क्या है जस्टिस काटजु की मनशा

Posted on July 28 2014 by yogesh

मुंबई (चंदन पवार): प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और पूर्व सुप्रीम कोर्ट के जज मार्केंडेय काटजू ने यूपीए सरकार के दौर में भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे एक जज के अपार्टमेंट संबंधी मीडिया में खुलासे ने हंगामा मचा दिया है. दरअसल यह मामला मद्रास हाईकोर्ट के एक जज की नियुक्ति से जुड़ा है.

काटजू के आरोप:

1)      तमिलनाडु के एक डिस्ट्रिक्ट  जजके खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप होने के बावजूद उसे प्रमोट किया गया.

2)      यूपीए सरकार की एक सहयोगी पार्टी के दबाव में प्रमोशन

3)      जज के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर खुफिया ब्यूरो(आईबी) ने दी थी ‘प्रतिकूल रिपोर्ट’

4)      तीन पूर्व चीफ जस्टिस आरसी लाहोटी, वाई.के सभरवाल और केजी बालकृष्णन ने किए अनुचित समझौते पर दस्तखत

अब इनके आरोपों में सच्चाई कितनी है यह तो अदालत देख लेगी परंतु सवाल यह है कि जस्टिस काटजू ने यह सभी आरोप इतने सालों बाद क्यों लगाए? जब कि वह 9 साल सुप्रीम कोर्ट के जज रह चुके हैं और अब वह प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेअरमैन के पद से भी रिटायर होनेवाले हैं तो यह सभी आरोप अभी क्यों? क्या काटजू आम जनता को गुमराह कर रहे हैं या अनुचित सीख दे रहे हैं क्योंकि अगर उनको यह बात तबसे मालूम थी जब गलत हो रहा था तब वह उस समय क्यों नहीं बोले और अब उनकी इस समय बोलने की क्या वजह है.

हमारे प्रतिनिधि ने जब मुंबई के हाईकोर्ट वकीलों को इस विषय में पूछा तो उनका कहना था कि काटजू इस समय जो भी आरोप लगा रहे हैं उनको उसी समय बताना था. अगर उनको सच्चाई की कदर थी तो वह उसी समय बोलते परंतु शायद हमें लगता है कि उनको सर्वोच्च न्यायालय का जज बनना था इसलिए वह उस समय बोल नहीं पाए होंगे? अब इनको किसी बात का डर नहीं है इसिलिये बोल रहे हैं.

अगर सर्वोच्च न्यायालय का जज ही इतने सालों बाद ऐसी घटनाओं को उजागर करता है. सामान्य व्यक्ति इनकी कथनी से क्या सीख लेगा? यह भी बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है. अगर इतने दिनों के बाद यह आरोप लगा रहे हैं तो वह शायद भाजपा में कोई पद पाने के लिए  जगह बना रहे हैं, ऐसा प्रतीत हो रहा है? इसलिए लोगों के मन में कई प्रश्न उठ रहे हैं जिनके जवाब आनेवाले दिनों में उनको देने पड़ेंगे और उस समय उनको अगर यह बात मालूम थी तो वह उस समय क्यों नहीं बोले, इसकी सच्चाई भी उनको बतानी पड़ेगी.

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