महाराष्ट्र सरकार है खस्ता हाल… सैलरी देने के लिए पैसे नहीं हैं पास

Posted on December 28 2014 by pits

मुंबई: यह बात सुनने में थोड़ी अटपटी लग रही है लेकिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गत शुक्रवार को नाशिक में महाराष्ट्र विद्युत कार्मचारी महासंघ के स्वर्ण महोत्सव कार्यक्रम में कहा कि सरकार की तिजोरी खाली है और कर्मचारियों की सैलरी देने के लिए भी कर्ज लेने की नौबत आ गई है.

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री का कहना है कि राज्य की आय और खर्च के बीच इतना बड़ा अंतर हो गया कि सरकारी खजाने में पैसे नहीं है. ऐसे में राज्य के सरकारी कर्मचारियों को वेतन देने के लिए कर्ज लेना पड़ सकता है. 15 लाख सरकारी कर्मचारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में 15 लाख सरकारी कर्मचारी है. इनके अलावा 17 लाख पेंशनर भी हैं. मुख्यमंत्री के बयान के अनुसार अगर सरकारी खजाने की इतनी बुरी हालत है, तो आनेवाले दिनों में सरकार को अपने कर्मचारियों और पेंशनरों को हर मीने सैलरी देने के लिए एक नई आर्थिक चुनौती का सामना करना पड़ सकता है.

बता दें कि 2.70 लाख करोड़ का कर्ज 31 मार्च 2014 को पेश किए गए राज्य सरकार के बजट के मुताबिक महाराष्ट्र पर 2.70 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था. बजट पेश होने के बाद पिछले नौ महीनों में राज्य ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों का सामना किया है इसलिए यह तय है कि सरकार पर कर्ज का बोझ बढ़ा ही होगा, कम नहीं हुआ होगा.

आईए जानते हैं सरकार पर कब कितना रहा कर्ज: सरकारी आंकड़ों के अनुसार सरकार के कर्ज का ग्राफ 1995 में राज्य में शिवसेना-बीजेपी के नेतृत्ववाली शिवशाही सरकार के अस्तित्व में आने के बाद बड़ी तेजी से बढ़ा था. उसके बाद रही-सही कसर पिछले 15 साल में कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने पूरी कर दी. तब से अब तक राज्य की आर्थिक हालत ‘बीमारू’ राज्यों से भी बदतर हो गई है.

हालाँकि मुख्यमंत्री के इस बयाँ के बाद कई प्रश्न खड़े हो रहे हैं जिनका जवाब सरकार को जल्द से जल्द देना होगा. बता दें मुख्यमंत्री ने हाल ही में सूखा प्रभावित किसानों के लिए 7,000 करोड़ रुपये का जो राहत पैकेज घोषित किया है, उसके लिए पैसे कहां से आएगा. इसके आलावा सरकार फरवरी में अरब सागर में छत्रपति शिवाजी महाराज के जिस स्मारक का भूमि-पूजन करने वाली है, उसके लिए कहां से पैसा जुटाया जाएगा? इसके साथ और भी कई सवाल हैं जिसके जवान सरकार को देने होंगे.

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