आईपीएल फिक्सिंग में सुप्रीम कोर्ट ने जांच पर जताया अविश्वास

Posted on April 29 2014 by yogesh

नई दिल्ली:उच्चतम न्यायालय ने गत मंगलवार को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड(बीसीसीआई)को बड़ा झटका देते हुए आईपीएल मामले की जांच के लिए उसके द्वारा सुझाए गएतीन सदस्यीय दल को खारिज कर दिया. इसी के साथ अदालत ने न्यायाधीश मुकुलमुद्गल की समिति को ही मामले की आगे की जांच के लिए कहा है.

गौरतलब है कि बीसीसीआई नेउच्चतम न्यायालय के समक्ष आईपीएल छह मामले की जांच के लिए पूर्व टेस्टआलराउंडर रवि शात्री, कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जय नारायणपटेल और सीबीआई के पूर्व निदेशक आरके राघवन की सदस्यता वाले तीन सदस्यीय दलका प्रस्ताव रखा था. शीर्ष अदालत ने बिहार क्रिकेट संघ की इस प्रस्तावित दल को लेकर जताई गईआपत्तियों के बाद यह फैसला सुनाया. इसी के साथ उच्चतम न्यायालय नेन्यायाधीश मुद्गल की अध्यक्षता वाली समिति को ही आईपीएल भ्रष्टाचार मामलेऔर खासतौर पर सीलबंद लिफाफे में बंद रिपोर्ट में दर्ज 13 लोगों के खिलाफजांच करने के लिए पूछा है.

बता दें कि उच्चतम न्यायालय ने अक्टूबर 2013 में इस समितिका गठन किया था जिसने इस वर्ष फरवरी को मुद्गल समिति ने इस मामले में अपनीजांच रिपोर्ट अदालत को सौंपी थी. इस सीलबंद रिपोर्ट में 13 लोगों के नाम दर्ज हैं जिसे केवल न्यायाधीशों कोही देखने की अनुमति है. समिति ने अपनी रिपोर्ट देते समय कहा था कि रिपोर्टमें जिन लोगों को आरोपी बनाया गया है उनके खिलाफ विस्तृत कार्रवाई की जरूरतहै। ऐसे में अदालत ने मुद्गल समिति को ही आईपीएल मामले में आगे की जांच केलिए कहा है.

उल्लेखनीय है कि शीर्ष अदालत ने गत सप्ताह बीसीसीआई की प्रशासनिक स्वायत्ता कोध्यान में रखते हुए आईपीएल मामले की जांच स्वयं करने के लिए कहा था. अदालतने बोर्ड से जांच समिति में शामिल नामों पर प्रस्ताव मांगा थालेकिनबीसीसीआई के प्रस्तावित दल को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे. प्रस्तावितनामों में शामिल शात्री को बोर्ड से वेतन पाते हैं तो जे.एन.पटेल बीसीसीआईके उपाध्यक्ष और मौजूदा अंतरिम अध्यक्ष शिवलाल यादव से संबंध रखते हैंजबकि सीबीआई के पूर्व निदेशक राघवन तमिलनाडु क्रिकेट संघ (टीएनसीए) सेमान्यता प्राप्त क्रिकेट क्लब के सचिव हैं. बता दें कि टीएनसीए के अध्यक्षएन.श्रीनिवासन हैं.

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