अब देश के प्रधानमंत्री का दामन भी नहीं रहा साफ?

Posted on October 26 2013 by yogesh

अब देश के प्रधानमंत्री का दामन भी नहीं रहा साफ?
कोयला घोटालेकी कालिख अब प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचती दिख रही है
सीबीआई ने मांगी पीएमओ से हिंडाल्को की फाइलें

नई दिल्ली(पिट्स प्रतिनिधि) : किसी ने क्या खूब कहा है कि; ईमानदार व्यक्ति सिर्फ वही है जिसे कभी बेईमानी करने का मौका ना मिला हो’, हालांकि यह एक बड़ा प्रश्न बनते जा रहा है कि भारत में भ्रष्टाचार से किसका दामन बचा हुआ है?कोयला घोटाले की कालिख अब प्रधानमंत्री के दामन को भी दागदार कर सकती है क्योंकि देश के सबसे बड़े घोटाले की सीबीआई द्वारा की जा रही जांच की आंच अब प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह के कार्यालय तक पहुंचती दिख रही है. गौरतलब है कि कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री पूरे मामले में सकारात्मक सहयोग देने को तैयार हैं. जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री खुद चाहते हैं कि पूरे मामले में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए.

आपको बता दें कि सीबीआई ने गत मंगलवार को प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर हिंडाल्को को कोयला ब्लॉक आवंटन से संबंधित सभी रिकॉर्ड मांगे. प्रधानमंत्री कार्यालय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि प्रधानमंत्री ने इस आवंटन को मंजूरी मामले की पात्रता के आधार पर दी थी, जो उनके समक्ष रखी गई थी. सीबीआई सूत्रों के अनुसारयह कदम उच्चतम न्यायालय में स्थिति रिपोर्ट दायर करने के बाद उठाया गया जिसमें जांच एजेंसी ने आदित्य बिर्ला समूह के अध्यक्ष कुमार मंगलम बिर्ला और पूर्व कोयला सचिव पीसी पारेखके खिलाफ दर्ज नवीनतम मामले के बारे में न्यायालय को जानकारी दी. सीबीआई ने प्राथमिकी में सक्षम प्राधिकार का भी उल्लेख किया है, जिसे प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपने बयान में बताया है कि वह सक्षम प्रधानमंत्री थे जो यह निर्णय लेते समय वर्ष 2005 में कोयला मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे थे.

गौरतलब है किकोयला खदान आवंटन कांड की जांच में हुई प्रगति के सिलसिले में उच्चतम न्यायालय में गत मंगलवार को केंद्रीय जांचब्यूरो ने सीलबंद लिफाफे में नई रिपोर्ट दाखिल की. कोयला कांड की इसजांच की चपेट में अनेक कंपनिया, प्रमुख उद्योगपति और नौकरशाह आ गए है. उम्मीद है कि जांच ब्यूरो इस रिपोर्ट में शीर्ष अदालत को 14 वीं प्राथमिकी के बारे में जानकारी देगा, जो उसने हाल ही में उद्योगपति कुमार मंगलम बिर्ला, उनकी कंपनी हिंडाल्को और पूर्व कोयला सचिव पी.सी.पारेख के खिलाफ दर्ज की थी.जांच ब्यूरो ने कोयला खदान आवंटन से संबंधित दूसरे मामलों की प्रगति के बारे में भी इस रिपोर्टमें न्यायालय को अवगत कराएगा.

उल्लेखनीय है कि न्यायालयने 29 अगस्त को इस मामले की ढुलमुल जांच के लिए सीबीआई को आड़े हाथ लिया था. कोयला खदान आवंटन कांड की धीमी जांच के लिए सीबीआई की आलोचना करते हुए न्यायाधीशों ने कहा था कि जांच एजेंसी अभी भी पहले ही गियर मेंहै और उसे गति प्रदान करनी होगी. शीर्ष अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया था कि उन सभी कंपनियों को खिलाफ दिसंबर तक जांच पूरी की जाए जिन्हें कोयला खदाने आवंटित की गई थी.न्यायमूर्ति आर.एम.लोढ़ा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा था कि, ‘आपको कुछ गति पकड़नी होगी. जांच की रफ्तार अच्छी नहीं है. आप अभी भी पहले ही गियर में चल रहे हैं. आपके पास बड़ी जिम्मेदारी है और इस सभी को अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचना होगा.’

भारत जैसे देश में भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत ज्यादा मजबूतहो गईं है और दूर-दूर तक फैली हुई हैं. हर दूसरा व्यक्ति भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा हुआ है? ऐसे में प्रधानमंत्री पर उठती उंगलियां कई प्रश्न खड़े कररहे हैं.परंतु जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा और सच्चाई दुनिया के सामने आजाएगी.

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