बच्चों में हो सकती हैं ये त्वचा संबंधी समस्याएं

Posted on June 23 2014 by yogesh

नन्हेबच्चों की त्वचा इतनी नाजुक होती है कि हल्की-सी खरोंच या रैश उन्हेंबहुतही परेशानी वाली स्थिति में डाल देती है. याद रखें कि नवजन्मे बच्चोंमेंरैशेज का खतरा अधिक रहता है. ऐसे रैशेज में से अधिकतर नुक्सानदायक नहीं होते और कुछेक दिनों के अंतराल पर चले जाते हैं, फिर भी नन्हे बच्चोंकी त्वचा संबंधी कुछ समस्याएं हैं जिन पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है. आईए जानते हैं इन समस्याओं के बारे में-

डाइपर रैश: इस अपरिहार्य समस्या के कारण आपके बच्चे को तथा आपको रात भर जागना पड़सकताहै. बच्चे के डाइपर वाले हिस्से की अक्सर जांच करती रहें यदि आपको वहां परलाली महसूस हो तो तुरन्त डाइपर रैश क्रीम लगाएं और उस हिस्से को जितना संभवहो सके खुला और सूखा रखें. इस बात को यकीनी बनाएं कि डाइपर नतो बहुत ढीलाहो और न ही इसे बच्चे को लम्बे समय तक पहनाया जाए. जब जरूरत समझें तब इसेबदल दें. जब भी आपको लगे, डाइपर रैश क्रीम का इस्तेमाल करें.

मुहांसे: आपकेबच्चे के चेहरे पर दिखने वाले छोटे-छोटे मुहांसे एक बहुत ही आमसमस्या है और ये कुछ ही दिनों में चले जाते हैं. इन पर कुछ भी लगाने सेपूरी तरहपरहेज करें.

बर्थ मार्क्स: बर्थ मार्क्स बच्चों में बहुत ही आम होते हैं. जब बच्चा पैदा होता है तब और जन्म के कुछ हफ्तों या महीनों तक ये निशान रह सकते हैं.

एग्जीमा: जिनबच्चों के परिवार में अस्थमा या एलर्जी की हिस्ट्री होती है, उनमें खुजली पैदा करनेवाली एग्जीमा की समस्या अधिक पाई जाती है. यह आम तौर परचेहरे परउभरती है परन्तु अक्सर इसे कोहनियों, छाती या बांहों पर भी पैदाहोते देखाजाता है. धीरे-धीरे यह सूखी और खुरदरी हो जाती है. इस किस्म केरैश आम तौरपर साबुनों, लोशनों या बच्चे के कपड़े धोने के लिए आपके द्वारा इस्तेमाल किए जानेवाले डिटर्जैंट के एलर्जिक रिएक्शन के तौर पर भी बढ़तेहैं.

सूखी त्वचा: अधिकतर नवजन्मे बच्चे रूखी त्वचा के साथ पैदा होते हैं. उनके जन्म के कुछदिनोंबाद यह त्वचा खुद ही उतरने लगती है. यह आम तौर पर जल्दी ही रुक जाती है परन्तु इसके कारण यदि आपको चिंता हो तो किसी जच्चा-बच्चा विशेषज्ञ से अवश्य सलाह लें.

घमौरियों वाले रैश: ये हल्के गुलाबी-लाल रंग वाले धब्बे पसीने के कारण पैदा होते हैं और गर्दन, डाइपर वाले हिस्से तथा बगलोंमें दिखाई देते हैं. जितना संभव होसके अपने बच्चे को कूल और सूखा रखें. उसे ढीले-ढाले सूती कपड़े पहनाएं. बच्चे की त्वचा पर पाऊडर के अधिक उपयोगसे बचें. बेबी पाऊडर के छोटे-छोटे दाने सांस के द्वारा बच्चे के अंदर जासकते हैं, जिससे उन्हें असुखद महसूसहो सकता है. जब तक आपका बच्चा 4 से 6 महीने तक का न हो जाए तब तक उसके शरीर पर पाऊडर का इस्तेमाल करने से बचें.

Powered By Indic IME