अभिनय के जुनून ने मुझे दिवालिएपन से उबारा- अमिताभ बच्चन

Posted on December 21 2014 by pits

मुंबई(पिट्स फिल्म प्रतिनिधि): कहते हैं कामयाबी यूंही कदम नहीं चूमती, बल्कि एक कामयाब इंसान बनने के लिए खून-पसीना एक करना पड़ता है. इस रस्ते में कई मुश्किलें आती है लेकिन उनका जमकर सामना करना होता है. गौरतलब है कि बॉलीवुड के शहंशाह की कामयाबी से कौन परिचित नहीं है लेकिन बॉलीवुड के एंग्री यंग मैन से लेकर शहंशाह तक के अपने सफर में महानायक अमिताभ बच्चन ने भी कई उतार-चढ़ाव देखे हैं.

बता दें कि उन्होंने कहा कि दृढ़ संकल्प और ध्यान केंद्रित करने की शक्ति ने उन्हें दिवालियापन से उबरने में मदद की. बॉलीवुड के महानायक की कंपनी अमिताभ बच्चन प्राइवेट लिमिटेड(एबीसीएल) के साथ चीजें वैसी नहीं हुई जैसी उन्होंने सोची थी और इसने उन्हें वित्तीय संकट में डाल दिया था. इस संबंध में अमिताभ बच्चन ने कहा कि, ‘यह एक मुश्किल वक्त था. एबीसीएल कर्ज में डूब गई थी. मैं दिवालिया हो गया था. एक जमाने में जो लोग मेरे साथ काम करना चाहते थे, वे आते थे और मेरे साथ गालीगलौच करते थे.’

उल्लेखनीय है कि ‘अग्निपथ’, ‘डॉन’, ‘ब्लैक’, ‘पा’ और ‘चीनी कम’ जैसी फिल्मों के साथ अपने अभिनय का लोहा मनवाने वाले 72 वर्षीय अभिनेता ने कहा कि उनकी ध्यान केंद्रित करने की शक्ति और अभिनय के प्रति उनके जुनून ने उन्हें उस मुश्किल दौर से बाहर निकलने में मदद की. उनके अनुसार जब आप इस तरह की समस्याओं से घिरे होते हैं तो आपको रात में नींद नहीं आती. उन्होंने कहा कि, ‘एक रात, मैंने अपने आप से पूछा कि ‘कौन हूं मैं’ और फिर मैंने एहसास किया कि मैं यहां पर अभिनय करने के लिए आया था और मुझे वही करना चाहिए. अगली सुबह मैं दिवंगत फिल्म निर्माता यश चोपड़ा के पास गया और उन्हें अपनी समस्या बताते हुए मैंने कहा न तो मेरे पास पैसा है और न ही काम है. तब उन्होंने मुझे ‘मोहब्बतें’ में एक भूमिका दी और उस जगह से मैंने दोबारा शुरुआत की.’

बता दें कि 2000 में रिलीज हुई इस संगीतमय रोमांटिक फिल्म में अमिताभ ने एक सख्त पिता और प्राध्यापक का किरदार अदा किया था, जो प्यार में भरोसा नहीं रखता. इसी के साथ ही अपने पिता हरिवंशराय बच्चन के बारे में एक वाकया बताते हुए अमिताभ ने कहा कि, ‘मेरे पिताजी सरकारी नौकरी करते थे और रात में वह कवि सम्मेलनों में जाते थे, जिस कारण वह घर देर से आते थे. जब भी मैं उनके लिए दरवाजा खोलता, तो उनसे पूछता कि वह इतनी देर से घर क्यों आते हैं? और वह कहते, पैसा बड़ी मुश्किल से मिलता है. फिर मैं बॉलीवुड में आया, तो मैं भी दो तीन पाली में काम करने के बाद घर देर से पहुंचता था. तब मेरे पिता ने मुझसे वही प्रश्न पूछा और मेरे देर से घर आने की शिकायत की, तो मैंने भी वही जवाब दिया, पैसा बड़ी मुश्किल से मिलता है बाबूजी. यह सीख उनकी कई शिक्षाओं में से एक है जिसने जीवन में मेरी बहुत मदद की.’

 

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