बीएमसी में ऑक्युपेशन सर्टीफिकेट घोटाला

Posted on December 30 2013 by yogesh

बीएमसी में ऑक्युपेशन सर्टीफिकेट घोटाला
रहिवासी और विकासक इससे परेशान होकर निकालनेवाले हैं बीएमसी पर मोर्चा

मुंबई(पिट्स प्रतिनिधि) : मुंबई को मायानगरी कहा जाता है इस शब्द का अर्थ बहुत सारे बातों से निकलता है. जैसे यहां पर बहुत सारा पैसा मिलता है,यहांपर आदमी मोह में लालची भी हो जाता है और अब कईऐसे काम हो रहे हैं जिसकी बदौलत मुंबई अच्छे कामो से कम बुरे कामों के लिए जानी जा रही है.आज मुंबई में अपना खुद का मकान होना एकतरह से सपनेजैसा है परंतु जिन लोगों के नसीब में मकान होता है उनको भी यह वक्त पर नहीं मिलता है और इसके लिए जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ मुंबई महानगरपालिका के कुछ अधिकारी हैं जो राजनेताओं की चापलूसी में माहिर हैं और इनके लिए ही यह काम कर रहे हैं.

आज पुरी मुंबई में विकासकों द्वाराएसआरए हो या अन्य नीजी बिल्डिंगें बनाई गई है उसके लिए बीएमसी की तरफ से ऑक्युपेशन सर्टीफिकेट दिया जाता है जिसकी बदौलत लोग अपने घर में रहने के लिए जा सकते हैं परंतु बीएमसीयह सर्टीफिकेट देने के लिए कई सालोंकावक्त लगा रही है इससे लोगों में और विकासकों में काफी गुस्सा देखा जा रहा है. इस सर्टिफिकेट को पाने के लिएविकासकों के पास रिश्वत मांगी जा रहीहै और अगर कोई विकासक इसे देने से मना कर देता है तो उसे इस सर्टीफिकेट देने के लिए अधिकारी सालों साल लगा देते हैंजिसकी वजह से लोगों काइन बिल्डिंगों में रहने का सपना टूट रहा है. करोड़ों रूपये फी के रूप में देने के बावजूद बीएमसी सर्टीफिकेट देनेमेंसक्षमनहीं है. यह जो ऑक्युपेशन घोटाला बीएमसी में चल रहा है उस से तंग आकर जल्द ही विकासक और रहिवासी आंदोलन की तैयारी मे हैंक्योंकि हमने कुछ विकासक और रहिवासियों से बात की तो उनका कहना था कि यह सब पैसों का खेल है. कुछ राजनेताओं के दबाव में आकरअधिकारी जनताका काम नहीं बल्कि उन लोगों के तलवे चाट रहे हैं जिसे जनता ने उस गद्दी पेबिठाया है. यह सर्टीफिकेट जल्द ना देने के पीछे अर्थकारण समाया हुआ है. जो अधिकारी इस कामको कर रहे हैं अगर उनकी महिनों की कमाई देखी जाए तो वह करोड़ों की है.हमने बैंकों से कर्ज ले रखा है और जो भी बीएमसी इंस्पेक्टर यहां पर आता है वो हमें स्थानीय एमएलए से बात करने के लिए कहता है मतलब खुले आम रिश्वत देने को मजबूर किया जा रहा है. यह सब देखते हुए भी इन सभी की मिलीभगत को कौन रोकेगा? अगर ऐसा ही हाल रहा तो जिस तरह महाराष्ट्र से कंपनी चली जा रही हैबस उसी तरह विकासक बीएमसी के गलत व्यवहार से तंग आकर अन्य राज्यों में अपना कारोबार शुरू करनेकी ना सोच इसका ध्यान रखना होगा. इस विषय में हमारे पास कई रहवासी संघों के अध्यक्ष के पत्र मिले जिन्होंने इसे बड़ा घोटाला माना है और जल्द ही आंदोलन की तैयारी में हैं.

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