राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने उठाया साहसिक कदम

Posted on November 26 2012 by yogesh

मुंबई(पिट्स प्रतिनिधि) : मुंबई हमले के एकमात्र जीवित दोषी आतंकी अजमल आमिर कसाब को गत बुधवार को पुणे की येरवडा जेल में फांसी दे दी गई है. मुंबई पर हुए उस हमलों में तकरीबन १६६ लोगों की जान गई थी और कसाब को हुए फांसी से उन्हें न्याय मिला है. राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने कसाब को फांसी देने और उस घटना में मरे हुए लोगों के परिवारजनों को राहत देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. प्रणव के इस कदम की सराहना की जानी चाहिए क्योंकि यह फैसला एक साहसिक कदम है. साथ ही देश के दुश्मनों को एक संदेश भी गया है कि देश पर बुरी नज़र डालनेवालों को बख्शा नहीं जाएगा.

गौरतलब है कि १६ अक्टूबर २०१२ को गृह मंत्रालय ने कसाब की दया याचना नामंजूर कर दी. ५ नवंबर को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने दया याचिका खारिज की. ७ नवंबर को गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने उनपर दस्तखत किए. ८ नवंबर को गृहमंत्रालय ने फाइल महाराष्ट्र सरकार को सौंपी. उसी दिन कसाब को २१ नवंबर को फांसी देने का निर्णय लिया गया. १९ नवंबर को कसाब को मुंबई के आर्थर रोड जेल से पुणे के येरवडा जेल ले जाया गया. २१ नवंबर को येरवडा जेल में सुबह सात बजे कसाब को फांसी दे दी गई.

अब देश की जनता को देश के राष्ट्रपति से यही उम्मीद है कि उनके पास २००१ में संविधान पर हमला करनेवाले आतंकी अफजल गुरू की दया याचिका की जो अपील आई है उसे भी खारिज किया जाए और इस सिलसिले में भी जल्द ही उनकी तरफ से फैसला लिया जाएगा.

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