हेल्थ टिप्स – खान-पान को लेकर कुछ गलतफहमियां…

Posted on September 17 2012 by yogesh

  • ऐसा काफी समय से समझा जाता रहा है कि सोया से रजोनिवृत्ति संबंधि समस्याएं कम होती है. ऐसा दावा किया जाता रहा है कि जो महिलाएं रजोनिवृत्ति के दौर से गुजर रहीं हो उनके लिए सोया सहायक होता है. परंतु मियामी यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक शोध में पाया गया है कि सोया हॉट फ्लेशेज तथा बोन डैंसिटी लॉस में कोई योगदान नहीं देता. इसके विपरीत ऐसा पाया गया कि सोया खानेवाली महिलाओं में हॉट फ्लेशेज की समस्या अधिक देखी गई.
  • ऐसी आम धारणा है कि ताजी सब्जियां या खाद्य पदार्थ फ्रीज में रखी गई सामग्रियों से ज्यादा पौष्टिक होती हैं. परंतु आपको बता दें कि फ्रीज की हुई खाद्य सामग्री ताजा के मुकाबले ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक हैं. अध्ययन से पता चलता है कि फ्रीज की हुई मटर में विटामिन्स और विशषकर विटामिन सी की उच्च मात्रा मौजूद रहती है. फ्रीज करने पर वस्तुओं में से पौष्टिक तत्वों के नष्ट होने की प्रक्रिया रूक जाती है. गौरतलब है कि ताप, हवा, पानी तथा समय के कारण खाद्य सामग्री में मौजूद तत्व नष्ट होने लगते हैं.
  • लोगों का मानना होता है कि डेयरी उत्पाद जैसे दूध, दही, पनीर इत्यादि व्यक्तियों का मोटापा बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं. परंतु ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में स्थित कर्टिन यूनिवर्सिटी ऑफ टैक्रोलॉजी के अध्ययन में उन लोगों में वजन कम होता देखा गया जो डेयरी उत्पादों का सेवन करते हैं. इस अध्ययन में यह भी पाया गया कि जिनकी डाइट में डेयरी उत्पाद शामिल किए गए थे उनके पेट पर चर्बी भी कम हो गई और ब्लड प्रेशर भी काबू में आ गया. दरअसल डेयरी उत्पाद प्रोटीन जिंक एवं विटामिन बी जैसे जरूरी पोषकों से भरपूर होते हैं, इसलिए डेयरी उत्पाद में कैल्शियम अधिक पाया जाता है जो व्यक्ति को स्वस्थ्य रखते हैं. डेयरी उत्पाद के कई कम वसावाले संस्करण भी बाजार में उपलब्ध हैं जैसे स्किम्ड या सैमी स्किम्ड मिल्क, लो फैट, दही तथा घटाई गई फैटवाला पनीर. पर आप यह बिल्कुल ना सोचें कि कम वसावाले संस्करणों में कम कैल्शियम होता है. पूरी वसावाले दूध के मुकाबले स्किम्ड या सैमी स्किम्ड मिल्क में थोड़ा अधिक कैल्शियम पाया जाता है.
  • ऐसा माना जाता है कि खाने में मौजूद नमक से हाई ब्लड प्रेशर होता है और १९४० में ड्यूक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता बाल्टर कैंपनर इसिलिए बहुत ज्यादा प्रसिद्ध हो गए थे क्योंकि उन्होने हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को नमक खाने से मना कर दिया था. परंतु आगे चलकर कई अध्ययनों में यह बात साफ हो गई कि भोजन में कम नमक होने से हाई ब्लडप्रेशर कम तो होता है परंतु नमक को पूरी तरह छोड़ देना भी उचित नहीं है. एक व्यस्क व्यक्ति के शरीर में तरल संतुलन बनाए रखने के लिए कुछ मात्रा में सोडियम की आवश्यकता होती है. आजकल लोग अपने भोजन में ९ ग्राम नमक का सेवन कर लेते हैं परंतु इसकी अधिकतम मात्रा ६ ग्राम प्रतिदिन सुझाई गई है.
  • व्यक्ति अक्सर सोचता है कि प्रोटीन की अधिकतम मात्रा उसके लिए अच्छा होता है परंतु विशेषज्ञ इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि प्रोटीनयुक्त भोजन का ज्यादा मात्रा में सेवन उचित नहीं है. विशेषज्ञों के अनुसार हमारी रोजाना डाइट में १० से १५ प्रतिशत प्रोटीन की मात्रा होनी चाहिए. इसका मतलब पुरूषों को कम से कम ५५ ग्राम और महिलाओं को ४५ ग्राम. १९५० में लोगों को अच्छे स्वास्थ्य के लिए भोजन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने के लिए कहा गया परंतु इस से पाया गया कि प्रोटीन की ज्यादा मात्रा होने की वजह से लिवर, गुर्दा तथा अन्य शारीरिक अंगों पर ज्यादा दबाव पड़ता है.
  • लोग अक्सर मानते हैं कि कार्बोहाइड्रेट्स शरीर के लिए बुरे हैं. परंतु भोजन में कार्बोहाइड्रेट्स की प्रचूर मात्रा ऊर्जा का आदर्श स्रोत माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि कार्बोहाइड्रेट्स व्यक्ति को मोटा बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं परंतु ऐसा अभी तक साबित नहीं हो पाया है कि कार्बोहाइड्रेट्स से भरपूर भोजन अन्य भोजन की तूलना में वजन बढ़ाने में अधिक सहायक होते हैं. वास्तव में वजन बढ़ाने का काम कैलोरीज का होता है.

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