श्रद्धा बेलसरे इनकी पुस्तक ‘डबल बेल’ का हुआ शानदार विमोचन

Posted on October 26 2013 by yogesh

श्रद्धा बेलसरे इनकी पुस्तक ‘डबल बेल’ का हुआ शानदार विमोचन
‘डबल बेल’ में इंसानियत और कर्तव्यपालन की सीख….

मुंबई(चंदन पवार) : एक इंसान को अगर अपना कर्तव्य ईमानदारी से निभाना होता है तो उसे अपनी नोकरी में अच्छे और सबके भलाई के लिए कुछ निर्णय लेने पड़ते हैं. जिससे कुछ लोगों को दुख होता है परंतु अगर एक अच्छे निर्णय की वजह से बहुत सारे लोगोंका भला होता है इसलिए कठिन निर्णय लेने पड़ते हैं, बस उसीकी परछाई ‘डबल बेल’ में नज़र आएगी. गत गुरूवार को चर्चगेट स्थित जय हिंद कॉलेज में ‘अमेय प्रकाशन’ ने इस पुस्तक को प्रकाशित किया है.

इस पुस्तिक की लेखिका और प्रशासकीय अधिकारी श्रद्धा बेलसरे अपना कर्तव्य ईमानदारी से निभाते हुए आज भी निडरता से आगे बढ़ रही हैं. इनके पुस्तक में इन्होंने जब किसी सरकारी अफसरको कठिन निर्णय लेने पर कितनी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है फिर उसे स्वीकारते हुए किस तरह से आगे बढ़ना है और लोगों की मदद करनी है. इस तरह के उनके अपने अच्छे और बुरे अनुभवों का मिश्रण ‘डबल बेल’ के माध्यम से प्रकाशित किया क्योंकि वह एक ईमानदार अफसर होने की वजह से ही ‘डबल बेल’ को लिख पाई हैं, इस पुस्तक की खासियत यह भी है कि महिलाओं को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए किस तरह अपने आपको साबित करना है, इस तरह की प्रेरणा भी मिलती है.

इस शानदार समारोह में महाराष्ट्रराज्य के उद्योगमंत्री नारायण राणे, सांसद भरत कुमार राऊत,विधायक यशोमती ठाकुर, मुंबई विद्यापीठ के कुलगुरू डॉ.राजन वेलुकर, डॉ.उज्ज्वल उके, एस.टी. कामगार सेना के अध्यक्ष हनुमंत तारे और निलमताई नारायण राणे उपस्थित थे. इस समारोह में उपस्थित मान्यवरों ने ‘डबल बेल’ के बारे में अपनी प्रतिक्रिया दी. जिसमें हैं

नारायण राणे(उद्योगमंत्री,महाराष्ट्रराज्य) : ‘सरकारी अधिकारी को अपनी ड्युटी निभाते समय कठोर होना पड़ता हैउसे अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाते हुए इंसानियत को भी ध्यान मेंरखना जरूरी है. बस इसी की परछाई ‘डबल बेल’ है.’

डॉ.राजनवेलुकर(कुलगुरू,मुंबई विद्यापीठ) : ‘दूसरेलोगों का दुख जब हम अपना मानते हैं तब हम सच्चे दिल से काम करते हैं. यह पुस्तक महिलाओ को किस तरह कठिन समय में आगे बढ़ना है, इसकी प्रेरणा देता है.’

 

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