सूखे के चपेट में महाराष्ट्र, पानी को तरसे किसान

Posted on January 23 2013 by yogesh

कब खत्म होगी ये भूख-प्यास???
सूखे के चपेट में महाराष्ट्र, पानी को तरसे किसान

मुंबई(रजिया निसार) : आज हम उस युग में जी रहे हैं जहां पूरी दुनिया हमारे उंगलियों के पोरों में सिमट आई है. संपन्नता और प्रभुता की बातें चारों तरफ है. यह कहने में अतिश्योक्ति नहीं होगी कि भारत वह देश हैं जहां के लोगों के बीच में जमीन आसमान का अंतर है. एक तरफ ऐसा समाज है जिनके पास सबकुछ पर्याप्त मात्रा में हैं वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनके पास पीने को पानी और खाने को दो वक्त की रोटी भी नहीं है.

आपको बता दें कि महाराष्ट्र में १९७२ के बाद सबसे बड़ा सूखा आया है. यहां की आधे से ज्यादा आबादी पानी की बूंद के लिए भी तरस रही है. केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र को नेशनल डिजास्टर फंड में से ७७८ करोड़ की राशि की सहायता देने की बात कही है, लेकिन क्या सरकार की इस मदद से इन लोगों की प्यास बुझ सकेगी? ये कैसी विडंबना है की जिस महाराष्ट्र के शहर मुंबई को चकाचौंध की दुनिया कहा जाता है, रोशनी का शहर, उसी महाराष्ट्र के अनगिनत लोग अंधेरे में जिंदगी बिता रहे हैं. इस राज्य के किसान पानी को तरस रहे हैं. महाराष्ट्र के कुछ इलाकों की तस्वीर इतनी भयानक है कि यकीन करना भी कष्टकारी है. यह इलाके पिछले दो साल से सूखे की मार झेल रहे हैं लेकिन इन्हें अभी तक कोई राहत नहीं मिली है. महाराष्ट्र राज्य की १२५ तहसील प्यासी है, पानी की किल्लत ने अब सूखे का भयंकर रूप ले लिया है. सांगली जिले में सूखे ने अपना कहर बरपाया है जो काफी भयानक है.

आपको बता दें कि जत, आटपाडी, कवठे-महाकाल, म्हसवड ऐसे इलाके हैं जहां पिछले कई सालों से लगातार कम बारिश हो रही है लेकिन इस वर्ष यहां बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई जिससे गन्ना, हल्दी और केले की फसल बर्बाद हो गई. तलाब, नदी और नाले सब सूख गए. यहां के किसानों की हालत बद से बदतर होती जा रही है. कहते हैं ‘जननी जन्मभूमि स्वर्गदपि गरियसी’ यानी जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बड़ी होती है लेकिन लोगों को इतनी कठोर परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है कि वह एक जगह से दूसरे जगह भी जाने को मजबूर हैं. बीड जिले के आष्टी तहसील में पानी नहीं मिलने से तकरीबन ९ हजार हेक्टर से ज्यादा जमीन बंजर हो गई है. बीड जिले में दूध का उत्पादन भी ज्यादा होता है लेकिन अब वह भी घट गया है. जिस देश में गंगा, यमूना और सरस्वती जैसी नदियों में उफान रहता है उसी देश के एक राज्य में लोग प्यासे दिन गुजार रहे हैं.

यह बात बड़े अचरज की है कि सूखे से सबसे ज्यादा त्रस्त मराठवाड़ा के लोग हैं और इसी मराठवाड़ा में माढा नामक इलाका भी है जो कि कृषि मंत्री शरद पवार का चुनावी क्षेत्र है. शरद पवार महाराष्ट्र के एक कद्दावर नेता हैं और उनके इलाके के लोग जो पानी पी रहे हैं वह जानवर भी नहीं पसंद करते. ऐसी स्थिति अगर हमारे सामने है तो बहुत ही शर्मिंदगी की बात है. लोगों ने जिन्हें अपना नेता चुना है वह ताकतवर पद पर होते हुए भी लोगों के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं. लोगों को दुषित पानी पीना पड़ रहा है जिसमें किटाणू भी होते हैं लेकिन लोगों को जीने के लिए यह सब करना पड़ रहा है.

इस मामले में अब भाजपा ने सरकार को घेरना शुरू किया है. विपक्ष के आरोप के बाद सरकार ने इस बाबत कदम उठाने की जहमत उठाई है. मदद और पुनर्वास मंत्री पतंगराव कदम ने कहा है कि, ‘मराठवाड़ा की स्थिति सच में सही नहीं है. मैं खुद वहां पर जानेवाल हूं. पीने के पानी के लिए हम प्राथमिकता देंगे. उसके बाद खेती और उद्योग के लिए पानी दिया जाएगा.’ पानी की समस्या इस कदर पैर फैला चुकी है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ही साढ़े तीन लाख की आबादीवाले जालना शहर को दूसरी जगह बसाने की बात करने लगे हैं.

महाराष्ट्र की यह स्थिति काफी तकलीफदेह है कि जो किसान लोगों के लिए अनाज पैदा करते हैं उन्हें खुद खाने के लिए अनाज नहीं है और पीने के लिए पानी. ऐसी स्थिति में भी हमारे देश के नेताओं को राजनीति से फुर्सत नहीं मिल रही है, यह दुखद है. सूखे से पीड़ित यहां के लोगों को पानी के दर्शन केवल एक दूसरों की आंखों में ही होते हैं. ऐसे स्थिति में सरकार को जल्द से जल्द इन सभी को राहत पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए.

Powered By Indic IME