हेल्थ टिप्स – सीजेरियन डिलीवरी से बढ़ा रहा है डर

Posted on December 30 2013 by yogesh


शहर के सरकारीअस्पतालों में सीजेरियन डिलीवरी के आंकड़े बढ़ते जा रहेहैं. प्राकृतिक डिलीवरी के दर्द से बचने के लिए महिलाएं खुशी से सीजेरियन डिलीवरी करवा रही हैं. इंडियन कौंसिल फॉर मैडीकल रिसर्च(आई.सी.एम.आर)और गवर्नमैंट मेडीकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की पायलट स्टडी की मानें तो सरकारी अस्पताल में रजिस्टर्ड 31.5% प्रेगनेंट महिलाओं ने अपनी मर्जी से सीजेरियन डिलीवरी करवाई, जबकि वर्ल्ड हैल्थ आर्गेनाइजेशन की साफ तौर पर ये हिदायतें हैं कि किसी भी समुदाय में 15% से ज्यादा सीजेरियन (सी-सेक्शन) डिलीवरी नहीं होनी चाहिए.

गौरतलब है कि आई.सी.एम.आर. ने जी.एम.सी.एच. के कम्युनिटी मेडीसिन विभाग को बढ़ रहीसी-सेक्शन डिलीवरी के कारण खोजने को पायलट स्टडी की जिम्मेदारी दी जिसमें पाया गया कि अस्पताल में 21.2 प्रतिशत महिलाओं ने सी-सेक्शन डिलीवरी सेबच्चों को जन्म दिया और उनमें से 31.5% प्रेगनेंट महिलाओं ने मेडीकल कारणों के बगैर सी-सेक्शन डिलीवरी को चुना. जी.एम.सी.एच. के कम्युनिटी मेडीसीन विभाग ने गाइनीकोलॉजी विभाग की ओ.पी.डी.में रजिस्टर्ड प्रेगनेंट महिलाओं को स्टडी का हिस्सा बनाया. स्टडी केदौरान शोधकर्ता मनदीप सिंह ने प्रेगनेंट महिलाओं की सीजेरियन औरप्राकृतिक डिलीवरी के प्रति जागरूकता का आंकलन किया.

यह भी जाना गया कि क्या महिलाएं सीजेरियन डिलीवरी के बाद होने वालीपरेशानियों से भी वाकिफ हैं या नहीं. स्टडी ने यह भी देखा कि मां की जिदपर सीजेरियन ऑप्रेशन कितने नुक्सानदायक साबित होते हैं. स्टडी कहती है कि महिलाएं कृष्ण जन्माष्टमी, पहली जनवरी क्रिसमस के दिन कोडिलीवरी के लिए खास मानती हैं, परंतु किसी भी महीने की 13तारीख को बच्चेको जन्म देना पसंद नहीं किया जाता. 13 तारीख से बचने के लिए भी कुछ महिलाएंपहले ही ऑपरेशन करवा लेती हैं.

सीजेरियन डिलीवरी चुनने के पीछे कई कारण होते हैं जिनमें से प्रमुख होते हैं:
सीजेरियन डिलीवरी का सबसे प्रमुख कारण महिलाओं के दिल में बैठा दर्द का खौफहै. स्टडी में शामिल 67% महिलाओं ने सीजेरियन डिलीवरी का चयनडिलीवरी के दर्द से घबराकर किया. उसके बाद शरीर की बनावट को बिगडऩे से बचानेके लिए महिलाओं ने यह फैसला लिया, जबकि 12% महिलाओं ने शुभमुहूर्त, धार्मिक कारण और तारीख की वजह से सीजेरियन करवाया. 15.4% महिलाओं का मानना था कि वेजाइनल डिलीवरी की बजाय सीजेरियनडिलीवरी में बच्चे को आराम से जन्म दिया जा सकता है हालांकि 6.9% महिलाएं यह जानती भी थी कि सीजेरियन ऑपरेशन के बाद उनके शरीर पर क्या बुरेअसर होंगे. सीजेरियन डिलीवरी का डर 36% महिलाओं में देखा गया. सीजेरियन के बाद लंबे समय तक अस्पताल रहने, दोबारा मां न बन पाने का डर और 14% महिलाओं को लगता था कि सीजेरियन के बाद सामान्य होने में काफीलंबा समय लग जाएगा.

बता दें कि स्टडी यह भी खुलासा करती है कि 25साल से अधिक उम्र वाली महिलाएं सीजेरियनकरवाना पसंद करती हैं क्योंकि उनके पहले बच्चे की डिलीवरी भी सीजेरियन सेही हुई थी. 25 साल से अधिक उम्र की 59.45% महिलाएं एक बच्चे को जन्मदे चुकी होती हैं जिनमें से 29.72% ने सी-सेक्शन से ही बच्चे कोजन्म दिया था.

सी-सेक्शन डिलीवरी के कारण इस प्रकार हैं:

-    प्रेगनेंटमहिलाकीमर्जी

-    पहली प्रेगनेंसी

-    बच्चे की सुरक्षा के मद्देनजर

-    गर्भावस्था का पूरा समय

-    दर्द से बचने के लिए

-    पहले बच्चे का सीजेरियन डिलीवरी से जन्म हो चुका हो

जी.एम.सी.एच.-32 के डॉ.दिनेश वालियासी-सैक्शन उन महिलाओं के लिए था जिनकीप्राकृत्तिक डिलीवरी नहीं की जा सकती या फिर वेजाइनल डिलीवरी उनके बच्चे केलिए खतरनाक हो.आज सी-सेक्शन की वजह से अस्पताल के गाइनीकोलॉजी वार्डस परबोझ बढ़ रहा है. नार्मल डिलीवरी के बाद जहां कुछ घंटों में महिला कोछुट्टी दे दी जाती है वहीं ऑपरेशन के बाद चार से पांच दिन महिला को अस्पतालमें ही रहना पड़ता है. महिलाओं को जागरूक करने की जरूरत है. यह स्टडी समाजके समक्ष एक सवाल भी खड़ा करती है कि क्या महिलाओं को अपनी मर्जी सेसी-सेक्शन डिलीवरी का चयन करना चाहिए या नहीं?

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