मोदी और नवाज़ एक साथ आएं- मलाला युसुफजई

Posted on October 13 2014 by pits

भारत के कैलाश सत्यार्थी के साथ संयुक्त रूप से शांति का नोबेल पुरस्कार जीतने वाली पाकिस्तान की मलाला यूसुफ़ज़ई ने इच्छा जताई है कि जब उन दोनों लोगों को पुरस्कार मिले तो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ उस कार्यक्रम में मौजूद हों. गौरतलब है कि इससे पहले गत शुक्रवार को नोबेल शांति पुरस्कार समिति ने सत्यार्थी और मलाला को 2014 का शांति का नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से देने का ऐलान किया.

मलाला युसुफजई ने पुरस्कार जीतने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि, ‘मैंने ख़ुद ये अनुरोध किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ दोनों ही नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाते समय वहां मौजूद हों. मैं वास्तव में शांति में यक़ीन करती हूं. मैं सहिष्णुता और धैर्य में यक़ीन करती हूं और दोनों ही देशों की प्रगति के लिए ये काफ़ी अहम है कि वहां शांति हो और दोनों के रिश्ते अच्छे हों. इसी तरह से वे प्रगति कर पाएंगे.’

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान के कबायली इलाकों में ल़डकियों की शिक्षा की मुहिम चलाने के लिए चरमपंथियों की गोली का निशाना बननेवाली मलाला कैलाश सत्यार्थी के काम से बेहद प्रेरित हुई हैं. मलाला ने पाकिस्तान के कबायली इलाकों में ल़डकियों की शिक्षा की मुहिम चलाई थी. हालांकि कैलाश सत्यार्थी के साथ भारत के 8 और लोगों को भी नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.

 

भारत के वह 9 लोग जिन्हें अलग अलग वर्गों में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया:

रविंद्रनाथ टैगोर: टैगोर भारत के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता थे जिन्हें साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए इस पुरस्कार से नवाज़ा गया था. टैगोर को 1913 में जब ये सम्मान मिला तब वो ये पुरस्कार पाने वाले पहले गैर यूरोपीय थे.

हरगोविंद खुराना: जाने माने भारतीय मूल के वैज्ञानिक हरगोविंद खुराना को 1968 में मेडिसीन के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार मिला था. खुराना का शोध इस विषय पर था कि एंटी बायोटिक खाने का शरीर पर किस तरह का व्यापक असर होता है. भारत के पंजाब में जन्मे खुराना ने आगे चलकर अमरीका के जाने माने एमआईटी इंस्टीट्यूट से पढ़ाई की थी और अमरीका में ही बस गए थे.

सी.वी. रमण: मद्रास में 1888 में जन्मे सी.वी रमण का योगदान फिजिक्स विषय में था और उन्होंने प्रकाश से जुड़े जिन प्रभावों की खोज की थी उन्हें रमन इफेक्ट के नाम से जाना जाता है. उन्हें 1930 में फिजिक्स के क्षेत्र में ये पुरस्कार दिया गया.

वी.ए.एस. नायपॉल: त्रिनिदाद एंड टोबैगो में जन्मे विद्याधर सूरजप्रसाद नायपॉल के पूर्वज गोरखपुर से गिरमिटिया मज़दूर के रुप में त्रिनिदाद पहुंचे थे. नायपॉल के उपन्यासों में भारत को काफी महत्व दिया गया लेकिन भारत को लेकर उनका नज़रिया काफी विवादित भी रहा. ब्रिटेन में बसे नायपॉल को 2001 में साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए नोबेल दिया गया.

वेंकट रामाकृष्णन: भारतीय मूल के वेंकट रामाकृष्णन मदुरै में जन्मे थे और इस समय कैंब्रिज़ में पठन पाठन करते हैं. उन्हें वर्ष 2009 में राइबोसोम के स्ट्रक्चर और कार्यप्रणाली के क्षेत्र में शोध के लिए केमिस्ट्री का नोबेल पुरस्कार दिया गया था.

मदर टेरेसा: अल्बानिया मूल की मदर टेरेसा ने कोलकाता में गरीबों और पीड़ित लोगों के लिए जो किया वो दुनिया में अभूतपूर्व माना जाता है. मदर टेरेसा अपनी मृत्यु तक कोलकाता में ही रही और आज भी उनकी संस्था गरीबों के लिए काम कर रही है.

सुब्रहमण्यम चंद्रशेखर: चंद्रशेखर का जन्म 1910 में लाहौर में हुआ था और उनकी पढ़ाई अमरीका में हुई. उनका विषय एस्ट्रोफिजिक्स था और उन्हें 1983 में सितारों की आकृति और कैसे सितारे बने इसके सैद्धांतिक शोध के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार मिला.

आर.के.पचौरी: राजेंद्र पचौरी का काम पर्यावरण के क्षेत्र में था और वो लंबे समय तक टेरी(टाटा एनर्जी रिसर्च इंस्टीट्यूट) से जुड़े रहे. उनके शोध पत्र जलवायु परिवर्तन पर थे और उन्हें वर्ष 2007 में संयुक्त राष्ट्र की जलवायु परिवर्तन के लिए बनी कमिटी के साथ संयुक्त रुप से शांति के लिए नोबेल मिला था.

अमर्त्य सेन: भारतीय मूल के अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन अपनी पुस्तक ‘द आरग्यूमेंटेटिव इंडियन’ के लिए काफी चर्चित रहे लेकिन अर्थशास्त्र में उनका काम उल्लेखनीय रहा है. उन्हें 1998 में अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार दिया गया था.

कैलाश सत्यार्थी: वर्ष 2014 का शांति का नोबेल पुरस्कार कैलाश सत्यार्थी को मिला है. कैलाश को बच्चों के लिए किए गए उनके काम को देखते हुए ये पुरस्कार दिया गया है.

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