हेल्थ टिप्स – मायोपिया से बचाएं आंखों को…

Posted on February 25 2013 by yogesh

लोग कहते हैं कि पूरे चेहरे में दो आंखों ऐसी होती हैं जिनमें वह आकर्षण होता है जिससे कोई भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता. लेकिन आप सोचें अगर इन सुंदर आंखों की रोशनी ना रहे या फिर इनमें कुछ समस्या आ जाए तो यह दुनिया कितनी अंधकारमय और नीरस हो जाएगी. आपको यह भी बता दें कि वर्तमान समय में हर दूसरा व्यक्ति आंखों की समस्या से ग्रसित है.

शारीरिक, मानसिक और पर्यावरणीय कारणों से आजकल अधिकाश लोगों की आंखों में रिफ्रैक्टिव विकार(किरणों का वक्र होना) की समस्या के लक्षण दिखाई देने लगे हैं. इसमें निकट दृष्टि-दोष(मायोपिया), दूरदृष्टि दोष(हायपरोपिया), दृष्टिवैषम्य(अस्टिग्मटिज्म) प्रमुख है. डॉक्टरो की मानें तो इन विकारों में सबसे ज्यादा लोग मायोपिया से प्रभावित हैं. डॉक्टर का कहना है कि बचपन में देखन की क्षमता का विकास होता और किशोरावस्था में आंख की लंबाई बढ़ती है लेकिन निकट दृष्टि दोष होने की वजह से यह कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है. ऐसी स्थिति में आंख में जानेवाला प्रकाश रेटिना पर केंद्रित नहीं होता. इसी वजह से तस्वीर धुंधली दिखाई देती है लेकिन इस दोष को कॉंटैक्ट लेंस या सर्जरी से ठीक कराया जा सकता है. गौरतलब है कि जिन लोगों को २ मीटर या ६.६ फीट की दूरी के बाद चीजें धुंधली दिखती है उन्हें मायोपिया का शिकार माना जाता है.

आपको बता दें कि एशियाई शहरों में करीब १० से १२ प्रतिशत विद्यार्थी इस समस्या से पीड़ित हैं, इसकी वजह से वह अपनी आंखों की रोशनी भी खो सकते हैं. मायोपिया अगर गंभीर ना हो तो चश्मा लगाकर या कॉंटैक्ट लेंस लगाकर इस समस्या से निजात पा सकते हैं. इसके अलावा अगर स्थिति गंभीर हो तो ऐसी स्थिति में रिफ्रैक्टिव सर्जरी लासिक ही इसका उपचार है. लासिक या कार्निया में एक पतला सा गोल फ्लैप तैयार किया जाता है. इसके बाद एक्समायर लेजर से फ्लैप को बाजू कर उसके नीचे के कुछ टिश्यूज निकाले जाते हैं और पुन: उस भाग को फ्लैप से ढंक दिया जाता है. दुनिया का सबसे आधुनिक सुपर फास्ट लेजर श्विंड अमारिस है, यह इस तरह के सर्जरी में बहुत महत्वपूर्ण है.

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