इंटरनेट से भी है खतरा

Posted on April 29 2014 by yogesh

तलवाड़ा: इंसान के जीवन में बचपन ही एक ऐसा समय होता है जो सबसे खास और यादगार होता है. यह एक खास उम्र है जहां बच्चे खूब शरारत करते हैं, मस्ती करते हैं और अपना जीवन जीते हैं लेकिन वर्तमान समय में बच्चों का बचपन कुछ बदल सा गया है. इसमें शरारत नहीं होतीक्योंकि मौजूदा जमाने का बचपन इंटरनेट में ऐसा उलझा हुआ है कि कब यू-ट्यूब, फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सप्प, गूगल और याहू में उनकी जिंदगी खो जाती, उन्हें पता ही नहीं चलता.

गौरतलब है कि आज हर कोई इंटरनेट का दीवाना है. बच्चोंसे लेकर बूढ़ों तक पर इसका खुमारचढ़ा है. जबसे मोबाइल फोन पर यहसुविधा मिलनी शुरू हुई है हर कोई मोबाइल में आंखें गढ़ाए अपने पसंद की साइटेंदेख रहा होता है, चैटिंग कर रहा हैजिसके दुष्परिणाम हमारे सामने आरहे हैं. लोग हत्या, आत्महत्या तथा बलात्कार तक करने में नहीं हिचकिचाते. आज यौन शोषण की सबसे लम्बी सूची इंटरनेट से शुरू होती है और इंटरनेट पर हीखत्म होती है.

बता दें कि हर रोज साइबर क्राइम के हजारों मामले सामने आ रहे हैं. हजारों जवानियांखत्म हो रही है. इस वक्त इंटरनेट का बुखार सबको ऐसा चढ़ा है कि अपने होश-हवाशगंवाकर रिश्तों की मर्यादा तार-तार करके लोग पागलों की तरह बर्ताव कर रहे हैं. मनुष्य की भलाई व सदुपयोग के लिए बना इंटरनेट आज शरारती तत्वों केहत्थे चढ़कर मनुष्य का बेड़ा गर्क कर रहा है. इसलिए जरूरी है कि हमें इसके इस्तेमालके बारे में समझना होगा. इंटरनेट का प्रयोग अगर समझदारी से किया जाए तो यह एक वरदान है नहीं तो किसी अभिशाप से कम नहीं और यह भेद हमें समझकर ही चलना होगा.

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