ईमानदार अधिकारियों का हौसला बढ़ाने की जरूरत

Posted on October 29 2012 by yogesh

मुंबई(रजिया निसार): ऐसा कई बार सुना है कि सच कहनेवालों और ईमानदारी से काम करनेवालों को लोग सर आंखों पर बिठाते हैं और उनके हौसलों की तारीफ करते हैं लेकिन आजकल देश में उल्टी ही गंगा बह रही है. चोरी और लूटपाट करनेवालों को बचाया जा रहा है और ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभानेवाले को मारने की कोशिश की जा रही है. उत्तरप्रदेश के बदायुं में जिला आपुर्ति अधिकारी पद पर कार्यरत नीरज सिंह अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जिन्हें ईमानदारी से काम करने और भ्रष्टाचारियों पर लगाम लगाने के एवज में जान से मारने की कोशिश की गई.

आपको बता दें कि नीरज सिंह ने एक दुकान में मिट्टी के तेल को गैरकानूनी तरीके से बेचे जाने की वजह से उस पर ताला लगा दिया था. जिसके कारण उनको जिंदा जला देने की कोशिश की गई. इसमें तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. इस तरह से एक ईमानदार अधिकारी को उसके निष्पक्ष रूप में किए गए कार्य की वजह से उसे मारने की कोशिश करना हमारे कानून व्यवस्था के मुंह पर एक तमाचा है जिसकी गूंज हमेशा ही सुनाई देती रहेगी. साथ ही नीरज सिंह को मारने की कोशिश उन भ्रस्ट लोगों के नीडरत को जग जाहिर करता है जिनके लिए देश की कानून व्यवस्था कोई मायने नहीं रखती.

इस तरह का किसी ईमानदार अफसर पर हमला होना कोई पहली बात नहीं है. सत्येन्द्र दुबे को हम आज भी नहीं भूले हैं जिन्होने देश में अच्छा काम करने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी. लेकिन आज भी सत्येन्द्र दुबे लोगों के लिए एक प्रेरणा के स्रोत हैं. परंतु एक बात गौर करनेवाली है कि इस तरह के कारनामों पर सरकार का रवैय्या लिया दिया रहता है. पुलिस प्रशासन भी ज्यादा सक्रीय भूमिका निभाते हुए नज़र नहीं आती. अगर लोगों ने इस मुद्दे पर ध्यान दिया तो कुछ दिन तक इस विषय पर चर्चा करेंगे और फिर भूल जाएंगे. लेकिन अब जरूरत है प्रशासन को सख्त रवैय्या अपनाने की. आए दिन आरटीआई कार्यकर्ता जो अपने जान का जोखिम लेकर सच को बाहर लाते हैं उन पर भी हमले होते रहते हैं, लेकिन सरकार की नज़र इस ओर जाती ही नहीं. क्या सरकार इस तरह के भ्रष्ट लोगों को ढ़ील देकर ईमानदार और देश के लिए तन मन से काम करनेवालों का हौसला नहीं पस्त कर रही है? लेकिन अब इस सरकार से भी क्या उम्मीद करें कि सरकार भी अब गुंगी बहरी बन गई है.

यह कितने ही शर्मींदगी की बात है कि देश में भ्रष्टाचारियों का पर्दाफाश और उनके खिलाफ कार्रवाई करनेवाले को जिंदा जलाने की कोशिश की जा रही है, उनके तबादले कर दिए जा रहे हैं. ऐसे भ्रष्ट लोगों को यह बात समझाना अति आवश्यक है कि देश में कानून व्यवस्था से बढ़कर कुछ भी नहीं है. इस तरह के कारनामों को खुलेआम अंजाम देने से ना केवल व्यक्तिगत स्तर पर भय का निर्माण हो रहा है बल्कि समाज में भी एक तनाव का माहौल पैदा हो रहा है. ऐसे भ्रष्ट लोगों के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार को सख्त कदम उठाकर एक मिसाल पेश करना होगा जिससे कोई आइंदा इस तरह के कांड को अंजाम देने के बारे में सोचे भी नहीं.

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