राजनीति का बनता व्यापार

Posted on September 22 2014 by pits

चंदन पवार (मुंबई): महाराष्ट्र में जिस तरह कांग्रेस-राष्ट्रवादी और भाजपा-शिवसेना में सीट के बंटवारे को लेकर तनातनी हो रही थी और आंकड़ो का खेल चल रहा था उसे देख राजनीति एक समाजसेवा है यह भावना लुप्त हो चली है और उसका नया रूप व्यापार हो गया है. यह अब जनता भी मानने लगी है. कई महीनों से चल रहे इस सौदे में किसका मुख्यमंत्री होगा और कौन सत्ता की चाभी अपने हाथ में रखकर चाबुक चलाएगा इसकी रणनीति बन रही है.

चुनाव को एक तरह उत्सव माना जाता है. लोगों की यह भावना होती है कि हमारा कल्याणकारी मुखिया हमें मिलेगा हमारा भविष्य बदलेगा और हमारे बच्चे एक सदा गुण संपन्न प्रदेश में आगे बढ़ेंगे परन्तु महाराष्ट्र की राजनीति में इस वक़्त चल रहे सौदेबाजी को देखकर बड़े दुःखी हो रहे है. इनका यह मानना है कि हमें उम्मीद है कि हमारी भी बातें सूनी जाएगी. हमें पूछा जाएगा कि हमें कौन सा लोकप्रतिनिधि चाहिए. कौन मुख्यमंत्री बनना चाहिए. इन सभी के बारे में आज कोई भी पार्टी हमें पूछने की जरूरत महसूस नहीं कर रही है.

महाराष्ट्र की राजनीति में हर एक पार्टी अपनी सत्ता किस तरह स्थापित की जाएगी इसके लिए बेसब्र हैं. अन्य पार्टी के विधायक, सांसद और नगरसेवक को अपनी ओर खींचकर संख्या बढाई जा रही है. परन्तु वह यह भूल गए हैं कि वह जिस लोकप्रतिनिधि को अपने पक्ष में ले रहे हैं वह कितने भ्रष्ट है. उनपर कितने अपराध दर्ज है यह देखा भी नहीं जा रहा है मतलब यह पार्टियां लोगों को मुर्ख समझती हैं और अपनी मनमानी कर रही है.

आज महाराष्ट के सभी सरकारी विभागों में सामान्य लोगों का काम ठीक से नहीं हो रहा है. सभी विभागों में पैसे देने के बाद ही कामों को अंजाम दिया जा रहा है. बहुत सारे विभागों के वरिष्ठ अधिकारी दो नम्बर की कमाई के पीछे पड़कर अपनी जेबें भर रहे हैं और ऊपर तक इसका कमीशन पहुचाया जा रहा है. यह अधिकारी ऐसा करने की हिम्मत इसलिए रखते हैं क्योंकि इनके विभाग के मंत्री ही भ्रष्ट होते हैं जिन्हें इस माध्यम से पैसे चाहिए होते हैं अगर सभी पार्टिया यह ठान ले कि वह किसी भ्रष्ट मंत्री को अपने पार्टी में जगह नहीं देंगे और उसे चुनाव में खड़ा न करे तो महाराष्ट्र कि इस भूमि से भ्रष्टाचार हटाने में देरी नहीं लगेगी परन्तु ऐसा करने की हिम्मत आज तक किसी भी पार्टी में नहीं है. अगर वह सच्चाई के रस्ते पर चलेंगे तो उन्हें मालूम है कि वह अपनी आंठ्वी पीढ़ी के लिए पैसे नहीं जुटा पाएंगे. जिस चुनावी क्षेत्र में वह अपना भ्रष्ट उम्मीदवार देते हैं वह उम्मीदवार वहां से जीतकर भी आता है जिसके लिए सामान्य लोग भी जिम्मेदार है जो उन्हें वोट देते हैं.

अगर महाराष्ट्र के लोगों को भय तथा भ्रष्टाचार मुक्त और कानून रहित सरकार चाहिए तो उन्हें अच्छे व्यक्ति को वोट देना होगा. पैसे से अपना वोट खरीदनेवालों को अब बताना होगा कि हम बिकनेवालों में से नहीं है हमारा आत्मसम्मान आज भी हमारा साथी है. उनके दिए हजार दो हजार रूपयों से आपके घर का एक महीने का राशन आ सकता है तो क्या आप महीने के राशन के लिए उन्हें पांच साल अपनी मनमानी और भ्रष्टाचार करने देंगे? वक्त रहते ही संभल जाओ. आनेवाले चुनावों में यह लोग अपनी बातों से आपको गुमराह कर आपका कीमती वोट हासिल कर आपको फिर पांच साल इनके सामने हाथ जोड़ने के लिए मजबूर कर सकते हैं. वोट देना आपका अधिकार है आप इस अधिकार को बखूबी से इस्तेमाल करके अच्छे व्यक्ति को ही वोट दें जो हमारी आनेवाली पीढ़ी के उत्कर्ष के लिए सोचें. अगर आप गलती करते है तो फिर भूल जाइए अगले पांच साल अपना विकास, राजनीति का व्यापार होने से आप ही रोक सकते हैं इसलिए थान लो अपने आप में बदलाव की शुरुआत करने की…

Powered By Indic IME