रोजा सीखाता है बुराईयों पर काबू पाना

Posted on July 30 2013 by yogesh

मुंबई (रजिया निसार) : यूं तो इस्लाम धर्म में रमजान के महीने को सबसे पाक महीना माना जाता है, लेकिन यह महीना अपने आप में बहुत ज्यादा रहमत वाला महीना है. सबसे पहले आपको बता दें कि इस्लामी कैलेंडर(हिजरी) के अनुसार रमजान नौंवे महीने में आता है और सबसे ज्यादा पाक और अफजल महीना माना जाता है. रमजान के महीनों को तीन भागों में बांटा गया है जिसे अशरा कहते हैं. अरबी में अशरा का मतलब 10 होता है. पहला अशरा रहमत का, इसका मतलब रमजान के शुरू के 10 दिनों में खुदा की रहमत उसके बंदों पर होती है. दूसरा अशरा मगफिरत का यानी माफ कर देनेवाला, ऐसा कहा जाता है इस समय अपने रब से अगर कोई बंदा माफी मांगे तो उसका रब उसे माफ कर देता है और तीसरा अशरा आग से बचाव का है. रमजान महीने के आखिरी दस दिनों में बंदा अपने रब से जहन्नुम(नर्क) की आग से बचने की दूआ करता है.

रमजान के महीने में लोग रोजा रखते हैं और सूरज निकलने से पहले से सूरज डूबने तक बीना कुछ खाए पीए रहते हैं और रब की इबादत करते हैं. हालाकिं  रोजा सिर्फ भूखे प्यासे रहने का नाम नहीं है बल्कि हर तरह की बुराईयों पर काबू पाने का नाम है. रोजा रखकर आप गलत और अश्लील हरकत करने से बचें. इसके साथ ही शारीरिक एवं मानसिक कार्यों पर भी काबू रखें, यही रोजा आपको सीखाना चाहता है. रोजा का महीना शांति, एकता और मुहब्बत का पैगाम देता है. ऐसा कहा जाता है कि इस महीने में आप एक दूसरे से अपने गिले शिकव दूर कर लें और एकता बनाने की कोशिश करें. किसी को दुख पहुंचाया हो तो मांफी मांग लें इससे अच्छे रिश्तों की शुरूआत होती है और आपका रब आपसे राजी होता है. रमजान लोभ, माया, मोह, काम और क्रोध जैसी बातों पर काबू करना सीखाता है. इस मुबारक महीने में रोजा, नमाज, फितरा और जकात निकालने का विशेष महत्व होता है.

रोजा रखने से आपको भूख और प्यास का एहसास होता है जिससे आप उन जरूरतमंदों की तकलीफ को समझ सकते हैं जिनके पास खाने के लिए रोटी नहीं है. इसलिए खुदा ने संपत्ति खर्च करने के भी निर्देश दिए हैं. जो संपत्ति आपके पास है वह सिर्फ भोग का साधन है. आपके संपत्ति में गरीब, दुखियो का भी हिस्सा होता है. इसलिए आप उनपर थोड़ा खर्च करें और नेकीयां कमाएं. रमजान महीने के खत्म होने पर ईदुल फितर मनाया जाता है.

रोजा आप अपने रब को खुश करने के लिए रखते हैं इसलिए इसमें किसी प्रकार का कोई दिखावा ना करें. पूरे मन से रोजा रखें और किसी को सताना, परेशान करना, गाली गलौज करना इन सब नियंत्रण करें. ऐसा करने से आपको अपने ऊपर विश्वास होने लगता है. आपका आत्मविश्वास भी बढ़ता है. आप समझने लगते हैं कि आप अपने जरुरतों पर काबू रख सकते हैं. आप अपने ख्वाहिशों के गुलाम नहीं हैं. दूसरों की जरूरत का ख्याल रखनेवाला बंदा अपने खुदा के सबसे नजदीक होता है. जिस्म के हर हिस्से पर नियंत्रण रखने का मतलब रोजा है.

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