घर परिवार – रजोनिवृत्ति(मेनोपॉज)

Posted on August 27 2013 by yogesh

प्रश्न: कार्यालय में काम करते समय एकदम से जो चिड़चिड़ाहट आती है उसको कैसे ठीक करें?

उत्तर: ऐसे समय में बाहर काम करनेवाली आरतों को ज्यादा समस्याएं आती हैं. परिवार में शांति से वक्त व्यतीत किया जाए और अगर ऐसा करना संभव नहीं है तो जब भी समय मिले निष्पदभाव कर लें. जब भी मौका मिले आंखें बंद करके थोड़ी लंबी लंबी सांसे लें और छोड़ें.

खाना कार्यालय में कभी भी तुरंत न लें. खाना खाने से पहले थोड़ा चल फिर लें उसके बाद ही खाना खाएं. आप अपने विचार देना बंद करें. तर्क, वितर्क ना करें और क्रोध करने से भी बचें. शांति से सांस लें. समय का पूरा उपयोग करें. मन लगाकर कार्य करें और परिणाम को छोड़ दें.

प्रश्न: रात में नींद नहीं आती तो क्या करें?

उत्तर: सोने से पहले पांच मिनट पैर गरम पानी में भिगोकर रखें फिर तलुवों को रगड़ों पत्थर से. मसूढ़ों की मसाज करो कोई भी अच्छे टुथपाउडर से. जलती हुई मोमबत्ती क लो और उसको एकटक देखो. फिर बिस्तर पर जाकर धीरे-धीरे अनुलोम-विलोम प्राणायाम करो.

प्रश्न: रजोनिवृत्ति में अक्सर कमजोरी महसूस होती है और मन में उतार चढ़ाव बहुत होता है तो क्या करें?

उत्तर: ताकत का सीधा संबंध मनस्थिति से है. सकारात्मक सोच हो तो ताकत अपने आप बढ़ जाती है और ताकत को संभाल कर रखें. नकारात्मक सोच से उसे खर्च ना करें तो मूड स्विंग होगा ही नहीं. इसके लिए थकने से पहले ही आराम लर ले. हर दो घंटे में तरल खाद्य पदार्थ लेना चाहिए.

प्रश्न: रजोनिवृत्ति में पेट पर चर्बी बढ़ता है, मोटापा आ जाता है तो उसके लिए क्या करना चाहिए?

उत्तर: ऐसे समय में हॉर्मोन्स में परिवर्तन होते हैं जिससे मोटापा बढ़ जाता है.Lool conscious होना जरूरी नहीं है. तले हुए पदार्थ कम खाओ. मांसाहारी आहार नहीं लेना और समय पर खाना है. तुलना करना आना चाहिए. सात्विक खाना खाने से अच्छी मन की स्थिति रहती है.

प्रश्न: रजोनिवृत्ति के समय दांपत्य संबंधों को कैसे संभाले?

उत्तर: ज्यादातर महिलाओं में संभोग की इच्छा कम होती है. पर दूसरे ढंग से इसे व्यक्त कर सकती हैं. एक दूसरे को साथ देना, प्यार से सहलाना, गरमाहट प्यार की अपनेपन की देना ज्यादा जरूरी है. पति की इच्छा के लिए करें लेकिन व्यक्त ना करें.

‘स्त्री घर की विशेष स्तंभ होती है.’

अगर वह अपना किरदार ठीक तरह से नहीं करेगी तो घर बिखर जाएगा. इसके लिए हर स्त्री का कर्तव्य है कि अपने आप को ठीक स्थिति में रखने की जिम्मेदारी उसकी स्वंय की है. उसे स्वावलंबी बनना बहुत जरूरी है.

इस आयु में आते आते हमारे शरीर की मांस पेशियां ढीली पड़ जाती है. हमारी व्यायाम क्रिया भी कम या बंद हो जाती है इसलिए मोटापा बढ़ जाता है. भारतीय नारी की एक सोच रही है कि इस आयु में आकर अपने स्वास्थ का ध्यान रखना जरूरी नहीं है. खाना भी सबको खिलाकर अंत में जो बचा है वह खा लेती है. अपना धर्म अपने स्वंय की देखभाल करना आवश्यक है.

भावनात्मक संतुलन: इस समय में भावनात्मक संतुलन बिगड़ने की संभावना कुछ ज्यादा हो जाती है. इसलिए विशेष ध्यान दें. खाली बिलकुल ना बैठें. हम उम्र स्त्रियों से बातचीत करें. आपको एहसास होगा कि इस तरह की मनस्थिति करीब करीब सब महिलाओं की हो जाती है.

अपना विशेष ध्यान रखें. अपनी दिनचर्या में उन सब चीजों के लिए समय निश्चित करें जो आप करना चाहते तथेपर समय के अभाव के कारण नहीं कर पाए. जैसे संगीत सीखना, कागज और कपड़े की कुछ वस्तुए बनाए. अपने समय के सदुपयोग के लिए कुछ तो नया तरीका अपना सकते हैं. निराशा के लिए वक्त ही नहीं मिलेगा.

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