शादी में अधिक खर्च करने से पूर्व जरा विचार करें…..

Posted on November 16 2014 by pits

हमारे समाज में जब भी किसी लड़की की शादी होती है तो उसके माता-पिता की यही कोशिश होती है कि लड़के वालों के स्वागत में कहीं कोई कमी न रह जाए. उधर लड़के वालों की भी यही कामना रहती है कि उनकी बारात का पूरे ठाठ से स्वागत हो और साज-सज्जा से लेकर खान-पान तक का इतना अच्छा प्रबंध हो कि सब शादी को काफी समय तक याद रखें. कई बार तो लड़के वालों को यह भी कहते सुना जाता है कि हमें शादी में कुछ नहीं चाहिए बस आप बारात का स्वागत धूमधाम से कर दें ताकि हमारी इज्जत बची रहे

ऐसी स्थिति आने पर कुछ मामलों में मजबूरी में लड़की वालों को अपनी हैसियत से अधिक खर्च करना पड़ जाता है. शायद यही एक वजह हो सकती है कि लड़की के जन्म पर इतनी खुशी नहीं मनाई जाती और साथ में कन्या भ्रूण हत्या जैसी घटना को बढ़ावा मिलता है. शादी में होने वाले अनावश्यक खर्च और दिखावे के कारण अनेकों समस्याएं सामने आकर खड़ी होने लगती हैं और माता-पिता पर लड़की पैदा करने का बोझ बढ़ता जाता है. आये बताते हैं शादी में होनेवाले अनावश्यक खर्च से किन समस्याओं से जूझना पड़ता है लड़की के माता-पिता को:

1) अपनी हैसियत से अधिक खर्च करने के लिए कर्जा लेना पड़ेगा जिसका असर आपकी आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा. एक दिन की खातिर लिया गया कर्ज आगे के कई सालों तक भारी पड़ सकता है.

2) कई बार अपनी इज्जत की खातिर या लड़के वालों के अनाप-शनाप खर्चों की वजह से घर तक गिरवी रखने की नौबत आ जाती है.

3) कई बार अधिक हैसियत रखनेवाले लड़की वाले दिखावट पर इतना खुला खर्च करते हैं कि कम हैसियत वालों पर इसका मानसिक दबाव पडऩे लगता है.

4) एक-दूसरे की शादियां देखकर दूसरों को भी बढ़ावा मिलता है कि हम भी अपने बच्चों की ऐसे ही शादी करेंगे.

5) शादी पर लड़के वालों की इच्छानुसार पैसा न खर्च हो तो लड़की के ससुराल वाले शादी के बाद उस पर ताने कसने से बाज नहीं आते जिस कारण कुछ लड़कियां परिवार की इज्जत की खातिर चुपचाप सब सहती रहती हैं.

6) हैसियत से अधिक खर्च करने पर पड़ोसी और रिश्तेदार भी कई-कई तरह की बातें बनाने लगते हैं और बातों ही बातों में दिल दुखा जाने वाली बातें भी कर देते हैं.

यह सभी बातें एक कुरीति हैं और जब तक इन बातों का समाधान न निकला जाए तबतक लड़की माता-पिता के लिए बोझ के समान ही रहेगी औए समाज में कन्या भ्रूण हत्या और दहेज के लिए लड़कियों को जलाया जाता रहेगा. नजर डालते हैं समाधान पर:

1)      कुछ लोग शादी में बड़ी अच्छी मिसालें देते हैं जैसे कि लड़की पसंद आ जाने पर वे उसे चुन्नी चढ़ा कर घर ले आते हैं और फिर दोनों परिवार मिलकर अपने सगे-संबंधियों को दावत दे देते हैं और कई मामलों में तो खर्च भी आधा-आधा बांट लेते हैं. इससे दोनों पक्षों पर अनावश्यक बोझ भी नहीं पड़ता.

2)      शादी चाहे लड़की की हो या लड़के की, उनके घर वाले यानी पारिवारिक सदस्य भी एक दिन के फंक्शन के लिए महंगे कपड़े, मैचिंग ज्यूलरी और सैंडिल-शूज की शापिंग करने पर भी काफी खर्च कर देते हैं. फंक्शन के बाद वे चीजें डेली यूज में पहनी नहीं जा सकतीं. बस वे वार्डरोब का शृंगार बन कर रह जाती हैं. ऐसी गलती  न करके भी पैसा बचाया जा सकता है. दूल्हा या दुल्हन के लिए भी ऐसे कपड़े या ज्यूलरी लें जो वे रोजमर्रा पहन सकें न कि अटैची में पड़े-पड़े एक्सपायरी हो जाएं.

3)      अगर आपने अपनी बेटी के लिए पैसे जोड़े हैं तो बजाय उसकी फिजूलखर्च की फरमाइशें जैसे कि(शादी में डैकोरेशन ऐसी होनी चाहिए, खाने में मैन्यू की वैरायटी ज्यादा हो, दुल्हन का लहंगा और मेकअप कीमती होना….आदि) पूरी करने की बजाय वह पैसा लड़की के अकाऊंट में डाल दें या किसी तरह का फिक्स डिपाजिट कराकर शादी के बाद गिफ्ट करें.

4)      अगर लड़के वाले अच्छी शादी की बात करें तो लड़की वालों को सावधान हो जाना चाहिए कि अच्छी शादी की आड़ में जिस रिश्ते की नींव पैसे या गाड़ी के लालच की बुनियाद पर टिकी हो वह रिश्ता कभी भी खत्म हो सकता है. अत: बात पक्की होने पर लड़के वालों से पहले ही स्पष्ट कर दें कि आप अपनी हैसियत अनुसार ही शादी करेंगे.

5)      अगर हम सोचें कि हमारी समाज में इतनी इज्जत है अगर हम अधिक खर्च नहीं करेंगे तो हमारी नाक कट जाएगी. यह सोचें कि अधिकतर लोग तो आएंगे और खा-पीकर चले जाएंगे. अत: लोगों की परवाह न करें और अपने बजट का ध्यान रखें.

6)      रिश्तेदारों को मिठाई, कपड़े और शगुन की बजाय केवल मिठाई देकर भी तो विदा किया जा सकता है और खर्च रोका जा सकता है.

इन सब बातों की शुरूआत आपको अपने घर से ही करनी होगी ताकि आप एक शुभ रिश्ते की सच्ची शुरूआत में अपना सहयोग दे सकें.

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