सप्ताह की खास मुलाकात – मुकेश शर्मा (एडिशनल डायरेक्टर जनरल (दूरदर्शन) मुंबई)

Posted on February 25 2013 by yogesh

मुकेश शर्मा – एडिशनल डायरेक्टर जनरल (दूरदर्शन) मुंबई

अगर दूरदर्शन ने वक्त के साथ बदलाव नहीं किया तो मुझे नहीं लगता है कि दूरदर्शन आगे बढ़ पाएगा…

जबसे मुकेश शर्मा ने दूरदर्शन की बागडोर संभाली है तबसे दूरदर्शन हर एक ऊंचाई तय कर रहा है. उन्होने दूरदर्शन को नई पीढ़ि के सामने रखने के लिए बहुत सराहनीय कार्य किए हैं और आगे भी करने का हौसला रखते हैं. उनके साथ दूरदर्शन के बारे में जानने के लिए बात की हमारे वरिष्ठ पत्रकार चंदन पवार ने.

 दूरदर्शन में टेलिकास्ट के लिए प्रोग्राम की चॉइस किस तरह से होती है?

दूरदर्शन एक पब्लिक ब्रॉडकास्ट है. हम सामान्य रूप से हर क्षेत्र से जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक के पहलुओं को छूने की कोशिश करते हैं. हमारी कोशिश रहती है कि हम हर क्षेत्र के मुद्दों कों १०% से १२% छूने की कोशिश करें. एक पब्लिक ब्रॉडकास्ट होने की वजह से हमारे प्रोग्राम का चुनाव मार्केट को मद्देनजर रखते हुए नहीं बल्कि लोगों के हित को देखते हुए किया जाता है.

लोगों की तरफ से किस तरह का रिस्पॉंस मिलता है?

देखिए मैं मानता हूं कि सामान की पैकेजिंग बहुत अच्छे से होनी चाहिए उसी से लोग आपके सामान के प्रति आकर्षित होते हैं. मैं मानता हूं कि दूरदर्शन में दिखाए जानेवाले कंटेट बहुत ज्यादा मजबूत होते हैं और हम उस पर काम भी करते हैं और लोगों का हमें भरपूर रिस्पॉंस भी मिलता है.

अब डिश टीवी ने हर घर में जगह बना ली है. क्या दूरदर्शन अभी भी लोगों के दिल में जगह पा रहा है?

दूरदर्शन को मेंटेन करने का काम बहुत अलग है. दूरदर्शन का अपना डिश है और अगर आप इसे लेते हैं तो आपको एक बार ही पैसा भरना पड़ता है लेकिन प्राइवेट चैनल के डिश में लोगों को लगातार पैसा भरना पड़ता है. प्राइवेट चैनल आपको एक आदत डाल देता है और फिर पैसा बढ़ाता है. यह आपके आदत पर निर्भर करता है कि आप क्या चुनते हैं क्योंकि हमारे समय में हमारे पास निर्धारित वस्तुएं हुआ करती थीं और हम खुश रहते थे लेकिन आज चार कार, २५ सूट भी लोगों को कम पड़ते हैं. यह सिर्फ लोगों पर है कि उन्हे कहां जाना है.

ई निजी चैनल आने के बाद दूरदर्शन की टीआरपी कम हो गई है. क्या यह सही है?

१९९० में जब लिब्रलाइजेशन हुआ तो सिर्फ हमारे क्षेत्र में नहीं बल्कि एयरवेज और अस्पतालों तक में हुआ इसका यह मतलब नहीं है कि एयर इंडिया खत्म हो गई. देखिए एक बात मैं कह देना चाहता हूं कि हमारी निजी चैनलों से कोई स्पर्धा नहीं है तो हम क्यों उस बात की चिंता करें. सरकार का काम करने का तरीका बहुत अलग है. समाजिक हित के लिए काम करना सरकार का उत्तरदायित्व है.

युवा लोगों के दिल में दूरदर्शन जगह बनाने में कामयाब नहीं हुआ है इसका दोष आप किसको देना चाहेंगे?

पैकेजिंग, प्रेजेंटेशन और मार्केटिंग के क्षेत्र में दूरदर्शन कमजोर है मैं मानता हूं और हम इस पर काम कर रहे हैं. दूसरी बात यह है कि १९९० और १९९२ के बाद दूरदर्शन में कोई नए लोग नहीं आए, सभी अपने दौर के हैं. किसी भी संस्था के लिए यह महत्वपूर्ण है कि उसमें नए पीढ़ि के लोग आए तभी नई चीजें भी आती हैं. आपको बता दूं यहां ऐसे भी बहुत से लोग हैं जिन्हें ईमेल पढ़ना और सेंड करने तक नहीं आता. लेकिन हम इस पर काम कर रहे हैं और मुझे उम्मीद है कि ६-७ महीनों में आपको दूरदर्शन का चेहरा बदला हुआ नजर आएगा.

टीआरपी रेटिंग में दूरदर्शन को आप कहां पाते हैं?

मेरा ऐसा मानना है कि इस टीआरपी ने दूरदर्शन को बहुत सिस्टमैटिक तरीके से खत्म करने की कोशिश की है. चार आदमी अगर चिल्ला कर कहें कि हम टॉप पर हैं और उन्हें सुननेवाले भी चार लोग ही हों जिन्होने कुछ और नहीं सुना तो वह भी यही मान लेते हैं कि यही टॉप पर है. अगर २० हजार डिब्बे २ करोड़ लोगों के साथ न्याय करता है और यह सैम्पल साइज सही है तो मुझे कुछ नहीं कहना. लोग गांवों में जाकर क्यों नहीं पूछते. वहां कौन सा चैनल चलता है.

मेट्रो सिटी में अब दूरदर्शन देखा नहीं जा रहा है इसका कारण क्या है?

मुझे तो लगता है कि टीआरपी की बुनियाद ही गलत पड़ी हुई है. हमारा चैनल एक अलग राय रखता है.

दूरदर्शन पर यह आरोप लग रहे हैं कि नए विद्यार्थियों को यहां पर इंटर्नशिप नहीं मिलती है?

हम एक सिस्टम दिल्ली में बना रहे हैं. नए लोगों को लाने के लिए कानून लाना पड़ेगा लेकिन उस पर पहले काम नही हुआ लेकिन अब वर्तमान समय कि सरकार इस पर काम कर रही है. मुझे उम्मीद है कि बहुत जल्द नए लोगों की भर्ती शुरू की जाएगी.

दूरदर्शन यह एक सरकारी चैनल होने की वजह से क्या सत्ता में रहे राजनेताओं की भर्ष्टाचार की खबरें दिखाने के लिए आपके ऊपर दबाव रहता है?

जब जब कोई घटना घटी है दूरदर्शन ने बकायदा उसका प्रसारण किया है. हमने कभी किसी खबर को दबाने का काम नहीं किया है लेकिन हमने कभी किसी चीज को बढ़ा चढ़ाकर दिखाने की कोशिश भी नहीं की है जैसे निजी चैनल करते हैं.

निजी चैनलों के मुकाबले में क्या दूरदर्शन रेवेन्यू के मामले में कमजोर है?

लोग जिसे ज्यादा देखते हैं पैसा भी वहीं ज्यादा लगाए जाते है. हम तो सालों से वहीं दिखाते हैं जिसमें समाज का हित हो. आजकल चैनलवालों के मन में जो आ रहा है वह सब दिखा रहे हैं. कंटेंट पर कोई कंट्रोल ही नही है. कोई नियम नहीं है. दूरदर्शन लोगों को सिटिजन की तरह देखता है और निजी चैनल सिर्फ कंज्यूमर की तरह. यह सबसे बड़ा फर्क है.

सहयाद्री इस मराठी चैनल की रेटिंग अन्य निजी मराठी चैनलों के मुकाबले कम है क्या यह सही है?

देखिए सहयाद्री में वर्ष २००० से २००६ तक १४ करोड़ की कमाई को हम ४० करोड़ तक लेकर गए थे. मैं जब तक रहा मैने किसी भी चैनल को सहयाद्री के सामने आने नहीं दिया. इसे अच्छा कहिए या बुरा लेकिन सरकार में बहुत सा काम किसी एक व्यक्ति के करने और ना करने पर निर्भर करता है. लेकिन अब हम ऐसे कार्यक्रम ला रहे हैं जिससे लोग फिर से इससे जुड़ सकें. अब हम ऐसे लोगों को सम्मानित करेंगे जिन्होने जिंदगी में कुछ हासिल किया है.

दूरदर्शन को अन्य निजी चैनलों के मुकाबले में पेश करने के लिए कौन कौन सी नई टेक्नॉलॉजी और योजनाएं ला रहे हैं?  

बहुत जल्दी नई टेक्नॉलॉजी आनेवाली है जिसका नाम होगा ‘डीटीटी (डिजिटल टेरेस्ट्रियल टेलिकास्ट) और वह एचडी क्वालिटी की तरह काम करेगा. जिससे लोगों को बहुत फायदा होगा. हम इस संबंध मे अप्रैल में एक वर्कशॉप करनेवाले हैं.

अगले पांच साल में आप दूरदर्शन को कहां पाते हैं?

अगर दूरदर्शन ने वक्त के साथ बदलाव नहीं किया तो मुझे नहीं लगता कि दूरदर्शन आगे बढ़ पाएगा. आप जितना भी पैसा और संसाधन डाले लेकिन इससे कुछ हासिल होनेवाला नही है. हमे चाहिए नए लोग, नया खून, नया जुनून. मुझे लगता है अब नया खून आ गया है और वह अपने आप ही बदलाव करेंगे.

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