दोस्ती बरकरार…. बीजेपी और शिवसेना के 10-10 विधायको ने ली मंत्री पद कि शपथ

Posted on December 7 2014 by pits

मुंबई: चंदन पवार- राज्य की देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार में शामिल मंत्रियों में नए और पुराने चेहरों में संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। बीजेपी ने पहले ही अपने 10 वरिष्ठ नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिला दी थी, इसलिए इस बार ज्यादातर नए चेहरों को मौका दिया गया है। इसी तरह शिवसेना ने कैबिनेट मंत्री पद के लिए पुराने चेहरों को वरियता दी है और राज्यमंत्री पद के लिए नए चेहरों को मौका दिया है। बीजेपी ने अपने मंत्रियों का चुनाव करते वक्त क्षेत्रीय और जातीय संतुलन बनाने की कोशिश भी की है।

महाराष्ट्र में 15 साल के वनवास के बाद आखिर शिवसेना-बीजेपी युति सरकार की वापसी हुई है। शिवसेना के सरकार में शामिल होने से बीजेपी की सरकार का अल्पमत भी बहुमत में बदल गया। देंवेंद्र फडणवीस सरकार अब बैसाखी पर नहीं रहेगी। विधानभवन परिसर में शुक्रवार को राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने बीजेपी और शिवसेना के 10-10 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई। इनमें एक भी महिला नहीं है। नए मंत्रियों के विभागों का बंटवारा शनिवार को किया जाएगा। बीजेपी के समर्थक दलों के किसी भी विधायक को फिलहाल मंत्रिमंडल में स्थान नहीं दिया है। इससे कयास लगाया जा रहा है कि मंत्रिमंडल का तीसरा विस्तार नागपुर अधिवेशन के बाद होगा।

इससे पहले, 31 अक्टूबर को फडणवीस सरकार में मुख्यमंत्री के अलावा नौ अन्य मंत्री बने थे। वे सभी बीजेपी के थे। मुख्यमंत्री को मिलाकर अब मंत्रिमंडल के सदस्यों की संख्या 30 हो गई, जबकि पिछली सरकार में 40 से अधिक मंत्री थे।

बीजेपी के 10 शपथ लेने वाले विधायकों में से 5 को कैबिनेट मंत्री और 5 को राज्यमंत्री बनाया गया है। ऐसा ही बंटवारा शिवसेना के मंत्रियों के लिए भी रहा। वैसे, बीजेपी-शिवसेना के बीच हुए समझौते के अनुसार दो और मंत्रियों को मंत्रिमंडल में शामिल करना है। समारोह का आयोजन काफी सादा रहा। बाहर शिवसेना के झंडे-बैनर पोस्टर लगे थे। समारोह में शिवसेना प्रमुख उद्घव ठाकरे और उनके परिवार के सदस्य व अन्य पार्टी नेता मौजूद थे। शिवसेना-बीजेपी के कई दिग्गज नेता आए, मगर कांग्रेस-एनसीपी समारोह में दूर रहे।

 

 

संक्षेप में जानते हैं नए मंत्रियों के बारे में:-

शिवसेना के कैबिनेट मंत्रीः

दिवाकर रावते: शिवसेना के वरिष्ठ और आक्रामक नेता है। फिलहाल विधान परिषद में हैं। शिवसेना-बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे हैं।

सुभाष देसाई: शिवसेना के वरिष्ठ नेता है। उद्धव ठाकरे के विश्वासपात्र हैं। गोरेगांव से चुनाव हारे हैं। फिलहाल किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। शिवसेना-बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे हैं।

रामदास कदम: शिवसेना के आक्रामक नेता है। शिवसेना-बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे हैं। 2009 का चुनाव हारने के बाद से विधान परिषद में हैं।

एकनाथ शिंदे: ठाणे की कोपरी पाचपाखाडी सीट से विधायक। लगातार तीसरी बार विधानसभा चुनाव जीते हैं। कट्टर शिवसैनिक और उद्धव ठाकरे के विश्वासपात्र हैं।

डॉ. दीपक सावंत: शिवसेना की उच्चशिक्षित चेहरा हैं। वर्तामान में विधान परिषद के सदस्य हैं।

बीजेपी के कैबिनेट मंत्री

गिरीश बापट: पुणे के कस्बापेठ सीट से विधायक हैं। पांचवीं बार चुनाव जीते हैं। ब्राह्मण समाज से हैं और पुणे में बीजेपी का सबसे सक्रिय चेहरा हैं। पहली बार मंत्री बने हैं।

गिरीश महाजन: जामनेर के विधायक हैं। पांचवीं बार चुनाव जीते हैं। खांदेश (उत्तर महाराष्ट्र) के गुजर समाज के हैं। पहली बार मंत्री बने हैं। आरएसएस से जुड़े हैं।

चंद्रशेखर बावनकुले: नागपुर ग्रामीण से बीजेपी के विधायक हैं। लगातार तीसरी बार चुनाव जीते हैं। तेली समाज के हैं और नितिन गडकरी के साख हैं।

बबनराव लोणीकर: परतूर के विधायक हैं। बीजेपी के वरिष्ठ नेता है। तीसरी बार चुनाव जीते हैं। मराठवाडा में को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व देने के लिए उन्हें मंत्री बनाया गया है।

राजकुमार बडोले: भंडारा (विदर्भ) के पुराने नेता हैं। अर्जुनी मोरगांव के विधायक हैं। नितीन गडकरी के समर्थक हैं।

शिवसेना के राज्यमंत्री

विजय शिवतारे: शिवसेना के विधायक हैं। पुरंदर सीट से चुने गए हैं। शरद पवार के कट्टर विरोधी हैं। शिवसेना का ग्रामीण चेहरा हैं। कृषि क्षेत्र के जानकार हैं।

संजय राठोड: विदर्भ के यवतमाल जिले की दिग्रस सीट से शिवसेना के विधायक हैं। बंजारा समाज के आक्रमक नेता हैं। लगातार तीसरी बार विधायक चुने गए हैं।

रविंद्र वायकर: जोगेश्वरी (मुंबई) से शिवसेना के विधायक हैं। दूसरी बार चुनाव जीते हैं। उद्धव ठाकरे के विश्वासपात्र हैं। चार बार मुंबई के नगरसेवक भी रहे हैं।

दीपक केसरकर: कोकण सावंतवाडी से दूसरी बार विधायक चुने गए हैं। पहली बार एनसीपी से इस बार शिवसेना से। नारायण राणे के कट्टर विरोधी हैं।

दादा भूसे: मालेगांव से तीसरी बार शिवसेना के टिकट पर चुनाव जीते हैं। उन्हें मंत्री बनाकर शिवसेना ने नाशिक को प्रतिनिधित्व दिया है।

बीजेपी के राज्यमंत्री

राम शंकर शिंदे: धनगर समाजा के नेता हैं। अहमदनगर जिले की कर्जत जामखेड सीट से विधायक हैं।

विजयकुमार देशमुख: बीजेपी के लिंगायत समाजा के विधायक हैं। सोलापुर शहर उत्तर विधानसभा सीट से विधायक हैं। लगातार तीसरी बार विधायक चुने गए हैं।

राजे अमरिश अत्राम: विदर्भ के नक्सल प्रभावित गडचिरोली जिले की आहेरी सीट से बीजेपी के विधायक हैं। आदिवासी समाजा के नेता हैं। लंदन से बिजनेस लॉ और ह्युमन रिसर्च की पढ़ाई की हैं।

रणजीत पाटील: विदर्भ के अमरावती ग्रेजुएट सीट से बीजेपी के विधायक हैं। पेशे से डॉक्टर हैं और प्रैक्टिस भी करते हैं।

प्रविण पोटे पाटील: बीजेपी के टिकट पर पहली बार विधायक चुने गए हैं। विदर्भ के अमरावती शहर के बड़े बिल्डर हैं। बीजेपी नेता नितिन गडकरी के करीबी हैं।

1995 में बनी थी युति सरकार

महाराष्ट्र में इससे पहले 1995-99 के बीच बीजेपी-शिवसेना की सरकार बनी थी। तब शिवसेना सीनियर पार्टनर के रूप में थी। मुख्यमंत्री पद उसके पास था और उपमुख्यमंत्री बीजेपी का था। इस बार इनकी भूमिकाएं बदल गई हैं। अब बीजेपी का मुख्यमंत्री है और शिवसेना को उप मुख्यमंत्री पद भी नहीं मिला।

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