कोठी की तवायफ से लेकर चांदनी बार तक…

Posted on February 25 2013 by yogesh

मुंबई (गौतम कोरडे) : प्राचीन भारत में राजा-रजवाड़ों और नवाबों की एक अलग ही पहचान हमें दिखाई देती है. आज भी अपने देश में कई ऐसी राजाओं और नवाबों की हवेली हैं जो उनकी शान का नमूना पेश करते हैं. उस वक्त उनके शामें संगीतमय करने के लिए उनके हवेली या कोठी पर गजलों की महफिल सजाई जाती थी. ई.स.१५०० से लेकर १८०० तक कुछ राजा ऐसे भी थे जो संगीत सुनने के लिए तवायफों की कोठी पर भी चले जाया करते थे और उसके बाद भी कई सालों तक यह सिलसिला चलता रहा.

धीरे धीरे समय बदला और रईसों के शौक भी बदलने लगे. जो तवायफ अपने सुर से गजलें या गीत सुनाया करती थीं, आधुनिक संसाधनों के कारण उन्हीं गीतों और गजलों के चाहनेवाले कम होने लगे. क्योंकि उस वक्त कई सारे संगीत के संसाधनों की उपलब्धी बड़ी आसानी से होने लगी. इस वजह से कोठी की बैठक में अपने फन से गजल सुनानेवाली तवायफों को गलें में सुर के अलावा पैरों में घुंघरू बांधकर मुजरा करना पड़ा. यह ज्यादातर राजस्थान, उत्तरप्रदेश के बनारस, लखनऊ, दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में जैसे हैदराबाद और महाराष्ट्र में मुजरे को तमाशा के नाम से जानते हैं.

जैसे जैसे समय बदला महिलाओं को पेश करने का दृष्टिकोण भी बदला. जब राजा-महराजाओं और नवाबों का दौर खत्म होते गया वैसे वैसे कई ऐसी कोठियों की तवायफों का गुजारा भी होना मुश्किल हो गया क्योंकि कोठी की मुजरा या गजल सुनना यह आम लोगों के बस की बात नहीं थी. अपने आवाज का जादू बिखेरनेवाली तवायफ राजा-रजवाड़ों, नवाबों का राज खत्म होते ही उनको अपने देह व्यापार करने के अलावा कोई और चारा नहीं था. कोठी की तवायफ का देह व्यापार का सिलसिला भी काफी समय तक जारी रहा. उन दिनों कई ऐसी घरानों की लड़कियां थी जिन्हें मजबूरी से या डरा धमकाकर वेश्या व्यवसाय के लिए मजबूर किया गया. महिलाओं के देह विक्री का यह क्रम आधुनिक भारत से लेकर अब तक जारी है. भारत में १९०३ में जब भयंकर सूखा आया था उस वक्त पश्चिम बंगाल की अपनी ही माताओं ने अपनी बच्चियों को दस-बीस पैसे में साहुकारों को बेचने पर मजबूर थीं, ऐसी कई घटनाएं हमने पढ़ी हैं और जिसे नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है. उस वक्त भी महिलाओं के जिस्म को बाजार में खरीदनेवाले बहुत लोग थे और आज भी हैं. कुछ सालों पहले मुंबई जैसे शहर में डांस बार हुआ करते थे. उन डांस बारों में कई महिला अपने ठुमके से सारी रात अय्याशबाज पुरूषों का शराब पिलाकर अपने हुस्न के जलवे बिखेरती थी. उन बार बाला की अदाओं पर डांस बारों में लाखों रूपए उड़ाए जाते थे. इन डांस बारों में भी देश के मेट्रो तथा ग्रामीण भागों से महिलाओं की काफी बोली लगती थी. जब अय्याशबाजों के इनसे भी इच्छा भर गई इन्हें भी बंद करा दिया गया. आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि मुंबई के कई ऐसे डांसबार हैं जो राजनेताओं के परिजनों के नाम पर है. जैसे ही बार बंद हुए कई महिलाओं ने अपने देह विक्री का एक अलग जरिया बनाया. लेडिस ब्युटी सलून के नाम पर वह देह व्यापार करने लगी. सामाजिक कुरूप मानसिकता ने औरतों का जिस्म खरीदने की तो हर बार कोशिश की है और आज उसी औरत को जो कोठों में या बार में अपने आवाज और हुस्न के जलवे बिखेरती थी वही औरत देश-विदेश के सबसे बड़े होनेवाले आईपीएल क्रिकेट के महाखेल में पूरी दुनिया के सामने चौकों या छक्कों पर या किसी खिलाड़ी के आऊट होने पर अपनी कातिल अदाओं से चीयर गर्ल नृत्य करके लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती हैं.

चाहे वक्त कोई भी हो कई सारे बदलाव आए, जिस तरह से बदलाव आए उस समय के साथ महिला वेश्याकरण हो या बाजारीकरण हो वह रूकने का नाम नहीं ले रहा है. हर समय में औरतों को बड़े अलग रुप में विपरीत मानसिकता और मनोरंजन के लिए सदा ही अलग अलग रूप में पेश किया गया है. चाहे वह गजल गानेवाली अच्छी फनकार हो या नृत्य करनेवाली तवायफ हो या बार में शराब पेश करनेवाली बार डांसर हो या फिर अभी क्रिकेट के कुंभ में चल रहे आईपीएल की चीयर गर्ल हो. इस तरह का सिलसिला कब तक चलेगा यह तो आनेवाला वक्त ही बताएगा.

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