मूर्तियां करती हैं बातें

Posted on September 8 2014 by pits

भारत  के मध्य प्रदेश राज्य में अवस्थित शहर खजुराहो से कौन परिचित नहीं है. गौरतलब है कि खजुराहो को खजूरपुरा और खजूर वाहिका के नाम से भी जाना जाता था. इस स्थान पर पहले खजूर के जंगल होने के कारण इसका नाम खजुराहो पड़ा लेकिन आज खजुराहो खजूर के जंगल की वजह से नहीं बल्कि अपनी कामुक मूर्तियों की वजह से प्रसिद्ध है. इसके साथ ही यह शहर अपने पूर्वकालीन मंदिरों के लिए बहुत प्रसिद्ध है. दुनिया भर से लोग यहां इन मंदिरों के दर्शन करने आते है.

बता दें कि इस शहर में ज्यादातर हिंदू और जैन मंदिर हैं. इनमें से अधिकतर मंदिरों  की स्थापना चंदेल राजाओं ने करवाई थी. ज्यादा मंदिरों की संख्या होने के कारण यहां पर्यटक इनके दर्शन करने आते है. यहां पर शिल्पकारों ने हिंदू कला और संस्कृति के नमूने को बहुत खूबसूरती से पेश किया है. इन मंदिरों में संगम की विभिन्न कलाओं को देखकर पर्यटक हैरान हो जाते है. वहीँ इन मूर्तियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे यें हमसे बातें कर रही हो. सबसे ज्यादा पर्यटन स्थल यहीं पर स्थापित होने के कारण यहां पर्यटक हजारों की संख्या में आते है. अपने पर्यटन स्थलों के प्रयोजन से ही इसका नाम दूसरे स्थान पर है. यहां पर कई तालाबों, कई विशाल मंदिरों का निर्माण करवाया गया जो वास्तुकला का अदभुत नमूना पेश करते है.

बता दें कि यहां के पत्थरों पर बनी मूर्तियां यहां के इतिहास का वर्णन करती है. इन मंदिरों के निर्माण के पीछे भी एक कथा जुड़ी है. उल्लेखनीय है कि काशी के एक पंडित की पुत्री हेमवती जो बहुत सुंदर थी. हेमवती एक विधवा औरत थी. एक दिन वे स्नान कर रही थी तभी चन्द्रदेव उस पर मोहित हो गए. चन्द्रदेव और हेमलती का एक पुत्र पैदा हुआ जिसका नाम चंद्रवर्मन रखा था. चन्द्रदेव की आज्ञा से वे अपने पुत्र को खजूरपुरा ले गई. चन्द्रवर्मन अपने पिता के समान कलहप्रिय, निडर था. चन्द्रदेव ने हेमवती की उपासना से खुश होकर अपने पुत्र को पारस पत्थर दिया और खजुराहो का राजा बनाया. चन्द्रवर्मन ने खजुराहो में 85 अद्वितीय मंदिरों का निर्माण करवाया था. यहां पर कई मंदिर है जिसकी कला सब पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है. यहां के कुछ मंदिर है बहुत प्रसिद्ध है. आइए आपको उन मंदिरों के बारे में बताते हैं जिन्हें देखने के लिए लोग बहुत दूर दूर से आते हैं.

विश्वनाथ मंदिर: लगभग 1000 वर्ष पुराने इस मंदिर की स्थापना राजा धंगदेव वर्मन ने करवाई थी. इस मंदिर में ब्रह्मा जी की तीन सिर वाली मूर्ति सब लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है और एक नदी का मूलरूप ऐसे प्रतीत होता है कि उसका मुख भगवान की ओर उपस्थित है.

लक्ष्मण मंदिर: इस मंदिर में भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी जी की मूर्ति बहुत सुंदर ढ़ग से बनाई गई है. यहां पर ब्रह्मा, विष्णु और महेश की त्रिमूर्ति भी है. इस मंदिर का निर्माण बलुआ पत्थरों से करवाया गया था. मंदिर थोड़ा ऊंचाई पर होने के कारण इसकी सारी दिशाओं को बड़ी आसानी से देखा जा सकता है. मंदिर के बाहर बनी मूर्तियों पर देवी देवताओं की मूर्तियां बहुत सुंदर प्रतीत होती है. मंदिर की बाहरी दीवारों पर कई तरह की कृतियां इस मंदिर की शोभा में चार चांद लगाती है. युद्ध, शिकार, हाथी, घोड़ों, सैनिकों की कई  कृतियों के दृष्टि दिखाई गई है.

पार्श्वनाथ मंदिर: इस जैन मंदिर को विशाल मंदिरों में से एक माना गया है. इसकी दीवारों पर इतनी खूबसूरत कलाकारी की गई है कि सारे पर्यटक इसकी कलाकृति को देखकर दंग रह जाते है. पार्श्वनाथ मंदिर में भगवान पार्श्वनाथ जी की  मूति॔ स्थापित की गई थी. सबसे ज्यादा पर्यटन स्थलों का निर्माण यहीं पर होने के कारण यहां पर्यटक हजारों की संख्या में आते है और इन मंदिरों के दर्शन करके और मंदिरों की कलाकृति को देखकर खुश हो जाते है.

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