कीट के काटने पर कैसे बचे?

Posted on September 24 2012 by yogesh


भारतीय मॉन्सून का अगर मजा लेना चाहते हैं तो खूब लीजिए लेकिन कुछ बातों को याद रखना बहुत जरूरी है. भारत में मॉन्सून का माहौस बहुत ही खूबसूरत होता है, ऐसे मौसम में बाहर जाना, घूमना, फिरना बहुत ही दिलचस्प होता है. लेकिन ऐसे ही मौसम में एक और समूह निकलता है जिसे कीट कहते हैं और भारत के इस मौसम की परिकल्पना इन कीटकों के बिना आप कर ही नहीं सकते. इन कीटकों के काटने से खुजली से लेकर गंभीर एलर्जिक रिएक्शन होने तक की पूरी संभावना होती है.

ऐसे मौसम में जब कीटक आपको काटें तो आप इसे नज़रअंदाज ना करें बल्कि इसे गंभीरता से लें, ऐसी सलाह डॉ. दे रहें है. भले ही आपको मक्खी, ततैया या चींटी ने ही क्यों ना काटा हो यदि काटने की जगह पर दर्द या जलन हो तो आप बिना देरी कजिए डॉ. को दिखाएं.

ऐसे मौसम में मच्छर का काटना आम बात है लेकिन चिकनगुनिया और डेंगू के कई केसेस सामने आने लगे हैं. जो काफी गंभीर मामला हैं. यदि आप और आपके बच्चे सुबह-शाम सैर करने के शौकीन हैं तो आपको सावधानी बरतने की जरूरत है. कीटकों के काटने के बाद यदि आपने उसे नज़रअंदाज कर दिया तो यह काटना आपको ५ से ७ दिन के बाद काफी कष्ट पहुंचा सकता है. ९० फीसदी मामलों में २४ घंटे के अंदर ही काटे हुए जगह पर लाली या सूजन हो जाती है. ऐसे में काटनेवाले कीट की पहचान होनी बहुत जरूरी है जिससे आप सही कदम उठा सकते हैं और आनेवाली मुसीबत से बच सकते हैं.

बारिश में कीटों का कहर: ऐसे देखा जाए तो भारत में १२ महीने कीटों का प्रकोप रहता है पर बारिश में इनका कहर बड़े पैमाने पर बढ़ जाता है. ऐसे मौसम में यह कीट अधिक सक्रीय रहते हैं. यदि आपकी त्वचा से चिपक कर कोई पिस्सू काट रहा है तो जितनी जल्दी हो सके उसे त्वचा से खींचकर फेंक दे जिससे आप पिस्सूओं से होनेवाले लाइम डिसीज से बच सकें. यह एक बैक्टेरियल रोग है जिसकी शुरूआत खुजली से होती है. मधुमक्खी और ततैया जैसे डंक मारनेवाले कीट आम हैं. चिंटी तथा मच्छर जैसे कीट डंक मारनेवाले कीटों की तूलना में कम दर्द देते हैं लेकिन ये भी आपको काफी परेशानी में डाल सकते हैं. ज्यादातर कीटों में जहर नहीं होता और इनके काटने से त्वचा पर पैदा होनेवाले लक्षण शरीर के प्रतिरोधी तंत्र की कीटों के थूक के साथ प्रतिक्रिया करते हैं. शरीर की प्रतिक्रिया कीट पर निर्भर करती है. कुछ लोग कीटों के काटने पर अन्य लोगों की तूलना में अधिक प्रभावित होते हैं और उन्हे उल्टियां आना साथ ही सांस लेने में भी तकलीफ होने लगती है. उम्र बढ़ने की वजह से सहनशक्ति भी बढ़ जाती है इसलिए कीट के काटने से बच्चे ज्यादा प्रभावित होते हैं.

अलग अलग प्रभाव: अधिकतर कीटों के काटने से होनेवाली खुजली या लाली एक सप्ताह से ज्यादा समय तक नहीं रहती. इससे ज्यादा समस्या नहीं होती और इसका इलाज घर पर ही हो जाता है. वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों के लिए कीटकों का काटना बहुत ज्यादा तकलीफदायक होता है.

इससे होनेवाली परेशानियां:

संक्रमण: कीट के काटने से संक्रमण होना सबसे आम बात है. काटे गए जगह पर जख्म हो जाने से ऐसा होता है. इसके बाद बुखार आना भी स्वाभाविक है. इसके इलाज के लिए एंटिबायोटिक दवाएं लेनी चाहिए.

छाले: यदि कीट के काटने के बाद छाले पड़ जाएं तो उन्हे फोड़ने की कोशिश ना करें, ऐसा करने से संक्रमण हो जाता है. छालों की वजह से दर्द नहीं होता जब तक कि वह फूट ना जाएं और अंदर की खाल दिखने ना लगे. सम्भव हो तो प्रभावित त्वचा पर पट्टी बांध कर रखें.

एलर्जी: कीट के काटने के बाद यदि काटे हुए स्थान के अलावा शरीर के अन्य हिस्सों पर भी सूजन या खाज होने लगें तो आपको समझ जाना चाहिए कि आपको एलर्जी हो गई है. इससे सांस लेने और खाने पीने में भी समस्याएं हो सकती हैं. ऐसी स्थिति में आवश्यक है कि आप जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखाएं.

एनफलैक्सिस: यह जीवन के लिए खतरा भी बन सकता है इसके इलाज के लिए आपातकालीन चिकित्सा की जरूरत पड़ती है. एनफलैक्सिस कीट के काटने पर होनेवाला सबसे खतरनाक समस्या है. आघात, सांस न ले पाना, होंठों का सूजना तथा चक्कर आना इसके सामान्य लक्षण हैं.

डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

किसी भी कीट के काटने से यदि लक्षण गंभीर होने लगें तो बिना देरी किए डॉ. के पास जाना चाहिए. मकड़ी के काटने पर उसका असर बहुत जल्द शुरू हो जाता है. इसलिए इसका इलाज तुरंत करना चाहिए. सांस लेने में तकलीफ, होंठों या गले में सूजन, चक्कर आना, बेहोश हो जाना, धड़कन तेज हो जाना यह सभी लक्षण दिखते ही बिना देरी किए डॉ. को दिखाएं.

कीट जिनसे सावधान रहने की जरूरत है:

मच्छर:  ये अधिकतर शरीर के खुले भागों जैसे हाथों, बाहों, गर्दन आदि पर काटते हैं. इसके काटने  पर बरसात के मौसम में अधिकतर टाइफाइड, डायरिया और पीलिया जैसे संक्रमण होते हैं.

मकड़ी: इसके काटने पर काटी गई जगह सूज जाती है जिससे काटने का निशान दिखाई देता है. यह सूजन आकार में काफी बढ़ भी सकती है और कई दिनों तक बनी रह सकती है. इसके काटने से तेज दर्द भी होता है. यह रात में हमारे शरीर पर भी चलती हैं और इनके काटने से हमेशा ही दर्द हो ऐसा जरूरी नहीं होता.

पिस्सू: पिस्सू का काटना काफी आम बात है. यह ज्यादातर पैरों में काटते हैं. काटने पर अक्सर दर्द नहीं होता और वहां खुजली होने लगती है. पिस्सू के काटने से लोगों में अलग अलग तरह के लक्षण दिखाई देते हैं.

माइट: लंबी घास में चलने की वजह से पैरों में खुजली वाले चकत्ते पड़ जाते हैं. एक से दो सप्ताह के बीच यह चकत्ते अपने आप ही सही हो जाते हैं. इस पर प्राकृतिक एंटीसैप्टिक के तौर पर काम करनेवाला टी ट्री ऑयल लगाने से राहत मिलती है.

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