स्मार्ट कंज्यूमर बनकर अपने पैसों की पूरी कीमत वसूलें

Posted on May 31 2014 by yogesh

अक्सर महिलाएं बिना सोचे-समझे खरीददारी कर लेती हैं और जब वे खरीददारी कर घर लौटती हैंतो उन्हें पता चलता है कि खरीदा हुआ सामान उनके पास पहले से हीथा. ऐसी हालत में जरूरी है कि समझदारी से शॉपिंग की जाए तथा जरूरत का सामानही खरीदा जाए. ऐसा नहीं कि जो पसंद आ गया, उसे खरीद लिया कि बाद में काम आजाएगा. ऐसे में जरूरत का सामान तो छूट ही जाता है, जेब भी खाली हो जातीहै. इसलिए जरूरी है कि प्लान करके शॉपिंग की जाए. इसके लिए कुछबातों पर ध्यान देने की जरूरत है.

बजट बनाएं : अपने बजट के अनुसार शॉपिंग की लिस्ट बनाएं. लिस्ट से एक सुविधा यह रहती हैकि पहले से ही अनुमान लगाया जा सकता है कि कितने पैसे में सामान आएगा. यदिबजट से ज्यादा का सामान हो रहा है, तो अनुपयोगी सामान निकाल दें.

गुणवत्ता जरूरी : किसी भी कम्पनी के ब्रांड से उसकी गुणवत्ता का पता चल जाता है. सस्ते केचक्कर में छोटी दुकानों या सड़क किनारे लगी सेल से कपड़े, चप्पल या अन्यसामान खरीदने  से पहले किसी दूसरी दुकान से उस सामान का दाम पूछ लिया जाए, तो आपको पता चल जाएगा कि दोनों के दाम और क्वालिटी में कितना अंतर है. बड़ीकंपनियों के दाम फिक्स होते हैं इसलिए जब वे सेल लगाती हैं, तो कुछप्रतिशत की छूट देती हैं, परंतु छोटे दुकानदार पहले से ही दाम बढ़ा कर सेलमें छूट के नाम पर मुनाफे में ही उस चीज को बेचते हैं.

एक्सपायरी डेट पर दें ध्यान : खरीददारी करते समय किसी भी उत्पाद के निर्माण एवं समाप्ति की तारीख परविशेष रूप से ध्यान दें, क्योंकि जिस उत्पाद के उपयोग की तारीख बदल चुकीहो, वह उत्पाद बेकार हो जाता है इसलिए उसे खरीदने से कोई फायदा नहीं. ज्यादातर महिलाएं किसी बड़ी दुकान या मॉल से सामान खरीदते वक्त इस बात कोनजरअंदाज कर देती हैं कि यहां का सामान तो बढिय़ा ही होगा.

मोल-भाव की कला जानें : खरीददारी में मोल-भाव बहुत मायने रखता है, जो महिलाएं मोल-भाव करने की कलाजानती हैं, वे कभी नहीं ठगी जातीं. रिटेलर अपनी मर्जी से दाम रखते हैं, जिसपर उनका अच्छा-खासा लाभ होता है.

टी.वी. पर इस संबंध में सरकारी विज्ञापन भी दिखाए जाते हैं, जिसमेंग्राहकों को पैक पर दी हुई फिक्स प्राइस में भी मोल-भाव करने के लिए जागरूककिया जाता है. खरीदे सामान की रसीद एवं बिल जरूर लें, ताकि सामान खराबनिकलने पर उसे आसानी से वापस किया जा सके.

खरीददारी भी एक कला : आज स्मार्ट कंज्यूमर वही माना जाता है, जो अपने पैसे की पूरी कीमत वसूलनाजानता है. खरीददारी के समय मोल-भाव की कला आपकी मेहनत की कमाई को बर्बादहोने से बचा कर आपकी बचत को बढ़ा सकती है.

  1. हर दुकानदारकी पूरी कोशिश रहती है कि वह अपने मालको ज्यादासे ज्यादा कीमत पर बेचे. यदि दुकानदार ऐसा सोचता है, तो आप भी अपनी मेहनत की कमाई कीपूरी कीमत वसूलने का हक रखती हैं इसलिए आप मोल-भाव या सौदेबाजी को कभी भीकम दर्जे का न समझें.
  2. विक्रेताको इस बातका एहसास नहोने दें, कि आप जो खरीदने जा रही हैं, उसकी कीमत से आप अनजान हैं तथा उस चीज के बिना आपका काम नहीं चल सकता.
  3. अपने स्वभावसे विनम्र और सुदृढ़ नजर आएं. वस्तु के प्रति अधिक दिलचस्पी या तीव्र इच्छा न जताएं.
  4. जब आपको लगेकि दुकानदार अपनी अंतिम सीमातक भाव बता चुका है और आप भी उस वस्तु को खरीदने का इरादा कर चुकी हों, तो उसे अपने सोचे गए दाम के बारेमें बताएं. अपना दाम बताने के बाद चुप्पी साध लें और दुकानदार की ओरविचारपूर्ण मुद्रा में देखना शुरू कर दें.
  5. यदि मोल-भावके बाद कोई बात नबने तो ऐसे जाहिर करेंकि आपको उस चीजकी इतनी भी जरूरत नहीं है. इसके बाद आप टहलने वाले अंदाज में आगे बढ़ जाएं. हो सकता है तभी दुकानदार आपको आपकी ही बोली कीमत पर सामान देने के लिए आवाजदे दे.
  6. मोल-भाव करनेमें नकद राशि बहुत बड़ा हथियार साबित होती है. सामान खरीदनेके बाद आप जितनी राशि दुकानदार को देना चाहती हैं, उतनी ही दे कर देखें. देखा गया है कि ऐसे मामलों में दुकानदार थोड़ी-सी ना-नकुर के बाद अपने आपमान जाते हैं.
  7. सौदे बाजी करते समय आप चीज की कीमत उतनी ही लगाएं, जितनी जायज हो. ऐसा न हो कि आप दूसरों की नजरों में मजाक की पात्र बन जाएं.
  8. किसी डिपार्टमेंटल स्टोर में मोल-भाव से बचें क्योंकि वहां के दाम निश्चित होते हैं.
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