्ताओं में जनता के प्रति विश्वास हासिल करने का सुझाव दिया और उनकी हर समस्या पर सहायता करने को कहा. भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी अपने अथक मेहनत से जनता को जोड़कर रखा और भाजपा के प्रति विश्वास दिलाया. भाजपा के इन कार्यकर्ताओं ने अपना जोश कम नहीं होने दिया और पार्टी को जीत दिलाकर ही दम लिया.

4) पाकिस्तान के विरूद्ध मोदी का जवाब: जब-जब हमारे देश के सैनिकों पर पाकिस्तानी सेना ने संघर्ष विराम का उल्लंघन किया या सैनिकों की निर्मम हत्या की तब-तब देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से पहले गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तान के खिलाफ करारा जवाब दिया. मोदी का पाकिस्तान के विरूद्ध दिया गया करारा जवाब जनता के दिल में एक मजबूत नेता के रूप में छाप छोड़ गया.

5) गुजरात का विकास: गुजरात के विकास को लेकर मोदी ने पूरे देश में जोर-शोर से प्रचार किया. वहां की तरक्की को देखकर लोगों में भी एक विश्वास कायम हो गया कि यही वो शख्स है जो देश को विकास के माध्यम से आगे ले जाएगा. मोदी देश की जनता के विकास, सैनिकों की सुरक्षा, किसानों को पानी की सुविधा, अच्छे स्कूल और कालेज, चिकित्सा और खेती के विकास के बारे में बात करते थे. मोदी के अलावा देश का कोई भी नेता देश की तरक्की के बारे में नहीं बोल रहा था.

6) राजनाथ का सोशल इंजीनियर का गणित: भाजपा के अध्यक्ष के रूप में राजनाथ सिंह ने काफी सूझ-बूझ और निडरता के साथ काम किया. भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के लिए न चुनना लगभग टेढ़ी लकीर साबित हो रहा था. आडवाणी किसी भी कीमत पर मानने के लिए तैयार ही नहीं थे. इस मामले में वह कई बार गुस्से में दिखे और गोवा में होनेवाली मीटिंग में भी हिस्सा लेने से मना कर दिया था लेकिन राजनाथ सिंह और संघ भाजपा के भीष्म पितामह को मनाने में अंतत: कामयाब रहे.

7) विहिप का साथ: विश्व हिंदू परिषद ने भी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवारी के लिए नरेंद्र मोदी के नाम पर मुहर लगा दी. विहिप ने भी मोदी को देश का प्रधानमंत्री बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी. विहिप की अगुवाई में ही मोदी को वाराणसी संसदीय सीट से चुनाव लडऩे का समर्थन मिला. वहां के सांसद व भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी को काफी मशक्कत के बाद वाराणसी से हटाकर कानपुर से लड़ाया गया. मोदी ने काशी में जीत का शंखनाद बजा दिया हालांकि इससे ज्यादा वोटों से वह गुजरात के बड़ोदरा सीट से जीते थे लेकिन उन्होंने इस सीट को छोड़ दिया और वाराणसी को चुना.

भाजपा का पहला चुनाव: भाजपा ने अपना पहला लोकसभा चुनाव 1984 में लड़ा था. नई पार्टी होने के नाते आम चुनावों में केवल दो लोकसभा सीटें जीतने में सफल रही. इसके बाद राम जन्मभूमि आंदोलन ने पार्टी को ताकत दी. कुछ राज्यों में चुनाव जीतते हुए और राष्ट्रीय चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करते हुए 1996 में पार्टी भारतीय संसद में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी. इसे सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया जो 13 दिन चली. 1998 में आम चुनावों के बाद भाजपा के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(राजग) का निर्माण हुआ और अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में सरकार बनी जो एक वर्ष तक चली. इसके बाद आम-चुनावों में राजग को पुन: पूर्ण बहुमत मिला और अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में सरकार ने अपना कार्यकाल पूर्ण किया. इस प्रकार पूर्ण कार्यकाल करनेवाली पहली गैर कांग्रेसी सरकार बनी. 2004 के आम चुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा और अगले 10 वर्षों तक भाजपा ने संसद में मुख्य विपक्षी दल की भूमिका निभाई.

वर्तमान में भाजपा की देश के इन 8 राज्यों में सरकार है:

1) छत्तीसगढ़-रमन सिंह (पदस्थ)

2) गोवा-लक्ष्मीकांत पारसेकर (पदस्थ)

3) गुजरात-आनंदीबेन पटेल (पदस्थ)

4) हरियाणा-मनोहर लाल खट्टर (पदस्थ)

5) मध्य प्रदेश-शिवराज सिंह चौहान (पदस्थ)

6) राजस्थान-वसुंधरा राजे सिंधिया (पदस्थ)

7) महाराष्ट्र-देवेन्द्र फडणवीस (पदस्थ)

8) झारखंड- रघुबर दास (पदस्थ)

जम्मू-कश्मीर-अभी घोषित नहीं लेकिन सरकार में मुख्य भूमिका

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