सप्ताह की खास मुलाकात – श्रीमती. हंसाजी जयदेवा योगेन्द्र

Posted on March 25 2013 by yogesh

योग द्वारा हम लोगों को जीवन जीने का तरीका सिखाते हैं…

योग आज के युग में बहुत महत्वपूर्ण है, अब योग विश्वभर में प्रचलित हो रहा है. श्रीमती हंसाजी योगेंद्र के प्रयास द्वारा आज दि योग इंस्टिट्यूट बड़े गर्व के साथ खड़ा है. कर्मयोग के सिद्धांत का अनुकरण करते हुए योगेंद्र परिवार मानव कल्याण के लिए निस्वार्थ भाव से यह कार्य कर रहा है. उनके इस जन कल्याण के कार्य के बारे में जानने के लिए हमारे वरिष्ठ पत्रकार चंदन पवार ने हंसाजी से खास मुलाकात की. उसके कुछ अंश.

आपकी योगा केंद्र की विशेषता क्या है?

हमारे योग केंद्र की सबसे बड़ी विशेषता तो यह है कि यह दुनिया का सबसे पुराना योग केंद्र है. हमारे केंद्र में पुरातन योग की परंपरा आज भी बरकरार है जिसमें शिष्य गुरू के घर जाता है और सारी विद्याएं सिखता है. हमारे यहां शिष्य तो रहने के लिए नहीं आते लेकिन जीवन जीने की जो सारी पद्धति है यहां सिखाई जाती है. इस आश्रम में लगभग १००० की संख्या में लोग रोज आते हैं. हमारा आश्रम गैर सरकारी संस्था है क्योंकि हमारा मानना है कि योग तो हमारी संस्कृति है जिसे सिखाने के लिए हमें पैसा नहीं चाहिए. हमें लोगों को यह संदेश देना है कि अपने संस्कृति पर चलें जिससे हमारा जीवन सुखी-समृद्ध और स्वस्थ बन जाएगा. हमारे यहां फी बहुत कम है जिसकी वजह से लोग बड़े पैमाने पर यहां आते हैं. हमारी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि हम यहां लोगों को जीवन जीने का तरीका सिखाते हैं.

आपके योगा केंद्र में विदेश के लोग आते हैं क्या और किस प्रकार के योगा सीखते हैं?

यहां जो विदेशी लोग आते हैं उन्हें टीचर ट्रेनिंग कोर्स करना होता है. वे योग की शिक्षा प्राप्त करने के लिए आते हैं. हमारे पास योग शिक्षा देने की पूरी व्यवस्था है. यहां ७ महीने का कोर्स है लेकिन हमने विदेश से आए लोगों के लिए ३ महीने का दिन-रात का कोर्स बनाया है. हम उन्हें खाने-पीने और सोने-जागने से लेकर जीवन जीने की छोटी-छोटी बातें सिखाते हैं. वह यहां तीन महीने रहकर पूरे लगन के साथ सिखते हैं. हम विदेशी लोगों को यहां रखने से पहले उनका इंटरविव लेते हैं कि क्या वह सच में यह कोर्स करने के इच्छुक हैं या नहीं. हमारे यहां हर महीने विदेश से १० से १२ लोग आते हैं. यहां पर दो तरह के कोर्स हैं, जिसमें एक कोर्स १ महीने और दूसरा ३ महीने का है.

योगा किसी बीमारी पर काबू पा सकता है?

जी बिल्कुल, योगा बीमारी पर काबू कर सकता है. जिन लोगों को डॉक्टरों ने कहा है कि आप कुछ दिनों में मर जाओगे ऐसे लोग भी योगा से सही हो गए हैं. हम जानते हैं कि आज कल लोग सात्विक भोजन नहीं करते, उनकी सोच भी अच्छी नही है और दिनचर्या भी सही नहीं है ऐसे में जब उन्हें हम सिखाते हैं और वह योग करते हैं और इन सब बातों पर ध्यान देने लगते हैं तब काफी हद तक बीमारियां सही हो जाती है. हम कभी नहीं कहते कि योगा एक थेरेपी है, हम कहते हैं कि योग जीवन जीने की एक शैली है एक विज्ञान है. जिसमें सभी बातों का समावेश होता है जैसे शरीर का ध्यान कैसे रखना, मन पर कैसे काबू करना इत्यादि. एक इंसान को उच्चतम इंसान बनाना ही योग का काम है.

प्राचीन भारत में ऋषि-मुनी योग के द्वारा लोगों की सेवा करते थे लेकिन आजकल इसे सिर्फ व्यवसाय का रूप दिया गया है. यह कहां तक उचित है?

यह बिल्कुल भी उचित नहीं है. अगर योग को व्यवसाय से दूर रखा जाए तो बहुत अच्छा होगा. योग सिखाकर अगर आप अपनी जरूरतों को पूरा कर रहे हैं तो वहं तक ठीक है जिसे ’नीड’ कहते हैं लेकिन इसे ‘ग्रीड’ नहीं बनाना चाहिए. जो लोग योग को केवल व्यवसाय के रूप में देखते हैं मैं तो उन्हें भ्रष्ट योगी समझती हूं.

देश में बाबा रामदेव को योग गुरू के नाम से नवाजा जाता है यह आपको कहां तक सही लगता है?

मैं तो कभी रामदेव बाबा से मिली नहीं हूं लेकिन उन्हें योग गुरू इसलिए कहा जाता है क्योंकि उनकी वजह से योग इतना प्रचलित हुआ है कि हर घर में योग शब्द आया. रामदेव जी ने यह काम बहुत अच्छा किया इसलिए शायद उन्हें योग गुरू कहा जाता है. नहीं तो योग में कोई गुरू नहीं होता है, यहां प्रत्येक को अपना गुरू स्वंय बनना पड़ता है.

योगा करने के लिए कौन सा समय बेहतर होता है?

देखिए, यह भी एक गलत धारणा है कि योग के लिए कोई समय होता है. योग में आसन, प्राणायम ऐसी चीजें होती हैं जिन्हें खाली पेट करने में अच्छा लगता है. खाली पेट में कठिन से कठिन योग भी हो जाता है. मैं आपको बता दूं कि हम यहां गृहस्थियों को योग सिखा रहे हैं इसलिए कठिन क्रियाएं तो करनी ही नहीं है. सरल, सादे आसन जिसका असर अंदर के अव्ययों पर अच्छी तरह पड़े ऐसे आसन सिखाते हैं. हम जो आसन सिखाते हैं वह हम दिन के किसी भी समय में कर सकते हैं.

पूरे विश्व में ऐसा कौन सा योगा आश्रम है जिसे आप पसंद करती हैं और वहां जा चुकी हैं?

(मुस्कुराते हुए) यह बहुत ही कठिन प्रश्न है क्योंकि मैं जिस भी आश्रम में गई हूं, हर आश्रम की अपनी अपनी विशेषताएं है. प्योर योग जिसे हम क्लासिकल योग कहते हैं ऐसा कोई आश्रम तो मुझे अबतक मिला नहीं है.

योगा के कितने प्रकार हैं?

योग के तो बहुत सारे प्रकार हैं पुराने जमाने में १०० से भी ज्यादा योग प्रकार हुआ करते थे. आपको बता दूं की हट योग, राज योग, मंत्र योग, तंत्र योग, ज्ञान योग, कर्म योग, कुंडली योग जैसे कई योग है. शरीर में जिस अंग पर ध्यान देना होता है उस अंग से जुड़ा हुआ योग को नाम दे दिया जाता है. इस तरह अलग अलग योग बन जाते हैं. लेकिन योग का जो सही मिश्रण है उसे पतंजलि ने बताया है. गृहस्थों को किस प्रकार  का योग करना चाहिए यह पतंजलि ने बताया है.

योगा करने के लिए क्या योग गुरू की जरूरत होती है या फिर योगा के बारे में पढ़कर घर पर ही योगा किया जा सकता है?

शुरू में तो गुरू की जरूरत पड़ेगी ही. आजकल आप आसन और मेडिटेशन(ध्यान लगाना) तो किसी से भी सीख सकते हो लेकिन उसको जीवन में कैसे उतारना है यह तो गुरू ही बता सकता है.

योगा किसे नहीं करनी चाहिए?

योग तो हर किसी को करना चाहिए. हां योग में कुछ आसन हर किसी को नहीं करना चाहिए क्योंकि योग की भी अपनी बाध्यता है. जैसे अगर गर्भवती महिला कोई गलत आसन कर ले तो उसे नुकसान पहुंच सकता है. बीमार आदमी गलत तरीके से योग करेगा तो भी नुकसान पहुंच सकता है इसलिए किसी से योगा समझने के बाद ही योगा करना चाहिए.

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