मानसून में बीमारियों से बचने के घरेलु नुस्खे

Posted on July 28 2014 by yogesh

जब तक बारिश होती है तब तक तो मौसम बड़ा खुशगवार रहता है लेकिन समस्या बारिश के बाद शुरू होती है. ताजगी भरी फुहारों के साथ मॉनसून की चिपचिपाहट और नमी से परेशानी भी बहुत होती है. ऐसे मौसम में खासतौर से महिलाओं को संक्रमण से जुड़ी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इस मौसम में नमी की वजह से बैक्टीरिया और फंफूदी के प्रजनन का बेहतरीन समय होता है इसलिए व्यक्तिगत स्वच्छता बहुत महत्वपूर्ण है. आईए जानें कुछ ऐसी ही बातें:

बालों का ध्यान: इस मौसम में बालों का खास ध्यान रखें. औसतन महिलाओं के बाल कंधे तक तो होते ही हैं इसलिए बालों की खास देखभाल बहुत महत्वपूर्ण है. सैलून विशेषज्ञ तो इस मौसम में बालों को छोटा रखने की सलाह देते हैं. इससे न सिर्फ आपका लुक बेहतर बनता है बल्कि आपको उमस और चिपचिपाहट में सकून भी मिलता है लेकिन ट्रायकोलोजिस्ट इस बात पर जोर देते हैं कि बाल चाहे छोटे हों या बड़े, हफ्ते में कम से कम तीन बार बालों को सही तरीके से धोएं और कंडीशनर का इस्तेमाल करें. इससे आपके बालों की त्वचा पर बैक्टीरिया और फंफूदी बनने का रिस्क बहुत कम हो जाता है. इसके अलावा अगर संतुलित मात्रा में तेलयुक्त व एंटी डैंड्रफ शैंपू का इस्तेमाल करेंगे तो इससे रूसी होने का जोखिम भी कम हो जाएगा.

अगर बारिश में भीग गई हैं तो घर आकर फौरन शैंपू से बाल धोएं. नमी के इस मौसम में गीले बालों को कभी न बांधें. अगर आपको बालों की त्वचा पर खुजलाहट या फिर परेशानी महसूस हो तो फौरन डाक्टर से परामर्श लें. इस मौसम में डैंड्रफ इत्यादि से भी बच कर रहें. इस मौसम में बालों को सीधे या घुंघराले करने वाले उपकरणों का इस्तेमाल न करें क्योंकि नमी के कारण बाल वैसे ही रुखे होते हैं और इन उपकरणों के इस्तेमाल से बालों में और ज्यादा रुखापन आ जाता है जो बालों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है.

त्वचा की देखभाल: मॉनसून शुरू होते ही त्वचा में रुखापन आना शुरू हो जाता है. बदलते मौसम के कारण त्वचा में संक्रमित होने की संभावना बढ़ जाती है क्योंकि हवा की नमी से त्वचा में फंगस या बैक्टीरिया पैदा होने लगते हैं. इससे फुंसियां, फोड़े या खुजली शुरू हो जाती है और अगर आप इस तरह की किसी भी समस्या से जूझ रही हैं तो बस पीएच संतुलित फार्मूले से युक्त फेस वॉश से मुंह धोएं और मुहांसे व फुंसियों से छुटकारा पाएं. शरीर की त्वचा के लिए भी पीएच संतुलित बॉडी वॉश का प्रयोग करें और ज्यादा देर तक गीले कपड़ों में न रहें इससे बैक्टीरिया या फफूंदी पनपने का सबसे ज्यादा रिस्क रहता है. इस मौसम में ज्यादा से ज्यादा कोशिश करें कि शरीर  सूखा रहे.

आंतरिक अंगों का रखें खास ध्यान: बालों व त्वचा के अलावा नमी के इस मौसम में आंतरिक अंगों की देखभाल भी बहुत महत्वपूर्ण है. खासतौर से महिलाओं को मॉनसून में काफी परेशानी व तकलीफ होती है लेकिन समस्या के बारे में सक्रिय तरीके से चर्चा करने की बजाय आमतौर पर समस्या संक्रमण तक जा पहुंचने पर ही डाक्टर से परामर्श लेती हैं. दरअसल इस मौसम में जींस, पैंट या पाजामी इत्यादि कपड़े पहनने से हवा का बहाव रुक जाता है. इससे काफी ज्यादा पसीना आ जाता है और गुप्तांगों पर सूजन व खुजली शुरू हो जाती है.

कुछ डाक्टर तो मिनी स्कर्ट या शाट्रस पहनने को भी मना करते हैं क्योंकि इन्हें पहनकर महिलाएं बहुत ही असहज तरीके से बैठती हैं जिससे संक्रमण की संभावना हो जाती है. इसके अलावा मॉनसून में माहवारी व यौन इंटरकोर्स के दौरान होने वाली समस्याओं से महिलाओं को दो-चार होना पड़ता है. ऐसे में कैसे व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखा जाए? जितनी बार हो सके उन अंगों को साफ करें. योनि की प्रकृति पीएच अम्लीय यानी एसिडिक है तो ऐसे में योनि के लैक्टोबैक्ली की रेंज 3.5 से 4.5 तक बनाए रखनी होती है. पानी और साबुन क्षारीय होते हैं अत: इनके इस्तेमाल से योनि का संतुलित पीएच नष्ट हो जाता है जिससे बैक्टीरिया व फंफूदी बनने के चांस बढ़ जाते हैं इसलिए गुप्तांगों को लैक्टिक एसिड से साफ करना चाहिए ताकि पीएच संतुलित रहे और मॉनसून में नमी के कारण होने वाले पसीने से संक्रमण इत्यादि न फैल सके.

पैरों का ध्यान: पैरों की मालिश कराना बहुत ही सुखद अहसास होता है और अमेरिकन पोडियाट्रिक एसोसिएशन ने परामर्श दिया है कि सहज जूते चप्पल व सूती, जुराबें तुरंत उतार दें और कोशिश करें कि ऊपर से खुले जूते व चप्पल पहनें जिससे हवा की गतिशीलता बनी रहे. बारिश के दिनों में पैरों में बारिश का पानी लग ही जाता है तो ऐसे में घर आते ही साबुन व साफ पानी से धोएं और सूखे तौलिए से पैरों को सुखाएं.

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर त्वचा या पैरों व हाथों पर फंगस इत्यादि हो जाए तो घर पर उपचार मत करें. डाक्टर के परामर्श के बिना दवाइयां न लें.

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