मानसून में फंगस से पैरों की करें देखभाल

Posted on August 25 2014 by pits

बारिश में भीगने के बाद पैरों की ओर बहुत ही कम लोगों का ध्यान जाता है जबकि पानी में रहने से सबसे ज्यादा नुक्सान पैरों को ही होता है. मानसून में पैरों की देखभाल उतनी ही जरूरी है जितनी शरीर के अन्य हिस्सों की. ज्यादा देर तक पैर गीले रहने और समय पर सफाई न करने से उनमें फंगस लग जाता है जिसके कारण इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है. यदि पैरों की ठीक से देखभाल नहीं की गई तो वह बदसूरत हो सकते हैं. पैरों की खूबसूरती बनाए रखने के लिए ध्यान रखें इन बातों पर.

1)      नियमित रूप से पेडीक्योर करवाएं. पेडीक्योर करवाने से पैर मुलायम और माइश्चराइज्ड रहते हैं. पैरों की उंगलियों की सफाई भी हो जाती है.

2)      समय-समय पर पैरों के नाखूनों को कर्व शेप में काटें ताकि सारी गंदगी आसानी से बाहर निकल जाए. नाखून काटने के बाद उनको डिटॉल से साफ करें. इससे इंफेक्शन की आशंका कम होगी.

3)      पैरों को फंगस से बचाने के लिए  सिरके का इस्तेमाल करें. इससे पैरों में जमी गंदगी अच्छे से साफ हो जाती है और इंफेक्शन होने का खतरा भी कम हो जाता है. एक टब में सिरका और पानी बराबर मात्रा में मिला लें, फिर लगभग 30 मिनट तक पैरों को उसमें डुबोकर रखें. इसके बाद पैरों को साफ तौलिए से पोंछ कर क्रीम लगा लें.

4)      फंगस से छुटकारा पाने के लिए बेकिंग सोडा का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. यह पी.एच. बैलेंस करने में मदद करता है. इसको पेस्ट बना कर लगाया जा सकता है या फिर जूतों में भी छिड़का जा सकता है.

5)      पैरों को किसी भी तरह के इंफेक्शन से बचाने के लिए नमक के पानी का इस्तेमाल करें. यह सबसे अच्छा एंटीसेप्टिक है. एक टब पानी में 2 बड़े चम्मच नमक डालकर उसमें लगभग 15 मिनट तक पैरों को डुबो कर रखें. ऐसा रोज करने से इंफेक्शन नहीं होगा.

6)      इंफेक्शन से राहत पाने के लिए पानी में थोड़ी-सी हल्दी मिलाकर पेस्ट बना लें और इसे संक्रमित क्षेत्र में लगाएं. इसे दिन में 3-4 बार लगाने से जल्द राहत मिलेगी.

7)      नीम का तेल एंटी-फंगल होने की वजह से फंगस को बढऩे से रोकता है.  इससे नाखूनों और उसके आसपास की जगह पर मालिश कर सकते हैं.

8)      नारियल का तेल त्वचा को किसी भी प्रकार की बीमारी से बचाता है. इस तेल को फंगस की जगह पर लगाने से उससे होने वाले दर्द से आराम मिलता है. साथ ही फंगस को बढऩे से भी रोकता है.

 

 

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