सप्ताह की खास मुलाकात – युवराज छत्रपति संभाजी राजे (कोल्हापुर)

Posted on April 15 2013 by yogesh

मराठा समाज के गरीब परिवारों को न्याय दिलाकर ही रहूंगा !
छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपना पूरा जीवन गरीब लोगों के लिए समर्पित कर दिया था. उस राजा के वंशज रहे छत्रपति संभाजी राजे आज अपने ही समाज के लोगों के ऊपर हो रहे अन्याय से विचलित हो गए हैं. उन्होंने ठान लिया है कि वह मराठा समाज के गरीब वर्ग के लोगों को आज के शासन काल में न्याय दिलाकर ही रहेंगे. ऐसे महान राजा के वंशज कोल्हापुर के श्री छत्रपति संभाजी राजे के साथ बात की हमारे वरिष्ठ पत्रकार चंदन पवार ने.  

मराठा समाज के लिए आपकी कौन सी मांगे हैं और क्यों ?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि मराठा समाज है क्या. आज मराठा समाज मैजोरिटी में है, लगभग ३० से ४० प्रतिशत. १९०२ ने छत्रपति शिवाजी के वंशज श्री शाहू महाराज, कोल्हापुर के जो हमारे परदादा हैं उन्होंने पहले बहुजन समाज को ५० प्रतिशत आरक्षण दिया. इस ५० प्रतिशत आरक्षण में उन्होंने मराठा समाज को शामिल किया था. हम मानते हैं कि आज १० प्रतिशत मराठा समाज रईस है लेकिन ९० प्रतिशत मराठा लोग कोल्हापुर, सांगली और सतारा के साथ-साथ उत्तर महाराष्ट्र में जितने भी मराठा लोग हैं वह गरीब हैं. यदि आप सर्वे करेंगे तो आप को पता चलेगा कि जितने भी किसानों ने आत्महत्या की है उनमें ज्यादातर लोग मराठा किसान ही हैं. इसलिए हमारी मांग है कि सबसे पहले जितने भी गरीब मराठा लोग है उन्हें आरक्षण मिलना चाहिए. उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होना चाहिए. इसलिए हम चाहते हैं कि मराठा समाज का समावेश ओबीसी में किया जाए जैसा शाहू महाराज ने किया था. दूसरी बात यह कि अन्य राज्य जैसे तमिलनाडू, आंध्रप्रदेश वहां ७२ प्रतिशत तक आरक्षण दिया गया है तो क्यों महाराष्ट्र में मराठा लोगों को आरक्षण नहीं दिया जा रहा है. मेरा कहना यह है कि राजनैतिक आरक्षण मत दीजिए लेकिन शिक्षा और नौकरी जैसी आवश्यक चीजों पर तो जिन्हें जरूरत हैं उन्हें आरक्षण दिया जाना ही चाहिए.

मराठा समाज का आरक्षण देने की मांग कब से चल रही है और अब तक इसे पूरा क्यों नहीं किया गया ?

१९८२ में अण्णा जी आमदार थे उन्होंने मराठा आरक्षण की मांग की थी. उस समय बाबासाहेब भोसले मुख्यमंत्री थे और मराठा समाज की परिस्थिति जो आज है वही उस समय भी थी. मराठा समाज के लिए अण्णा जी ने बलिदान दिया था. १९८२ से अब तक बहुत सी सामितियों का गठन हुआ है लेकिन निर्णय आज तक नहीं हो पाया है और यह निर्णय आज तक क्यों नहीं लिया गया यह तो राजनेता जानते हैं या सिर्फ भगवान ही जानता है. यह लोग सिर्फ मराठा समाज के भावनाओं से खेल रहे हैं, उन्हें मुर्ख बना रहे हैं लेकिन उनके लिए कुछ कर नहीं रहे हैं. लेकिन खुशी की बात यह है कि सभी पार्टियों के लोग एक मंच पर आए और मराठा समाज के हित के लिए आवाज बुलंद की. हालांकि यह तो वक्त ही बताएगा कि कौन कितने दूर चलेगा.

आप छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज हैं इसलिए सारा मराठा समाज आपकी तरफ आरक्षण के मामले में आशा से देख रहा है, क्या लोगों की मांग को आप पूरा कर पाएंगे ?

सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह कि मराठा समाज के लोग इकट्ठा एक मंच पर आए हैं और २२ मराठा संगठनों को एक साथ लाने के लिए मैंने बहुत मेहनत ली है. मैंने उन्हें समझाया कि जब आप लोगों का एक ध्येय है तो आप एक साथ मिलकर आरक्षण की मांग क्यों नहीं करते ? सबको मेरी बात पसंद आई. अभी तो हमने अपना काम शुरु ही किया है और सरकार का रूख भी सकारात्मक लग रहा है लेकिन अगर आगे चलकर आरक्षण की मांग को नकारा जाता है तो हम भी उसी के अनुसार अपना अगला कदम उठाएंगे. लेकिन मैं लोगों की मांग पूर्ति के लिए कटिबद्ध हूं.

मराठा समाज के किस वर्ग को आरक्षण मिलना चाहिए, ऐसा आपको लगता है ?

जिनके पास संपत्ति नहीं है और एक वक्त का खाना भी जुटाना उनके लिए मुश्किल है उनके आर्थिक हालातों को देखते हुए उन्हें आरक्षण मिलना चाहिए. इसलिए सुप्रीम कोर्ट और सरकार को इनके लिए विकल्प ढ़ूंढ़ना होगा. इनको ओबीसी में समाविष्ट करना होगा. ओबीसी वर्ग को जो आरक्षण मिला है उसके साथ छेड़खानी ना करते हुए मराठा समाज के लोगों को इसमें शामिल करना चाहिए.

मंत्रिमंडल में सबसे ज्यादा मराठा समाज के विधायक होते हुए भी अब तक आरक्षण क्यों नहीं मिल पाया है ?

यह सवाल तो उनको ही पूछना चाहिए कि क्यों वह मराठा समाज के भावनाओं के साथ खेल रहे हैं. मुझे तो इस प्रश्न का उत्तर ही नहीं पता, यह तो उनको ही पता होगा.मैं आज तक संसद और विधान भवन में गया ही नहीं हूं. उनकी क्या राय है, वह क्यों इस मुद्दे को इतने सालों से खींचते आ रहे हैं यह संशोधन का विषय है.

ओबीसी में मराठा समाज को आरक्षण देने के लिए विरोध हो रहा है, अगर ओबीसी में मराठा आरक्षण को जगह नहीं मिली तो आप क्या सुझाव देंगे ?

मैंने पहले ही साफ कर दिया है कि जिन ओबीसी लोगो को आरक्षण मिलता है उनके आरक्षण के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए क्योंकि वह भी गरीब लोग हैं और उनका भी अधिकार है. जिस तरह से आंध्रप्रदेश और तमिलनाडू में अतिरिक्त आरक्षण मिला है वैसा ही यहां भी करना चाहिए. सभी नियमों को और गरीब वर्ग को ध्यान में रखते हुए आरक्षण की मांग पूरी करनी चाहिए.

बहुत से ओबीसी नेता जनता के सामने समर्थन की बात करते हैं लेकिन परदे के पीछे पलट जाते हैं तो क्या यह उनका राजनैतिक पैंतरा है ?

ऐसे तो मुझे अब तक नहीं दिख रहा है लेकिन निर्णय तो लेना ही पड़ेगा क्योंकि मराठा समाज की हालत बहुत बदतर होते जा रही है. कई लोग तो हालात से तंग आकर जान ही दे रहे हैं तो ऐसी परिस्थिति में कुछ ना कुछ तो करना ही होगा. कई सालों से आरक्षण मुद्दे को टालते जा रहे हैं लेकिन अब वक्त आ गया है कि इनको हां या ना में फैसला लेना होगा.

नारायण राणे समिति ने अगर मराठा आरक्षण के अनुकूल निर्णय नहीं दिया तो आपकी आगे की रणनीति क्या होगी ?

निर्णय आने के बाद हम देखेंगे कि आगे क्या करना है. मराठा समाज के लोगों को फिर एकसाथ खड़ा रहकर आगे की रणनीति बनानी होंगी.

मराठा समाज को आप क्या संदेश देना चाहेंगे ?

मराठा समाज एक बहुत बड़ा समाज है और स्वाभिमानी भी है. जैसे दूसरा समाज मेहनत करके अपने परिवार का पेट भरते हैं वैसे ही मराठा समाज भी करता है. आरक्षण मिलना इनका हक है लेकिन मराठा समाज को मेहनत करने से पीछे नहीं हटना है. अगर हम मेहनत करेंगे तो यश मिलना निश्चित है. हम केवल शिवाजी महाराज और शाहू महाराज की मूर्तियां लगाकर समाज की हालत सुधार नहीं सकते हैं. उनके परिवार के लिए हमें कुछ करना होगा तभी जाकर उनका परिवार सुख के दो पल महसूस कर सकता है.

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