‘बालासाहब और राजसाहब’

Posted on September 17 2012 by yogesh

बालासाहब और राजसाहब

मैं मराठी माणुस बोल रहा हूं

मुंबई (चंदन पवार):Email: chandanpawar.pits@gmail.com

मराठी माणुस आज भी बालासाहब को मानते है. उन्होने मराठी माणुस को जो प्यार, मोहब्बत दिया है उसकी ऋणी सदा मराठी माणुस और महाराष्ट्र की जनता रहेगी. आज भी बाला साहब की एक आवाज़ पर कुछ भी कर गुजरने की महाराष्ट्र के नौजवानो में हिम्मत है. वह उनको अपना मसीहा मानते हैं और अपने दिलों में उनके लिए सम्मान का एक स्थान बनाके रखा है. शायद ही हिंदुस्तान में किसी और नेता ने इस तरह की ‘प्यार की कमाई’ की हो?

मैं ‘मराठी माणुस’ आपसे कहना चाहता हूं कि मैने आपको कई सालों से सुना है, आपने मराठी लोगों की भावना का आदर बखूबी किया है. इसी बात को मद्देनज़र रखते हुए मेरी भी कुछ भावनाएं आप तक पहुंचाना चाहता हूं. पहले से ही शिवसेना ने मराठी लोगों के हित के लिए हजारों, लाखों काम अपने और अपने सिलेदारों की ओर से किए हैं. इसमें हमारे हक के लिए जो भी आपसे बन पाया है वह आपने किया है. इसी रास्ते पर आज उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे भी चल रहे हैं. मुझे यह भी अच्छा लगा कि अपने ही पिता के बनाए रास्तों पर यह दोनों चल रहे हैं. आज भी वही अक्रामकता इन दोनों में है.

परंतु मैं ‘मराठी माणुस’ कुछ मुद्दों को लेकर आपसे भिन्न मत रखता हूं. आज महंगाई, भ्रष्टाचार, कुपोषण और भूखमरी ने महाराष्ट्र के साथ साथ देश की भी नींद उड़ा दी है. यहां पर मैं नींद शब्द का प्रयोग आज जो सत्ता में बैठे उन राजनेताओं के लिए नहीं इस्तेमाल कर रहा हूं बल्कि गरीब जनता और पिछड़े वर्गों के लोगों के लिए संबोधित कर रहा हूं. बहुत लोगों को आज दो वक्त का खाना जुटाना भी बहुत मुश्किल हो रहा है, यह मैने खुद महसूस किया है. आज भी कई     मराठी और गरीब वर्ग के लोग फुटपाथ पर अपनी पीढ़ी दर पीढ़ी से रह रहे हैं. मेरे महाराष्ट्र के किसान भाई आत्महत्या कर रहे हैं. सामान्य इंसान आज इस तरह की सभी बड़ी समस्याओं से पूरी तरह से परेशान हो गया है. आज भी किसी सरकारी दफ्तर में घूस दिए बिना मेरा काम नहीं हो रहा है. मैं हर जगह से परेशान हूं. ऐसे में आज की राजनैतिक व्यवस्था से भी मैं निराश ही हो रहा हूं. बस मुझे मेरा महाराष्ट्र चलानेवाला एक अच्छा, ईमानदार और कर्तव्यपरायण राजनेता की जरूरत है. आज भी मेरे मन के किसी कोने में इस व्यवस्था में सुधार होगी, ऐसी उम्मीद है. मुझे आज भी कुछ राजनेताओं पर विश्वास है जो देश और राज्य को अच्छी तरह चला सकते है. ऐसे में बालासाहब, आपके द्वारा देश के प्रधानमंत्री पद के लिए ‘सुषमा स्वराज’ का नाम घोषित करना मुझे सोचने पर मजबूर कर रहा है. जी हां, सुषमा स्वराज एक अच्छी वक्ता है जो उच्च विचार भी रखती हैं और देश के विकास की बात भी करती हैं. मैने जब उनका प्रणव मुखर्जी के लिए लोकसभा में कहा गया भाषण सुना तो मुझे भी इनकी बातें मोहित कर गई. परंतु बालासाहब मैं कोई मराठी माणुस का नेतृत्व नहीं कर रहा हूं मगर मैं सामान्य लोगों में रहनेवाला आम ‘मराठी माणुस’ हूं. इसके कारण उनके मन और विचारों को जानता हूं इसलिए मैं आपको यह बात कह रहा हूं कि ५० प्रतिशत से भी ज्यादा लोगों को यही लग रहा है कि देश का प्रधानमंत्री ‘नरेंद्र मोदी’ जैसा नेता होना चाहिए. क्योंकि इसी विषय से जब मैने लोगों से बात की तो उनका कहना यह था कि “देश आज लंगड़ा हो गया है, इसे चलाने के लिए ऐसे व्यक्ति की जरूरत है जो आतंकवाद, भ्रष्टाचार और महंगाई जैसे सामान्य लोगों से जुड़ी समस्याओं से पूरी तरह निजात पा सके और देश की उन्नति के लिए सोच सके”. जिस तरह मोदी ने गुजरात राज्य को एक हरा भरा और विकसित राज्य बना दिया है उसे देख मैं ‘मराठी माणुस’ भी यह सोचने पर मजबूर हो गया कि इतनी तरक्की यह आदमी गुजरात में कर सकता है अगर वो देश का प्रधानमंत्री बनता है तो मेरे देश में खुशहाली जरूर लेकर आएगा.

बालासाहब आपके विचारों का मैं कद्र करता हूं परंतु मेरा विचार आपके इस विचार से नहीं मिल रहा है. मैं किसी भी राजनैतिक पार्टी से जुड़ा नहीं हूं. मैं एक सामान्य व्यक्ति हूं जो रोज बस और ट्रेनों में धक्के खाकर दफ्तर पहुंचता हूं, मैं रोज ९० रूपये किलो से सब्जी और ५० रूपये लीटर से दूध लेता हूं. मैं रोज जीता हूं और रोज मरता हूं, ऐसे में मुझे मेरे देश की ओर मेरी परेशानी को हल करनेवाला नेता ही मैं सर्वोच्च स्थान पर बैठा हुआ देखना चाहता हूं. मैं सिर्फ नरेंद्र मोदी को ही प्रधानमंत्री के रूप में देखने के पक्ष में नहीं हूं, उनके जैसा कर्तव्यवान कोई भी नेता, जो आज की गंभीर हालातों से दो हाथ करनेवाला हो ऐसा कोई भी व्यक्ति जो देश को संभालनेवाला हो उसे मैं अपना मसीहा मानने के लिए तैयार हूं.

इस विषय में मैं मराठी माणुस महाराष्ट्र की तरक्की के बारे में भी सोच रहा हूं. पहले मैं मेरे घर को उन्नति की तरफ लेकर जाने के पक्ष में हूं. तब आगे जाकर मैं महाराष्ट्र की उन्नति कर सकता हूं. महाराष्ट्र की और मेरे उन्नति के लिए जिनको मैने अपना नेता माना है उनके पास मेरे महाराष्ट्र की विकास की ब्लू प्रिंट होनी चाहिए, आज यह ब्लू प्रिंट किसके पास है यह सब जानते हैं. जी हां मैं बात कर रहा हूं राज ठाकरे की. उनके बोलने के अंदाज और कर दिखाने के हौसले को देखकर मैं काफी प्रभावित हो गया हूं. मैं उन्हे २०१४ में मुख्यमंत्री के रूप में देखना अपना सौभाग्य समझता हूं. परंतु यहां पर भी मुझे उनके द्वारा किए गए कुछ कार्यों से भी चिंता हो रही है. जैसे की उन्होने महान गायिका आशा भोसले के सहभागी होनेवाले ‘सुरक्षेत्र’ इस कार्यक्रम में पाकिस्तानी गायक सहभाग लेने के विषय में आपने आपत्ती जताई तब मैं आपका देशप्रेम उसमें देख रहा था. परंतु जब आपने इसी कार्यक्रम को चलाने के लिए इजाजत दे दी तब मैं दुखी हुआ. इस संदर्भ में आपने बोलते हुए कहा कि ‘बोनी कपूर आपके पास आये और उन्होने कहा कि इस कार्यक्रम पर पहले ही बहुत सारा पैसा खर्च हो चुका है और कई भाग इसके शूट हो गए हैं. इसलिए आपने उनको इजाजत दे दी और उनकी तरफ से आश्वासन लिया है कि आगे से पाकिस्तानी कलाकारों को लेकर यह कोई कार्यक्रम नहीं करेंगे. मगर राज साहब, मैं ‘मराठी माणुस’ आपको ‘महाराष्ट्र धर्म’ का वास्ता देकर पूछता हूं अगर किसी पाकिस्तानी आतंकवादी ने आकर आपको बताया कि राज साहब मुझे बम बनाने के लिए लाखों रूपयों का खर्च आया हैं और वह आपसे विनंती कर रहा है कि मुझे इसे कहीं पर डालना है तो क्या आप इसे इजाजत दे देंगे? क्योंकि गलत आखिर गलत होता है. राष्ट्रप्रेम के लिए पैसे कोई मायने नहीं रखते हैं. केवल इस बात से ही मैं नाराज़ नहीं हूं. मैं आपके हिरानंदानी के सम्मान का भी विरोध कर रहा हूं. जिस हिरानंदानी ने मराठी माणुस के घरों का सौदा किया है. ऐसे व्यक्ति का सम्मान आपके हाथों होते हुए देखकर मेरा मन क्या कहता होगा? जब आपने कहा कि मुझे मालूम नहीं था कि वहां पर हिरानंदानी आएंगे. परंतु साहब आपको मैं बता दूं कि मैं बड़ा होशियार हो गया हूं क्योंकि आप ही नहीं कोई भी नेता किसी भी कार्यक्रम में पहुंचने से पहले उस कार्यक्रम की रूपरेखा और वहां कौन कौन आनेवाला है, यह जानने के बाद ही वहां पर जाते हैं. इस विषय में एक बार आपके बातों पर भरोसा करके मैं भूल जाता हूं लेकिन आपका दूसरा बयान मेरे दिल को घायल कर रहा है, वो है आपने कहा कि मुझे अचानक से कहा गया कि आपको उनका सम्मान करना है इसलिए मैं ना नहीं बोल सका. मगर राजसाहब आप अगर उस कार्यक्रम में मराठियों के सीने पर बैठकर आलीशान महल खड़ा करनेवाले हिरानंदानी को आप अपने हाथों से उसी जगह सम्मान करने से इंकार कर देते. क्योंकि पूरा महाराष्ट्र आपको देख रहा था, क्यों नहीं आपने यह किया? आप अपनी शेली में उसी जगह बोल देते कि मैं इनका सम्मान नहीं करूंगा तो आज मैं मराठी माणुस गर्व से फूले नहीं समाता. मैं आपको जिस जगह देखना चाहता हूं उसे बस एक सपना ही मत रहने दीजिए. इसलिए इस तरह की बातों से आप दूर रहेंगे तो मुझे भी खुशी मिलेगी.

महाराष्ट्रीयन होने का मुझे गर्व जरूर है मगर मैं भी गलती कर रहा हूं. जब मैं किसी उत्तर भारतीयों पर आरोपों के रॉकेट डालता हूं तब मुझे भी सोचना चाहिए कि मैं कितना मराठी हूं. एक तरफ मैं मराठी होने का दावा करता हूं और दूसरी तरफ मैं अपने दोस्तों से हिंदी में बात करता हूं. कितने मराठी लड़के लड़कियों को मराठी लेखकों के दस नाम याद हैं. मराठी को बढ़ावा देनेवाले हम लोग मराठी फिल्मों को छोड़कर हिंदी फिल्मों के लिए कतार लगाते हैं? सिर्फ मराठी है हम, इस बात से संतुष्ट मत होईए. मेहनत करके कुछ बनके दिखाईए, एमपीएससी और यूपीएससी जैसे परिक्षाओं में कितने मराठी युवाओं का नाम आता है. इस बात पर हमें ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. मराठी का मुझे झुठा अभिमान नहीं बल्कि सच्चा अभिमान बनाना होगा तभी जाकर मैं पूरी तरह मराठी बन पाऊंगा.

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