सप्ताह की खास मुलाकात

Posted on October 13 2014 by pits

जुहू में स्थित ईज़ल आर्ट गैलरी में अब तक कई बेहतरीन और कामयाब प्रदर्शनियों का आयोजन किया जा चूका है और अब इसमें “सोहम”( अ क्रिएटिव ग्रुप ऑफ आर्टिस्ट) द्वारा पेंटिंग और स्कल्पचर्स की अनोखी प्रदर्शनी लगाई गई है. सोहम ग्रुप के डी.एस.मयूर, मुकेश बिजौले, अभिषेक उइके और महावीर वर्मा जैसे प्रसिद्ध कलाकार रंगों से कैनवास को ऐसे रंगते हैं कि कोई भी मंत्रमुग्ध हुए बिना नहीं रह सकता. इन कलाकारों से बात की हमारी संवाददाता रजिया निसार ने.

 

 

 

 

 

 

 

 

श्री. डी.एस.मयूर

आपकी रूची पेंटिंग और शिल्पकारी की तरफ कैसे हुई?

मैं बचपन से ही कला से जुड़ा हुआ हूं. मैं जब बचपन में मिट्टी से खेलता था तो मिट्टी में भी चित्रकारी किया करता था और जब मिट्टी हाथ में आती थी तो उससे शिल्प बनाया करता था. इसके साथ ही मैं एक कलाकार परिवार से रहा हूं तो यह कह सकता हूं कि कला मुझे विरासत में मिली हुई है और मैं अपने इस परंपरा को आगे बढ़ा रहा हूं.

ईजल आर्ट गैलरी में आपने जो प्रदर्शनी लगाई है उसमें लोगों को क्या अलग देखने के लिए मिलेगा?

यह प्रदर्शनी बहुत अनोखी है, इसमें लोगों को बहुत कुछ अलग देखने के लिए है क्योंकि हमारे ग्रुप के सभी कलाकार बहुत अद्भुत काम कर रहे हैं, सबकी कला एक दूसरे से बिल्कुल अलग और बेहतरीन है. हम सभी कला के प्रति समर्पण का भाव रखते हैं और यह सिर्फ लोगों और हमारे लिए ही नहीं इस गैलरी के लिए भी एक यादगार प्रदर्शनी होगी.

आप इस कला में महारत हासिल कर चुके है और कई अवार्ड से भी आपको सम्मानित किया गया है, इस बारे में थोड़ा बताईए?

देखिये जहां तक महारत का सवाल है तो मैं खुद को आज भी एक विद्यार्थी ही समझता हूं. हालांकि मैंने अभी तक 15-16 नेशनल अवार्ड जीते है लेकिन मैं निरंतर अपनी कला को संवारने में यकीन रखता हूं.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

श्री.मुकेश बिजौले

आपकी पेंटिंग में किन लोगों की छाप नज़र आती है?

मैं मध्यप्रदेश से हूं और वहां के आदीवासी जीवन को बहुत नजदीक से देखा है मैंने. लोक कला और लोक जीवन को बहुत नजदीक से देखा है. उनके आस-पास मौजूद रहनेवाले पशु-पक्षी उनके जीवन के अभिन्न अंग है और उनके साथ वह अपनी खुशियां मनाते हैं. मैं रंगों के द्वारा इनके जीवन को ही कैनवास पर उतारता हूं. साथ ही आधुनिक कला के माध्यम से अपनी बात को कहना चाहता हूं.

आप अपने जीवन में किसी अन्य कलाकार से प्रेरित हैं?

जी मैं इन्हीं आदिवासी लोगों के जीवन से प्रेरित हूं. मैं उनके जीवन को एक अलग नज़र से देखता हूं. यह लोग जो अंदरूनी भागों में रहते हैं, जिन्हें हम आदिवासी कहते हैं यह लोग वास्तव में नायक है और मैं इन्हीं लोगों से प्रेरणा लेकर अपनी पेंटिंग बनता हूं.

आपकी इन पेंटिंग्स को यह आदिवासी लोग देख पाते हैं?

जी हैं, जब कोई उत्सव होता है, मैं इनके बहुत करीब जाकर स्केच बनता हूं. यही मेरे हीरो-हिरोइन है और जब मैं इनके बीच बैठकर स्केच बनता हूं तब इन्हें बताता हूं कि मैंने आप लोगों को ही रंगों के जरिए दर्शाया है. मैं इन्हें बताता हूं कि आप मेरे नायक है और यह लोग अपनी पेंटिंग देखकर काफी खुश भी होते हैं.

 

 

 

 

 

 

 

 

श्री.अभिषेक उइके

इस प्रदर्शनी में आपकी पेंटिंग्स मौजूद हैं, कैसा अनुभव रहा है ये?

मैं बचपन से ही आर्ट के प्रति आकर्षित था. मेरा रूझान हमेशा इस ओर रहा है और आज मुंबई जैसे शहर में अपने साथियों के साथ इस प्रदर्शनी में भाग लेकर बहुत गौरान्वित महसूस कर रहा हूं. मेरे लिए यह एक बहुत ही अच्छा अनुभव रहा है.

आप अवार्ड से भी सम्मानित हुए हैं उस बारे में कुछ बताएं?

सही मायनों में कहूं तो जो सबसे बड़ा अवार्ड मुझे मिला है वह मुझे मेरे माता पिता का आशीर्वाद और साथ है. उन्होंने कला के प्रति मेरे प्रेम को समझा और मुझे प्रोत्साहित किया, मुझे नहीं लगता है कि इससे बड़ा कोई अवार्ड मुझे आज तक मिला होगा. हालांकि 2007 में कालिदास अवार्ड जो राष्ट्रीय स्तर का अवार्ड है उससे मुझे सम्मानित किया गया.

आपके इस प्रदर्शनी को लोगों का कितना समर्थन मिलता है?

मुझे ऐसा लगता है कि लोगों में काफी समझदारी आई है. लोगों में इस कला को, इसकी प्रतिभा को समझने की क्षमता है और उनका भरपूर समर्थन हमको मिल रहा है जिसकी हमें बहुत ख़ुशी है.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

श्री.महावीर वर्मा

अपने बारे में हमारे पाठकों को कुछ बताईए?

दरअसल में राजस्थान से हूं, बूंदी से और बता दूं कि बूंदी, चित्रकारी का एक बहुत महत्वपूर्ण अंग है इसलिए कह सकता हूं कि प्रेरणा मुझे अपने मातृभूमि से ही मिली है.

सोहम से कैसे जुड़े आप?

हम सभी कलाकार व्यक्तिगत रूप से एक दूसरे को काफी पहले से जानते हैं. एक दूसरे से जुड़े पहले से ही थे लेकिन सोहम ग्रुप ने पहली बार आकर लिया है. यह कह सकता हूं कि हम सभी कलाकारों में कोई न कोइ साम्यता है.

आपकी पेंटिंग में आप किन्हें दर्शाते है, आप किनसे प्रभावित है?

मैं रेलवे में सर्विस करता हूं और मेरी पेंटिंग में रेलवे की छाप मिलती है. मैं उस तबके को महत्व देना चाहता हूं जो रीढ़ की हड्डी हैं, जो धरातल पर काम करते है लेकिन नज़र नहीं आते. जैसे रेल में सफर करनेवाले वह लोग जो गाते हैं और लोगों का मनोरंजन करते हैं. मैं ऐसे लोगों पर ही ध्यान केन्द्रित करता हूं जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से रेलवे से जुड़े हैं. अपनी रोजी रोटी तो कमाते ही हैं साथ ही लोगों का मनोरंजन भी करते हैं.

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