भगवान का ‘अवतार’ बताकर संत ने भक्तों से किया ‘बलात्कार’

Posted on December 7 2014 by pits

सिडनी: आश्रम की आड़ में महिलाओं के यौन शोषण के घिनौने वारदात हमारे देश तक ही सीमित नहीं हैं। खुद को साधु-संन्यासी कहनेवालों ने विदेशों में भी आश्रम खोलकर घिनौने वारदातों को अंजाम दिया है।

ऑस्ट्रेलिया में हुए यौन दुराचार के ऐसे ही मामले में हुई जन सुनवाई में कहा गया कि ऑस्ट्रेलिया के सबसे पुराने आश्रम के भारतीय प्रमुख ने वहां तीन साल तक की बच्ची से बार-बार छेड़छाड़ की और शिकायत करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी। इतना ही नहीं अपने कुकर्मों को जायज ठहराने के लिए तथाकथित संत इसे ईश्वर के करीब आने का जरिया बताता था।

‘रॉयल कमीशन इन टू इंस्टीट्यूशनल रिसपॉंन्स टू चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज’ को बताया गया कि न्यू साउथ वेल्स के मैंग्रोव पर्वत पर स्थित सत्यनंद योग आश्रम के प्रमुख दिवंगत स्वामी अखंडानंद सरस्वती ने 1970 और 1980 के दशक के दौरान बच्चों का यौन शोषण किया था।

सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड में मंगलावार को छपी खबर के मुताबिक आश्रम और इसके प्रमुख अखंडानंद सरस्वती के खिलाफ आयोग की जांच में यह पाया गया कि आश्रम में रहने के दौरान 11 बच्चों से दुराचार किया गया।आश्रम में रहने वाली एक महिला ने बताया कि वह वहां एक दासी और मांस के एक पुतले की तरह खुद को महसूस करती थी। जब वह 16 साल की थी तब उसके साथ बलात्कार किया गया। दो हफ्तों की सुनवाई के दौरान 25 से अधिक गवाहों के साक्ष्य देने की उम्मीदें हैं।

गौरतलब है कि अखंडानंद सरस्वती को 1987 में तब आरोपी बनाया गया था जब एक पीड़िता पुलिस के पास गई थी। उन्हें 1989 में दोषी ठहराया गया और जेल की सजा सुनाई गई पर 1991 में एक कानून की तकनीकी पेंच पर यह फैसला पलट दिया गया। उनका 1997 में क्रेंस में निधन हो गया। रॉयल कमीशन के सामने पढ़े गए एक बयान के मुताबिक आश्रम के वकील आरोन केरनागन ने संगठन की ओर से माफी मांगी है।

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