दोस्ती होती है गुलाब की खुशबू जैसी

Posted on August 18 2014 by pits

कहते हैं इस दुनिया में अगर कोई रिश्ता सबसे खुबसूरत है तो वह है दोस्ती का. जीवन की बगिया में गुलाब की खुशबू जैसी होती है दोस्ती. जब भी कोई मुश्किल आती है, यह दोस्त ही होते हैं जो हमें उस से उबारने में मदद करते हैं. हम जब दुखी होते हैं यह हमें हंसा जाते हैं. दोस्ती का रिश्ता सबसे अनमोल होता है.

बेमिसाल है दोस्ती: जो रिश्ता ही अनमोल हो, उसकी मिसाल कहां होगी क्योंकि हर एक दोस्त खास होता है. शक्कर की मिठास मानजाने दोस्ती के रिश्ते को हर रिश्ते से बढ़ कर और संवेदनशील रिश्ता माना जाता है. आज भी दोस्त के रूठने को रब के रूठने के समान माना जाता है. दोस्त को उसकी खूबियों ही नहीं, कमियों के साथ भी स्वीकार किया जाता है.

खूबसूरत यादें बचपन कीं: सबसे खूबसूरत होती है बचपन की दोस्ती, जिसकी यादें हमेशा जेहन में ताजा रहती हैं तथा कानों में मिश्री का रस घोलती हैं. उस समय दोस्तों के संग की गई शरारतें पुरी ज़िंदगी भर हमारे साथ होती है. कभी दोस्तों के साथ मिल कर किसी टीचर की पीठ पीछे ठिठोली करना, तो कभी स्कूल से बंक मार कर बगीचे से अमरूद तोडऩे जाना, कभी इमली या आम की चटनी को चटखारे लेकर खाना, यहां तक कि अपनी हर बात उन से शेयर करना, यह सब हमारे साथ हमेशा रहती है.

दुनिया कितनी ही बदल जाए, लोग कितने ही व्यस्त हो जाएं, परंतु बचपन के दिन जब याद आते हैं, तो अपने उस खास दोस्त या सहेली के साथ बिताए पलों को हम कभी भूल नहीं पाते.

नि:स्वार्थ दोस्ती: कहते हैं इस पूरी में अगर कोई रिश्ता नि:स्वार्थ होता है तो वः है दोस्ती का. हम किस तरह बिना किसी चाहत के दोस्त बना लेते हैं और फिर उसे सच्चे मन से निभाते हैं. हम कितने भी रिश्ते बना लें लेकिन दोस्ती जैसा रिश्ता बन नहीं सकता.

उल्लेखनीय है की बचपन में हर काम एक्सपेरीमेंट के तौर पर किया जाता है, जैसे अपने दोस्त के साथ पापा का स्कूटर बिन सीखे ही ले कर निकल जाना और अनाड़ीपन में बैलेंस बिगडऩे पर दोनों का गिर जाना, चोट खा कर घर से डांट अलग से खाना. यही नहीं कभी मम्मी को सरप्राइज देने के चक्कर में सहेली के साथ खाना बनाने की कोशिश करना और उसी चक्कर में कभी खाना तो कभी खुद का हाथ जला लेना. यह सब यादें हमेशा हमारे साथ बनी रहती हैं. जब भी हम उदास होते हैं तो यही यादें हमें हँसा जाती हैं.

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