सोशल मीडिया किशोरों को बना रहा है एंटी सोशल

Posted on May 27 2013 by yogesh

नई दिल्ली : आज के समय में जब महिलाओं और बच्चियों के सामूहिक बलात्कार और महिलाओं पर यौन हमलों, खुदकुशी और विभिन्न तरह की हिंसा की घटनाएं महामारी का रूप ले रही हैं। शोधकर्ताओं एवं मनोचिकित्सकों का मानना है कि समाज विरोधी ऐसी घटनाओं में इजाफे के लिए फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किंग साइटों का भी हाथ है।

इस विषय पर किए गए अनेक अध्ययनों से पता चलता है कि इन साइटों पर अधिक समय व्यतीत करने से आत्ममुग्धता, अंहकार और समाज विरोधी व्यवहार विकसित होते हैं। मनोचिकित्सकों का कहना है कि सोशल नेटवर्किंग साइटों की लत के कारण किशोरों में एकाग्रता में कमी, अनिद्रा, डिप्रेशन, बेचैनी और चिड़चिड़ापन की समस्यायें भी बढ़ रही है।

वरिष्ठ मनोचिकित्सक एवं दिल्ली साइकिएट्रिक सेंटर डीपीसी के निदेशक डॉ. सुनील मित्तल बताते हैं कि सोशल नेटवर्किंग साइटों पर अधिक समय रहने के अलावा अधिक समय तक टेलीविजन देखना बच्चों, किशोरों एवं युवाओं में डिप्रेशन एवं अनेक अन्य मनोवैज्ञानिक समस्यायें पैदा करते हैं। डॉ. मित्तल कहते हैं कि हालांकि आज सोशल मीडिया ने सामाजिक संवाद के तौर-तरीकों को बदल दिया है लेकिन इसने बच्चों, किशोरों एवं युवाओं पर कई तरह के नकारात्मक प्रभाव भी डाले हैं।

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