प्रॉपर्टी गिरवी रखते वक़्त आपके पास हो यह जानकारी

Posted on October 13 2014 by pits

लोगों को अक्सर अपनी आवश्यकताओं की वजह से कर्ज भी लेना पड़ता है. बैंक कर्ज देते तो हैं परंतु उसके लिए कुछ शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं चूंकि बैंक भी अपनी रकम की वापसी की सुरक्षा या गारंटी चाहता है इसलिए रकम के बदले में आमतौर पर सम्पत्ति गिरवी रखवा ली जाती है. इस तरह का कर्ज अन्य कर्ज की तुलना में कहीं अधिक सस्ता पड़ता है. इसलिए इस संबंध में आपके पास पूरी जानकारी होनी चाहिए. जानिए इस बारे में:

कैसे रखें बैंक में सम्पत्ति गिरवी:
सम्पत्ति को बैंक में गिरवी यानी मॉर्टगेज करने का तात्पर्य अपनी सम्पत्ति को बैंक या हाऊसिंग फाइनांस कम्पनी के पास कर्ज की सुरक्षा के रूप में बंधक रखने से होता है.

कर्ज देनेवाले बैंक को अधिकार होता है कि यदि लोन लेनेवाला रकम वापस न करे तो वह पहले से तय शर्तों के तहत उसके पास गिरवी रखी गई सम्पत्ति को बेच कर अपना पैसा वसूल सकता है. इसके लिए दोनों पक्षों के बीच एक लीगल कांट्रैक्ट भी किया जाता है. कर्ज के दस्तावेज तैयार करते समय साथ में सम्पत्ति गिरवी रखने के दस्तावेज भी तैयार कर लिए जाते हैं. यदि एक से ज्यादा लोन देनेवाले हों तो उनके बीच बंटवारा किया जाता है. ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट के सेक्शन 58 के मुताबिक कोई प्रॉपर्टी गिरवी रखने का मतलब सुरक्षा की दृष्टि से उसके मालिकाना हक को ट्रांसफर करना है.

सिंपल मार्टगेज: जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है यह सम्पत्ति को गिरवी रखने का सबसे साधारण तरीका है. इस प्रक्रिया के तहत गिरवी रखी जा रही सम्पत्ति लोन देने वाले को ट्रांसफर नहीं की जाती.

इंगलिश मार्टगेज: इस प्रक्रिया के तहत गिरवी रखने वाला इस बात की सहमति प्रदान करता है कि वह पहले से तय तारीख पर लोन की रकम और ब्याज चुकाएगा. साथ ही वह सम्पत्ति को लोन देनेवाले को ट्रांसफर कर देता है.

एनोमैलस मार्टगेज: ऐसी सभी मार्टगेज जो सिंपल मार्टगेज की श्रेणी में नहीं आती, एनोमैलस मार्टगेज कहलाती है.

मार्टगेज बाई डीड: जब कोई व्यक्ति सुरक्षा कारणों से अपनी सम्पत्ति के कागजात लोन देनेवाले को दे देता है तो इस लेन-देन को मार्टगेज बाई डिपाजिट ऑफ टाइटिल डीड्स कहते हैं.

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