आदर्श घोटाला में अशोक चव्हाण बरी नहीं नाम हटाने की मांग वाली याचिका खारिज

Posted on November 23 2014 by pits

मुंबई(पिट्स प्रतिनिधि): महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को झटका देते हुए बंबई हाई कोर्ट ने गत बुधवार को सीबीआई की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें आदर्श सोसाइटी घोटाला मामले में आरोपी के तौर पर उनका नाम हटाने की बात कही गई थी. गौरतलब है कि न्यायमूर्ति एम.एल.टहिलयानी ने हालांकि चार सप्ताह के लिए अपने आदेश के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी ताकि एजेंसी फैसले के खिलाफ अपील दायर कर सके.

जस्टिस ने नागपुर से टेलिकॉन्फ्रेंस के जरिए दिए गए अपने एक लाइन के आदेश में कहा कि, ‘मैं याचिका को खारिज करने को प्रवृत्त हूं.’ जस्टिस टहिलयानी नागपुर में बंबई हाई कोर्ट की एक पीठ की अध्यक्षता कर रहे हैं. इस मामले में आनेवाले समय में विस्तृत आदेश सुनाया जाएगा. सीबीआई ने हाई कोर्ट में याचिका देकर मामले में आरोपियों की सूची से चव्हाण का नाम हटाने का अनुरोध किया था. इससे पहले, तत्कालीन राज्यपाल के.शंकरनारायणन ने पिछले साल दिसंबर में पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देने से इंकार कर दिया था.

अदालत ने सामाजिक कार्यकर्ता केतन तिरोडकर के हस्तक्षेप आवेदन को भी खारिज कर दिया. उन्होंने आरोपी के तौर पर चव्हाण का नाम हटाने की सीबीआई की याचिका का विरोध किया था. अदालत ने जांच एजेंसी की दलील को स्वीकार किया कि मामले में उनका कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है. न्यायमूर्ति टहिलयानी ने हालांकि कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का अध्ययन करेंगे जिसके बारे में तिरोडकर ने जिक्र किया है. उस आदेश में शीर्ष अदालत ने कहा था कि इस तरह के मामलों में राज्यपाल की अनुमति की कोई आवश्यकता नहीं है. इससे पहले, मामले में मुकदमा चला रही विशेष सीबीआई अदालत ने मामले में चव्हाण का नाम हटाने की सीबीआई की अर्जी को खारिज कर दिया था. इसके बाद एजेंसी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. एक अंतरिम आदेश में हाई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने पर रोक लगा दी थी. चव्हाण उन 13 लोगों में थे जिनके खिलाफ जुलाई 2012 में आदर्श घोटाला मामले में आरोप पत्र दायर किया गया था.

कोर्ट के इस फैसले पर टिपण्णी करते हुए मुख्यमंत्री देवेन्द्र फदणवीस ने कहा कि इस मामले में पूर्व सरकार ने जो भी गलत फैसले किए, उन्हें सही किया जाएगा. न केवल आदर्श मामले में बल्कि एनी सभी मामलों में सही कदम उठाए जाएँगे. बता दें कि चव्हाण उन 13 कथित आरोपियों में से एक थे जिनके खिलाफ जुलाई 2012 में आदर्श घोटाला में चार्जशीट दायर की गई थी. एड.आभा सिंह के अनुसार अगर अशोक चव्हाण पर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत मुकदमा चलता है तो उन्हें 5 साल तक की सजा हो सकती है.

उल्लेखनीय है कि चव्हाण राज्य से कांग्रेस के दो वर्तमान कांग्रेसी सांसदों में से एक हैं. उनपर अपने रिश्तेदारों को फ्लैट आवंटित करने के बदले में आवासीय सोसाइटी को कुछ मंजूरी देने का आरोप है. आदर्श सोसायटी कारगिल युद्ध में हताहत जवानों की विधवाओं और सैनिकों के लिए थी लेकिन इसके 4०% फ़्लैट अन्यों को दे दिए गए. साल 2010 में घोटाला सामने आने के बाद चव्हाण को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था.

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