वीडयो एडिटिंग में बनाएं अच्छा करियर

Posted on September 22 2014 by pits

जो लोग रचनात्मक प्रवृति के हैं जिन्हें मनोरंजन एंड मीडिया उद्योग में काम करना पसंद है उनके लिए वीडियो एडिटिंग में करियर एक शानदार विकल्प साबित हो सकता है. गौरतलब है कि पोस्ट-प्रोडक्शन प्रोसेस में वीडियो एडिटिंग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. इन दिनों एडिटिंग की लेटेस्ट टेक्नोलोजी होने की वजह से नॉन लीनियर एडिटिंग की डिमांड लगातार बढ़ रही है क्योंकि किसी भी फिल्म या टीवी प्रोग्राम की कल्पना वीडियो एडिटर्स के बिना संभव नहीं है.

बता दें कि वेबसाईट में वीडियो स्ट्रीमिंग और मूवी क्लिपिंग के आ जाने से वीडियो एडिटिंग में करियर बहुत ही लाभप्रद हो गया है. यदि वीडियो एडिटिंग से संबंधित कोर्स कर लिया जाए तो मनोरंजन और मीडिया उद्योग में एक अच्छी नौकरी की संभावना बढ़ जाती है. व्यक्तिगत गुण इस फील्ड में काम करनेवालों में सृजनात्मकता बहुत ही जरूरी है. कंप्यूटर का अच्छा ज्ञान जरूरी है. नई-नई डिजिटल तकनीक से अवगत होना जरूरी है. विभिन्न तरह के विडियो एडिटिंग सॉफ्टवेयर से अवगत होना जरूरत है वैसे अगर किसी को वीडियो एडिटिंग सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर की जानकारी है तो वह भी वीडियो एडिटर का काम कर सकता है.

आजकल सबसे ज्यादा वीडियो एडिटर वेबसाइट पर दिखाए जानेवाले वीडियो क्लिप के लिए हायर किए जाते हैं इसके अलावा न्यूज चैनल, टेलीविजन सीरियल्स, फिल्म के साथ स्वयं का वीडियो एडिटिंग स्टूडियो, वेब डिजाइन कंपनी, एडवरटाइजिंग एजेंसी, मल्टी मीडिया कंपनी में भी नौकरी की तलाश की जा सकती है. पीएचडी करने के बाद आप मीडिया इंस्टीट्यूट में बतौर प्राध्यापक नौकरी कर सकते हैं. मीडिया और मनोरंजन उद्योग में क्रिएटिव लोगों के लिए वीडियो एडिटिंग एक अच्छा करियर ऑप्शन है. इसके अंतर्गत वीडियो में सृजनात्मकता डाली जाती है.  एक तथा एक से अधिक वीडियो टेप को सृजनात्मकता के साथ व्यवस्थित करना या यूं कहें वीडियो में रोचकता और तारतम्य लाना ही वीडियो एडिटिंग कहलाता है. रिकॉर्डिग के दौरान प्राप्त वीडियो को एडिटिंग के माध्यम से एक अच्छी प्रोडक्शन फिल्म तैयार की जाती है जो एडिटिंग का काम पूरा करते हैं, उन्हें वीडियो एडिटर कहा जाता है.

बता दें कि वीडियो एडिटिंग दो प्रकार से की जाती है लीनियर और नॉन-लीनियर एडिटिंग. लीनियर एडिटिंग को टेप टू टेप एडिटिंग भी कहा जाता है. इसमें फिल्म टेप को एक-एक करके कॉपी किया जाता है फिर उसे एडिट किया जाता है. यह तकनीकी फिल्म यानी रील के वीडियो में किया जाता है. नॉन-लीनियर एडिटिंग को डिजिटल वीडियो एडिटिंग भी कहा जाता है. इसमें एडिटिंग ऑन स्क्रीन कम्प्यूटर पर किया जाता है. आजकल दोनों एडिटिंग प्रक्रिया का प्रयोग किया जाता है.

शैक्षिक योग्यता वीडियो एडिटर बनने के लिए किसी खास पाठ्यक्रम की जरूरत नहीं होती है लेकिन कुछ शिक्षण संस्थानों में इस पाठ्यक्रम में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स भी चलाए जाते हैं. यह छह महीने से दो साल तक के हो सकते हैं. इसके अलावा जनसंचार और पत्रकारिता कोर्स के अंतर्गत भी वीडियो एडिटिंग का पाठ्यक्रम चलाया जाता है. इसके अंतर्गत एडिटिंग करने के तरीके और विभिन्न एडिटिंग सॉफ्टवेयर के बारे में बताया जाता है.

संस्थान:

1) फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे

2) सत्यजीत रे फिल्म एंड टीवी इंस्टीटय़ूट, कोलकाता

3) ए.जे. किदवई मास कम्युनिकेशन सेंटर, नई दिल्ली

4) वाईएमसीए, नई दिल्ली

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