भारत चीन बैठक में 8 मुद्दों पर लगी मुहर

Posted on May 27 2013 by yogesh

नई दिल्ली : भारत यात्रा पर आए चीनी प्रधानमंत्री ली काचियांग और भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच हैदराबाद हाऊस में दोनो देशों के बीच आठ कारोबारी समझौतों पर दस्तखत हुए हैं।

उन्होंने बताया कि भारत और चीन के आठ मुद्दों पर बात की गई है। मनमोहन ने बताया कि इस बैठक से दोनों देशों के बीच के रिश्तों को और मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों देश सीमा पर शांति चाहते हैं और सीमा मुद्दे को लेकर बातचीत जारी रहेगी।

उन्होंने कहा कि बैठक में दोनो देशों के मध्य रिश्तों को मजबूत करने पर ज़ोर दिया गया है और आपसी रणनीतिक सांझेदारी बढऩे की उम्मीद जताई जा रही है। मनमोहन सिंह ने चीन जाने का न्यौता स्वीकार करते हुए कहा कि भविष्य में वह भी चीन की यात्रा पर जाऐंगे। उन्होंने कहा है कि बैठक में मानसरोबर यात्रा पर भी समझौता किया गया है और दोनो देशों के जोडऩे वाली नदियों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा है कि ब्रहम्पुत्र नदी के बहाव के बारे में दोनो देशों के बीच जानकारियों को साझा किया जाएगा।

उधर बैठक के बाद चीन के प्रधानमंत्री ली काचियांग ने कहा है कि दोनो देशों के मध्य बातचीत काफी अच्छी रही। उन्होने कहा कि सीमा विवाद को लेकर काफी सकारात्मक बातचीत हुई है। उन्होंने यह उम्मीद जताई है कि दोनों देशो के बीच जो भी मतभेद है वह जल्द ही सुलझाए जाऐंगे। दोनों देशों के बीच तनाव की बात से इन्कार करते हुए उन्होंने कहा कि चीन ऐसा कोई काम नहीं करेगा जिससे दोनों देशो के बीच दरार पड़े।

उन्होंने कहा कि चीन भारत का एक अच्छा दोस्त है। आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि दोनों देशोम के बीच अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर भी बात हो। उन्होंने कहा कि बातचीत से ही कोई हल निकालना जुरूरी है और बातचीत से ही दोनो देशों के रिश्तों का एक नया अध्याय शुरु होगा। आगे जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि दोनो देशों के  विदेश मंत्रियों ने समझौतो पर दस्तखत किए है।

चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग ने कहा कि सीमा गतिरोध सहित समस्याओं का समाधान करने का भारत और चीन में ‘‘विवेक’’ है। उन्होंने कहा कि नदियों एवं व्यापारिक असंतुलन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत की चिंताओं को दूर किया जाएगा।

भारतीय व्यवसायियों को संबोधित करते हुए ली ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक भागीदार के रूप में काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया और दोनों देशों के रिश्ते को मजबूत करने के संबंध में एक चीनी कहावत का उद्धरण दिया- दूर का रिश्तेदार उतना महत्वपूर्ण नहीं हो सकता जितना कि नजदीक का पड़ोसी। उन्होंने कहा कि मतभेदों से ज्यादा हमारे साझा हित हैं। उन्होंने कहा कि सीमा समस्या का परस्पर स्वीकार्य समाधान ढूंढने के लिए भारत और चीन में ‘‘विवेक’’ है।

उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एवं अन्य भारतीय नेताओं के साथ ‘‘स्पष्ट, खरा और लाभदायक’’ वार्ता को लेकर वह ‘‘संतुष्ट’’ हैं जिस दौरान दोनों पक्षों ने ‘‘सभी मुद्दों को उठाया।’’ ली ने कहा कि भारत और चीन ‘‘नैसर्गिक सहयोगी’’ हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमें एक दूसरे के विकास को अपने लिए बड़े अवसर के रूप में देखना चाहिए और हमारे पास मतभेदों से ज्यादा साझा हित हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘चीन और भारत रणनीतिक सहयोगी हैं। इन बैठकों का सबसे महतवपूर्ण परिणाम रहा कि हमने परस्पर रणनीतिक विश्वास को बढ़ाया है और कई नए परिणामों पर पहुंचे हैं।’’

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