सरकार भारतरत्न के निकषों को स्पष्ट करे !!!

Posted on November 25 2013 by yogesh

सचिन को दिए जानेवाले भारतरत्न को लेकर बढ़ता जा रहा है विरोध…
क्या अब भारतरत्न देने के लिए भी सुप्रीम कोर्ट को दखल अंदाजी करनी पड़ेगी?

मुंबई(चंदन पवार)Email:chandanpawar.pits@gmail.com

‘भारतरत्न’ यह ऐसा सम्मान है जिसने देश की सेवा की है उसी का यह प्रमाणपत्र है जिसे आज तक भारत के 43 महान व्यक्तियों को मिल चुका है. जिसमें महाराष्ट्र से ही 8 लोगों को मिलना महाराष्ट्र राज्य के लोगों के लिएगौरव की बात है परंतु जब सचिन तेंडुलकर को भारतरत्न देने की भारत सरकार ने घोषणा की है तबसे भारतरत्न देने की व्यवस्था परकई लोगों द्वारा प्रश्न चिह्न निर्माण किया जा रहा है. क्या लोगों द्वारा सचिन तेंडुलकर को दिए जानेवाले भारतरत्न का खुलकर विरोध करना सही हैं? क्या यह भारतरत्न सम्मान पानेवाले का अपमान है? या सरकार ने सचिन को भारतरत्न देने में जल्दबाजी की है? ऐसे कई सवालों केसाथ जनता में असमंजस की स्थितीबनी हुई है.

आजतक भारतरत्न देने के पीछे कौनसे निकष हैं, ना ही इनको सार्वजनिक किया गया है. भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है और इसे अत्यंत विचार-विमर्श के बाद ही किसी को दिया जाना चाहिए. यह पुरस्कार अकेले प्रधानमंत्री की संस्तुति पर दिया जाता है, जिसमें न तो पारदर्शिता है और न ही सार्वभौमिकता परंतु माना यही जाता है कि जिसने देश की सेवा की हो, जिनके कार्य से जनता और देश का नाम ऊंचा हुआ हो, गरीब, पीड़ित और सामान्य इंसान का भला हुआ हो, साइंस में प्रगती की हो, उस व्यक्ति को ही भारतरत्न दिए जाने का नियम है. सचिन तेंडुलकर की श्रेष्ठता पर और उन्होने क्रिकेटको जो नया आयाम दिया है. उससे देश का नाम हुआ है, इसमें किसी देशवासियों को कोई शंका नहीं है. परंतु सचिन के पहले हॉकी के जादूगर मेजर ध्यान चंद इनको दिसंबर2011 से भारतरत्न देने की मांग हो रही थी और इसे भारत के 82 सांसदों ने भी उठाया था. परंतु अब इस मांग को छोड़कर भारत सरकार ने सचिन तेंडुलकर को यह सम्मान देने की घोषणा की इससे भारत के कई समाजसेवक, जेष्ठ नागरिक और सामान्य लोग व्यतीत दिख रहे हैं. उनका कहना है कि भारतरत्न मेजर ध्यानचंद को पहले मिलना चाहिए था. वह पहले इस सम्मान के हकदार थे. कई लोगों का तो यहां तक कहना है कि 13 देशों में खेला जानेवाला यह क्रिकेट का खेल इसमें प्राप्त ऊंचाई की वजह से सचिन को भारतरत्न देना कहां तक सही है? कई लोग यह भी कहते हैं कि अभी अभी हुए ओलंपिक खेलों के दौरान हमारे कुछ खिलाड़ियों ने गोल्ड मेडल जीते जिनकी वजहसे देश का नाम दुनिया के पूरे देशों में हो गया है तो उन्हें क्यों भारतरत्न से नवाजा नहीं गया है?

इस भारतरत्न की पंक्ति में कई लोगों ने भाजपाके पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, बाबा आमटे, अण्णा हजारे, विश्वनाथन आनंद, मिल्खा सिंह, गीत सेठी, अशोक, अकबर, कालिदास, कबीर और ऐसे कई समाज में बदलाव करनेवाले समाजसेवक है जो इस के हकदार हो सकते थे. इस विषय में कुछ युवाओं को पूछा गया तो युवा सचिन को भारतरत्न मिलने को सही मान रहे हैं और वह हकदार हैं ऐसा उनका कहना है.

भारतरत्न अब खिलाड़ी को भी मिल सकता है इसकी वजह से खिलाड़ियों में काफी आनंद की लकीर देखने को मिली परंतु भारत सरकार को भारतरत्न देते समय कौन कौन से निकषों को देखना चाहिए इनकी भी चर्चा हो रही है. कई समाजसेवकों का मानना है कि भारतरत्न ऐक ऐसा सम्मान है जो उस व्यक्ति को मिले जिसने देश के लिए बड़ा त्याग किया हो, स्वदेशी चिजों का इस्तेमाल करना सिखाया हो, आयुर्वेद को बढ़ावा दिया हो और उसके काम से आम आदमी को फायदा पहुंचा हो परंतु यह सम्मानसचिन को मिल रहा है. यह सुनकर कुछ समाजसेवकों को दुख हुआ है और जिस तरह भारत सरकार ने भारतरत्न सम्मान में राजनीति लाई है उससे देश के लोग काफी नाराज हो गए हैं क्योंकि अगर यह सम्मान भारत सरकार मेजर ध्यानचंद इनको देती तो चुनावों में कांग्रेस सरकार को कोई फायदा नहीं मिलता परंतु युवा लोगों के चहीते सचिन को यह सम्मान देकर भारत सरकार शायद कोई वोटों की गणित जुटाने में लगी है?

इस विषय में कुछ प्रतिक्रियाएं:

डॉ.विश्वंभर चौधरी(समाज सेवक):सचिन की श्रेष्ठता पर मुझे कोई शक नहीं है परंतु सचिन तेंडुलकर से पहले यह सम्मान मेजर ध्यानचंद को मिलना चाहिए था. मुझे लगता है कि किसी को सम्मान देनाया नहीं देना भी आज पॉलिटिकल मोटिव हो गया है.जिसे देते वक्त अपना फायदा कैसे होगा, यह देखा जा रहा है. आज कई विद्यापीठों को सड़कोंको महान व्यक्तियों के नाम देना, एक तरह का व्यक्ति केंद्रित देश होते जा रहा है. आज हमारे देश में कई बड़ी समस्याएं हैं जिनकी तरफ पहले ध्यान देना बहुत जरूरी है.

श्री.संजीव कोकिल(पूर्व पुलिस अधिकारी):मैं कहूंगा कि सचिन को यह सम्मान देना अति हो गया है. मैं उनकी क्रिकेट की महानता को सलाम करता हूंपरंतु जो खेल दुनिया के सिर्फ 13 देशों में खेला जाता है उसके लिए भारतरत्न देना कहां तक ठीक है? जब से क्रिकेट में राजनेता, बिजनेसमैनऔर सट्टेबाज घुस गए हैं तब से क्रिकेट,क्रिकेट नहीं रह गया है. यह पूरी तरहसे व्यापार बन गया है और इसका प्रतिनिधित्व कर रहे खिलाड़ी को भारतरत्न दिया जा रहा है. यह बड़े दुख की बात है. इसी वजह से भारतरत्न सम्मान का मोल कम होतेजाएगा जो हमारे लिए शर्म की बात है. जिन्हें इसके पहले भारतरत्न दिया गया हैं उन्हें अपमानित मत करो यही मेरा कहना है.

सविता सातपुते(ऍंकर कम प्रोड्युसर, न्यूज एक्सप्रेस):सचिनको खुदआगे आकर भारतरत्न सम्मान को मेजर ध्यानचंद को देने की वकालत करनी चाहिए थी परंतु इसका मोह उनसे छूटा नहीं. अगर सचिन इसे मेजर ध्यानचंद को देने की बात कहते तो वह अधिक महान बन जाते.

श्री.दिपक तारकर(डायरेक्टर, मराठी चित्रपट उद्योग) : सचिन तेंडुलकर को भारतरत्न देने का मैं समर्थन करता हूं. उन्होंने भी देश के लिए खेला और देश का नाम बढ़ाया है और आगे जाकर मैं यही कहता हूं कि देश के सभी नागरिक भारत के रत्न हैं. जो सही काम करता है और उसकी वजह से देश का भला होता है उन सभी को भारतरत्न मिलना चाहिए.

श्री.विनोद पाटिल(प्रोड्युसर,जी24 तास) : देश में सचिन के पहले ऐसे बहुत से लोग हो गए हैं जिनकी वजह से हमआज स्वतंत्र और खुले आसमान के नीचे अच्छा जीवन जी रहे हैं. वह इस सम्मान के असली हकदार हैं परंतु अगर मेजर ध्यानचंद को यह सम्मान मिलता तो मुझे एक देशवासी होने की वजह से बहुत आनंद मिलता. सचिन एक अच्छे खिलाड़ी हैं, इनका मैं विरोधी नहीं हूं परंतु कहीं ना कहीं भारत सरकार ने भारतरत्न देने में जल्दबाजी की है.

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