मोदी की मांग ‘सम्पूर्ण बहुमत’ सट्टा बाजार भी भाजपा पर एकमत

Posted on October 13 2014 by pits

मुंबई (चंदन पवार): महाराष्ट्र राज्य में बहुत सालों बाद सभी राजनैतिक पार्टियाँ अलग अलग चुनाव लड़ रही है. जब वह साथ थे तब उन्हें अपनी साथी पार्टी में कोई खामियां नज़र नहीं आती थी परन्तु जब से भाजपा-शिवसेना और कांग्रेस-राष्ट्र्वादी का गठबंधन टूटा है तब से वह एक दूसरे को कम आंकने में ही समय गवा रहे हैं. सभी पार्टियों के वरिष्ठ नेता अपनी-अपनी पार्टी के गुण गाने में व्यस्त हैं. जहाँ प्रधानसेवक महाराष्ट्र भर में प्रचार कर भाजपा को सम्पूर्ण बहुमत देने का ऐलान कर रहे हैं वहीँ सट्टा बाजार के सट्टेबाजों ने भी भाजपा पर अपना दांव लगाया है.

सट्टा बाजार के दर

उम्मीदवार दर  उम्मीदवार (प्रतिस्पर्धी)दर
पृथ्वीराज चव्हाण(कांग्रेस)4.95 विलास काका उडाळकर(निर्दलीय)4.75
अजित पवार(राष्ट्रवादी)3.25 बाळा साहेब गुडाडे(भाजपा) 3.30
नारायण राणे(कांग्रेस)2.15 वैभव नाईक(शिवसेना 2.05
आर.आर.पाटिल(राष्ट्रवादी)2.10 अजित घोरपडे(भाजपा)2.05
देवेन्द्र फडवणीस(भाजपा)2.90 प्रफुल्ल मुडाके(कांग्रेस)2.15
एकनाथ खडसे(भाजपा)2.10 चंद्रकांत पाटिल(शिवसेना)1.40

 

अब तक सट्टा बाजार के लोगों ने 175 विधानसभा क्षेत्रों के उम्मीदवारों पर लगभग दो हजार करोड़ का सट्टा लगाया है. इन सट्टेबाज लोगों ने भाजपा को 120 से लेकर 130 तक सीटें मिलने का अंदाजा लगाया है. इस चुनावी जंग में जैसे जैसे मतदान का समय नजदीक आ रहा है वैसे वैसे सट्टा बाजार में भी तेजी देखी जा रही है. कौन विजयी होगा, कौन पराजित होगा, कौन मुख्यमंत्री होगा, कौन सी पार्टी को कितनी सीटें मिलेगी इस पर सट्टा बाजार में पैसा लग रहा है. शिवसेना-भाजपा का 25 साल का गठबंधन ऐसे अचानक से टूट जाएगा यह यकीन किसी को भी नहीं था इसलिए युती पर लगाये सट्टेबाजों के पैसे का नुकसान हो गया है इसलिए वह अब सोच समझकर पैसा लगा रहे हैं.
महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय बहुत सारे तर्क-वितर्क लगाए जा रहे है. कई सर्वे में भाजपा बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी और शिवसेना 2 नंबर की पार्टी बनेगी ऐसा दिखाया जा रहा है. बड़ी आश्चर्य की बात है कुछ सर्वे में राष्ट्रवादी से ज्यादा कांग्रेस को सीटें मिलते दिखाया जा रहा है. मतलब आज भी लोग कांग्रेस को मानते हैं. परन्तु आज कई विधानसभा क्षेत्रों में 5 से 6 अधिकृत उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं इसलिए सर्वे और राजनीतक पार्टियों का लगाया अनुमान गलत भी साबित हो सकता है? आज महाराष्ट्र की जनता के सामने कई प्रश्न हैं विकास सभी क्षेत्र में नहीं हुआ है कहीं अधिक हुआ है तो कहीं पर सिर्फ भ्रष्टाचार हुआ है. इन सभी उलझनों के बीच कई उम्मीदवार और कई वादों में जनता उम्मीद खो बैठी है परन्तु यह यकीन के साथ कहना मुश्किल है कि किसी भी पार्टी को बहुमत मिलेगा? सर्वे और लोगों से बातचीत से यह पता चला है कि राज्यों में त्रिशंकू परिस्थिती निर्माण हो सकती है ?

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