‘ब्रह्मोस’ को अगले 20 साल तक कोई चुनौती नहीं दे सकता

Posted on June 22 2013 by yogesh

नई दिल्ली : भारत की सैन्य कौशल का भी कोई तोड़ नहीं है. दुनिया की एकमात्र सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और भारत के सैन्य कौशल का प्रतीक ‘ब्रह्मोस’ है. ‘ब्रह्मोस’ के शिवतनु पिल्लई ने दावा किया है कि अगले 20 साल तक ‘ब्रह्मोस’ को कोई चुनौती नहीं है.

वैज्ञानिक और ब्रहमोस एयरोस्पेस के मुख्य कार्यपालक अधिकारी तथा प्रबंध निदेशक पिल्लई ने कहा कि ‘ब्रह्मोस’ का समकक्ष अभी तैयार किया जाना है और अगले 20 साल में शत्रु से इसे कोई चुनौती नहीं मिल सकती है. पिल्लई डीआरडीओ के आरएंडडी विभाग के प्रमुख नियंत्रक हैं और उन्हें ‘ब्रह्मोस का जनक’ भी कहा जाता है. पिल्लई भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित इस उत्कृष्ट प्रौद्योगिकी के विकास को लेकर भावी रूपरेखा के बारे में अपने विचार रख रहे थे.

पिल्लई ने ‘थॉट्स फॉर चेंज, वी कैन डू इट’ नामक नई किताब में इस मिसाइल प्रौद्योगिकी को युवा शक्ति द्वारा संचालित भारत को सुरक्षित और उसका बेहतर भविष्य बनानेवाली 10 प्रमुख एवं दुर्लभ उन्नत प्रौद्योगिकियों में से एक बताया है. इस किताब को पिल्लई ने पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे.अब्दुल कलाम के साथ मिलकर लिखी है. इस किताब में दो प्रख्यात वैज्ञानिकों की सोच है जिसमें भारत के युवा वर्ग से ऐसा बेहतर भविष्य बनाने की दिशा में काम करने के लिए प्राचीन वैज्ञानिक कौशल को फिर से अपनाने के लिए कहा गया है जहां बहुप्रौद्योगिकी एक दूसरे को परस्पर काटेंगी और परस्पर संचालित होंगी.

पिल्लई ने एक साक्षत्कार में कहा कि, ‘इस तथ्य पर हमें गर्व है कि दुनिया की एकमात्र सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और भारत-रूस सहयोग का प्रतीक ब्रह्मोस भारतीय नौसेना और सेना को सफलतापूर्वक आपूर्ति की जा चुकी है. भारतीय वायुसेना के लिए इसका हवाई संस्करण भी अगले कुछ साल में तैयार हो जाएगा.’

आपको बता दें कि यह मिसाइल भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डआरडीओ और रूस के एनपीओ माशिनोस्ट्रोयेनिया के बीच रणनीतिक भागीदारी के तहत विकसित की गई है. यह एक स्टील्थ क्रूज मिसाइल है जिसकी मारक क्षमता 290 किमी और गति 2.8 मैक से 3 मैक है. इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मोस्कवा नदी के नामों को मिलाकर ‘ब्रहमोस’ रखा गया है.

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